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Hindi News ›   Chandigarh ›   PGI will make organ donation aware with 'Nai Sochh' short film

‘नई सोच’ शार्ट फिल्म से पीजीआई अंगदान को करेगी जागरूक

Fri, 23 Oct 2020 02:23 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2020 02:23 AM IST
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PGI will make organ donation aware with 'Nai Sochh' short film
चंडीगढ़। कोरोना महामारी के इस दौर में भी लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करने के लिए पीजीआई लगातार प्रयासरत है। इस बार पीजीआई के नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन ने रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (रोटो) के साथ मिलकर लोगों को जागरूक करने के लिए शार्ट फिल्म ‘नई सोच’ बनाई है।
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फिल्म में मरीजों की सेवा में हर पल तत्पर रहने वाले नर्सिंग ऑफिसर ने अपने अभिनय के द्वारा लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करने का सफल प्रयास किया है। इतना ही नहीं उन्होंने फिल्म के माध्यम से अंगदान के रास्ते में आने वाली रुकावटें, उसे दूर करने के लिए किए जाने वाले उपाय और पीजीआई के कार्यों को दर्शाया है। रोटो के नोडल ऑफिसर डॉ. विपिन कौशल ने बताया कि 35 मिनट की इस शॉर्ट फिल्म में अंगदान से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करने का प्रयास किया गया है। जल्द ही पीजीआई इसे लांच करेगा ताकि इसके माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करके अंगदान से जोड़ा जा सके।
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मौत के बाद ये अंग हो सकते हैं दान
डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैंक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, यूट्रस, ओवरी, फेस, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कॉर्निया, हार्ट वाल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगूठे दान किए जा सकते हैं।
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कौन कर सकता है अंगदान
कैंसर, डायबिटीज घातक बीमारी नहीं है। इससे ग्रसित व्यक्ति भी अंगदान कर सकता है। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले अंगदान नहीं कर सकते।
अंगदान में बाधाएं
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के मामले में नियम के अनुसार, केवल उन्हीं के अंग निकाले जा सकते हैं, जिनकी मृत्यु अस्पताल में होती है। इसके परिणामस्वरूप मौके पर मरने वाले व्यक्ति के परिजन अंगों को दान करने में असमर्थ हैं।

एक अन्य प्रमुख कारण यह है कि बहुत से लोग अपने जीवनकाल में अपने अंगों को दान करने की इच्छा (निधन होने पर अंगों को दान करने की एक पंजीकृत इच्छा) ही नहीं करते हैं।
जागरूकता की कमी।
धार्मिक मान्यताओं के प्रति विश्वास और गलत धारणाएं भी व्यक्तियों को अंगदान करने से बाधित करती हैं।
जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग
यकृत (लीवर), गुर्दा (किडनी), फेफड़े, अग्न्याशय ß आंत।
इन्हें है अंगदाताओं का इंतजार
अंग मरीजों की वेटिंग लिस्ट
किडनी 1980
लिवर 52
पैंक्रियाज 21
हृदय 1
कॉर्निया 2654
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