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पीजीआई के खसरा लैब को डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिली
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चंडीगढ़। पीजीआई वायरोलॉजी विभाग से खसरा लैब को डब्ल्यूएचओ ने मान्यता दे दी है। डब्ल्यूएचओ की प्रतिनिधि डॉ. दीपा शर्मा और डॉ. निर्मल कौंडल के नेतृत्व में 2 और 3 जून को आए प्रतिनिधिमंडल ने विभाग का दौरा किया था।
गौरतलब है कि पीजीआई में 2015 में यह लैब डब्ल्यूएचओ के निर्देश पर खसरा और रूबेला के सीरोलॉजिकल परीक्षण के लिए बनाया गया था। डब्ल्यूएचओ के निर्देशानुसार 2016, 18 और 19 में भी इसका ऑडिट किया जा चुका है। इस दौरान 2019 में यहां खसरा और रूबेला के लिए आणविक परीक्षण भी शुरू कर दिया गया। इस परीक्षण का यह पहला ऑडिट था। गौरतलब है कि 2023 तक खसरा और रूबेला उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा करने में वायरोलॉजी विभाग डब्ल्यूएचओ के सहयोगी के रूप में पिछले छह वर्षों से कार्य कर रहा है। पीजीआई की प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. मिनी पी सिंह ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने पीजीआई निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल से मुलाकात की और कोरोना के दौरान किए गए कार्यों की सराहना की। दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रतिनिधियों ने विभाग में खसरा और रूबेला के सीरोलॉजिकल और आणविक परीक्षण की पूरी प्रक्रिया का आलोचनात्मक विश्लेषण किया और अपने सुझाव दिए। जिसके बाद इस परीक्षण के लिए डब्ल्यूएचओ ने मान्यता प्रदान की है।
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गौरतलब है कि पीजीआई में 2015 में यह लैब डब्ल्यूएचओ के निर्देश पर खसरा और रूबेला के सीरोलॉजिकल परीक्षण के लिए बनाया गया था। डब्ल्यूएचओ के निर्देशानुसार 2016, 18 और 19 में भी इसका ऑडिट किया जा चुका है। इस दौरान 2019 में यहां खसरा और रूबेला के लिए आणविक परीक्षण भी शुरू कर दिया गया। इस परीक्षण का यह पहला ऑडिट था। गौरतलब है कि 2023 तक खसरा और रूबेला उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा करने में वायरोलॉजी विभाग डब्ल्यूएचओ के सहयोगी के रूप में पिछले छह वर्षों से कार्य कर रहा है। पीजीआई की प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. मिनी पी सिंह ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने पीजीआई निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल से मुलाकात की और कोरोना के दौरान किए गए कार्यों की सराहना की। दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रतिनिधियों ने विभाग में खसरा और रूबेला के सीरोलॉजिकल और आणविक परीक्षण की पूरी प्रक्रिया का आलोचनात्मक विश्लेषण किया और अपने सुझाव दिए। जिसके बाद इस परीक्षण के लिए डब्ल्यूएचओ ने मान्यता प्रदान की है।
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