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नया चमत्कार करने जा रहा है PGI, सफल हुआ तो रच देगा इतिहास
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:02 AM IST
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चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल
- फोटो : PTI
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एक साथ किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट करने के बाद पीजीआई अब चिकित्सा जगत में एक और बड़ी छलांग लगाने की दिशा में काम कर रहा है। पीजीआई अब लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारी में जुट गया है।
यह सर्जरी लिवर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए विशेष दक्षता की जरूरत पड़ती है। पीजीआई के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। हाल ही में एक साथ किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट करने के बाद पीजीआई के डाक्टरों का आत्मविश्वास बढ़ा है। यदि पीजीआई इस सर्जरी को भी सफलतापूर्वक कर लेता है तो यह संस्थान देश का पहला सरकारी हास्पिटल होगा। हीप्टोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. डा. आरके धीमान ने दावा किया है कि अगले एक महीने के भीतर इस सर्जरी को पीजीआई के डाक्टर कर देंगे।
इस तरह से होगा फायदेमंद
अभी लिवर ट्रांसप्लांट करने में दो बड़ी बाधाएं आती हैं। पहला, लिवर का मिलना और दूसरा उसके ट्रांसप्लांट का खर्च। डॉक्टरों के मुताबिक पीजीआई और बाकी संस्थानों में डिजीज (मृतक) डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करते हैं। साल 2011 में इसकी शुरुआत हुई थी। अब तक 40 लिवर ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इस प्रासेस में मरीज को लिवर तभी मिलेगा, जब कोई डोनेट करेगा। डोनेट सिर्फ एक्सीडेंटल केस में ही हो सकता है।
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साफ शब्दों में यदि किसी व्यक्ति का एक्सीडेंट हुआ। एक्सीडेंट में उसके ब्रेन में चोट आई और बाकी अंग खासतौर पर लिवर ठीक है, उस स्थिति में घायल के परिजनों की स्वीकृति मिलने पर ट्रांसप्लांट संभव होता है। ये काफी मुश्किल है क्योंकि लिवर डैमेज होने वालों की काफी लंबी लिस्ट है और डोनेट करने वालों की काफी कम। दूसरा, ट्रांसप्लांट का खर्च। प्राइवेट हास्पिटल में इसका खर्च 10 से 63 लाख रुपये आता है जबकि पीजीआई में पांच से 15 लाख।
अब बात करते हैं लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की। इसमें सेहतमंद व्यक्ति के लिवर का कुछ हिस्सा लेकर दूसरे में ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। यह आसानी से संभव है, सिर्फ शर्त यह होनी चाहिए कि व्यक्ति का लिवर ठीक हो। इसमें रिसीपिएंट (जिसमें ट्रांसप्लांट होगा) के साथ डोनर पर विशेष निगरानी रखनी होगी। इसमें मरीज का कोई भी परिजन अपने लिवर का 65 प्रतिशत हिस्सा डोनेट कर सकता है। दूसरी बात इस सर्जरी में मात्र दो लाख रुपये से ज्यादा खर्च नहीं आएगा।
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यह सर्जरी लिवर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए विशेष दक्षता की जरूरत पड़ती है। पीजीआई के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। हाल ही में एक साथ किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट करने के बाद पीजीआई के डाक्टरों का आत्मविश्वास बढ़ा है। यदि पीजीआई इस सर्जरी को भी सफलतापूर्वक कर लेता है तो यह संस्थान देश का पहला सरकारी हास्पिटल होगा। हीप्टोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. डा. आरके धीमान ने दावा किया है कि अगले एक महीने के भीतर इस सर्जरी को पीजीआई के डाक्टर कर देंगे।
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इस तरह से होगा फायदेमंद
अभी लिवर ट्रांसप्लांट करने में दो बड़ी बाधाएं आती हैं। पहला, लिवर का मिलना और दूसरा उसके ट्रांसप्लांट का खर्च। डॉक्टरों के मुताबिक पीजीआई और बाकी संस्थानों में डिजीज (मृतक) डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करते हैं। साल 2011 में इसकी शुरुआत हुई थी। अब तक 40 लिवर ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इस प्रासेस में मरीज को लिवर तभी मिलेगा, जब कोई डोनेट करेगा। डोनेट सिर्फ एक्सीडेंटल केस में ही हो सकता है।
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साफ शब्दों में यदि किसी व्यक्ति का एक्सीडेंट हुआ। एक्सीडेंट में उसके ब्रेन में चोट आई और बाकी अंग खासतौर पर लिवर ठीक है, उस स्थिति में घायल के परिजनों की स्वीकृति मिलने पर ट्रांसप्लांट संभव होता है। ये काफी मुश्किल है क्योंकि लिवर डैमेज होने वालों की काफी लंबी लिस्ट है और डोनेट करने वालों की काफी कम। दूसरा, ट्रांसप्लांट का खर्च। प्राइवेट हास्पिटल में इसका खर्च 10 से 63 लाख रुपये आता है जबकि पीजीआई में पांच से 15 लाख।
अब बात करते हैं लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की। इसमें सेहतमंद व्यक्ति के लिवर का कुछ हिस्सा लेकर दूसरे में ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। यह आसानी से संभव है, सिर्फ शर्त यह होनी चाहिए कि व्यक्ति का लिवर ठीक हो। इसमें रिसीपिएंट (जिसमें ट्रांसप्लांट होगा) के साथ डोनर पर विशेष निगरानी रखनी होगी। इसमें मरीज का कोई भी परिजन अपने लिवर का 65 प्रतिशत हिस्सा डोनेट कर सकता है। दूसरी बात इस सर्जरी में मात्र दो लाख रुपये से ज्यादा खर्च नहीं आएगा।
इसलिए जरूरी है ऐसी सर्जरी
pgi chandigarh
इसलिए जरूरी है ऐसी सर्जरी
पीजीआई की ओर से बताया गया है कि कम से कम 50 ऐसे मरीज हैं, जिनका लिवर आखिरी स्टेज में है। कभी भी उनकी मौत हो सकती है। पीजीआई ने नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिया है क्योंकि पहले से ही मरीजों की संख्या काफी पहुंच चुकी है। जब डिजीज (मृतक) डोनर से लिवर आएगा तभी ट्रांसप्लांट हो सकेगा।
वरना ऐसे मरीजों के पास इंतजार के अलावा कोई और चारा नहीं है। पिछले दो दशकों में लिवर के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। साल 1993 में प्रत्येक क्लीनिक में पांच से दस पेशेंट आते थे। हफ्ते में दो दिन लिवर क्लीनिक होती है। साल 2018 की स्थिति यह है कि 120 नए और 500 पुराने मरीज आते हैं। हर हफ्ते 250 नए केस और एक हजार पुराने मरीजों को देखा जाता है। 100 नए केसों में 20 ऐसे होते हैं, जिन्हें लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
लिवर खराब होने की वजह
ज्यादा शराब पीना
ज्यादा वजन होना
हैपेटाइटिस बी
हैपेटाइटिस सी
डायबिटीज
हाइपरटेंशन
लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारियां पूरी हो चुकी है। एक महीने के भीतर इसे किया जा सकता है। यह सर्जरी लिवर डैमेज होने वाले मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।
-प्रो. आरके धीमान, एचओडी, हीप्टोलॉजी पीजीआई
पीजीआई की ओर से बताया गया है कि कम से कम 50 ऐसे मरीज हैं, जिनका लिवर आखिरी स्टेज में है। कभी भी उनकी मौत हो सकती है। पीजीआई ने नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिया है क्योंकि पहले से ही मरीजों की संख्या काफी पहुंच चुकी है। जब डिजीज (मृतक) डोनर से लिवर आएगा तभी ट्रांसप्लांट हो सकेगा।
वरना ऐसे मरीजों के पास इंतजार के अलावा कोई और चारा नहीं है। पिछले दो दशकों में लिवर के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। साल 1993 में प्रत्येक क्लीनिक में पांच से दस पेशेंट आते थे। हफ्ते में दो दिन लिवर क्लीनिक होती है। साल 2018 की स्थिति यह है कि 120 नए और 500 पुराने मरीज आते हैं। हर हफ्ते 250 नए केस और एक हजार पुराने मरीजों को देखा जाता है। 100 नए केसों में 20 ऐसे होते हैं, जिन्हें लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
लिवर खराब होने की वजह
ज्यादा शराब पीना
ज्यादा वजन होना
हैपेटाइटिस बी
हैपेटाइटिस सी
डायबिटीज
हाइपरटेंशन
लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारियां पूरी हो चुकी है। एक महीने के भीतर इसे किया जा सकता है। यह सर्जरी लिवर डैमेज होने वाले मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।
-प्रो. आरके धीमान, एचओडी, हीप्टोलॉजी पीजीआई