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पहले वाला संभला नहीं, दूसरा खोल दिया जनऔषधि केंद्र
ब्यूरो, अमर उजाला/ चंडीगढ़
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:08 PM IST
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जनऔषधि केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने सोमवार को पीजीआई के न्यू ओपीडी में नए जनऔषधि केंद्र का उद्घाटन किया। यह पीजीआई का दूसरा केंद्र है। पहला औषधि केंद्र पीजीआई के गोल मार्केट में स्थित है, जो करीब आठ से दस साल पहले खुला था, लेकिन इससे मरीज को फायदा नहीं मिला।
स्टोर में जरूरी दवाएं नहीं होती हैं। अब सरकार ने दूसरा केंद्र खोल दिया है तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या दूसरा जनऔषधि केंद्र मरीजों के लिए लाभदायक साबित होगा। मंत्रालय के औषधि निर्माण विभाग के सचिव डा. वीके शुभुराज ने दावा किया कि पहले जो औषधि केंद्र चल रहे थे, वे रेडक्रॉस व अन्य एनजीओ के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत संचालित हो रहे थे, इससे दवाओं की निरंतर सप्लाई नहीं हो पाती थी।
नए केंद्रों की सप्लाई प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इनमें दवाओं की सप्लाई की जिम्मेदारी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग की कंपनियों को हायर किया गया है, जिससे दवाओं की सप्लाई में बाधा नहीं आएगी। पीजीआई में खोले गए स्टोर की जिम्मेदारी बीपीपीआई के पास है, जो पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग कंपनी है। इसके अलावा दवाओं की क्वालिटी पर भी ध्यान दिया गया है। एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी से टेस्टिंग के बाद दवाओं की बिक्री की जा रही है।
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400 से ज्यादा मेडिसिन, 150 से ज्यादा सर्जिकल आइटम का दावा
इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री गंगाराम ने दावा किया कि जनऔषधि केंद्र में 400 से ज्यादा मेडिसिन व 150 से ज्यादा सर्जिकल आइटम मौजूद रहेंगे। इनमें मुख्य रूप से शुगर, ब्लड प्रेशर, गेस्ट्रो, विटामिन्स, एंटीबायोटिक्स सहित कई रूटीन में इस्तेमाल होने वाली दवाएं मौजूद रहेंगी। ये दवाएं ब्रांडेड के मुकाबले 60 प्रतिशत सस्ती होंगी। ऐसा पहले भी दावा किया गया था, जब पहले वाला स्टोर खोला गया था। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य तीन हजार जनऔषधि मेडिकल स्टोर खोलने का है। अब तक 250 से ज्यादा केंद्र खोले जा चुके हैं।
पुराने स्टोर का अधिग्रहण करेगा मंत्रालय
चंडीगढ़ में पहले से तीन जनऔषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। पहला जनऔषधि केंद्र पीजीआई में है, दूसरा जीएमसीएच-32 व तीसरा जीएमएसएच-16 में स्थित है। मंत्रालय के सचिव डा. वीके शुभुराज का कहना है कि जो पुराने स्टोर हैं, उन्हें धीरे-धीरे मंत्रालय अधिग्रहण कर लेगा। उसके बाद उन्हें पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग कंपनी को सौंप दिया जाएगा, जिससे उनकी सप्लाई प्रक्रिया को सुधारा जा सके।
डाक्टर नहीं लिखते जेनरिक दवाएं
पीजीआई व अन्य संस्थानों के डाक्टर मरीजों के लिए जेनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। जब डाक्टर ही नहीं लिखेंगे, तो मरीज कैसे जेनरिक केंद्र से दवाएं ले पाएगा। हालांकि पीजीआई के कार्ड में साफ-साफ मुहर लगी रहती है कि डाक्टर जेनरिक दवाएं प्रीसक्राइब करें, लेकिन ऐसा नहीं होता। पीजीआई की ओर से भी अब तक उन लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई है, जो जेनरिक की बजाय ब्रांडेड दवाएं प्रीसक्राइब करते हैं। जेनरिक दवाओं की बिक्री में यह सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि केंद्रीय राज्य मंत्री ने डाक्टरों से अपील की है कि वह जेनरिक दवाएं लिखें।
कोट
मेरी डॉक्टरों से अपील है कि वे औषधि केंद्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं को सफल बनाने के लिए मरीजों को जेनरिक दवाएं प्रीस्क्राइब करें, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को लाभ पहुंच सके।
हंसराज गंगाराम अहीर, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री।
कोट
पीजीआई में बनने वाले कार्ड में सिर्फ नाम की मुहर लगती है। डाक्टर कभी भी दवाएं प्रीस्क्राइब नहीं करते। पीजीआई को उन डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जो जेनरिक दवाएं नहीं लिखते।
अश्विनी मुंजाल, जनरल सेक्रेटरी एमटीए पीजीआई।
कोट
हम लोग फार्मास्यूटिकल कंपनियों को सर्कुलर जारी कर रहे हैं कि वे डाक्टर को महंगे गिफ्ट न दें। इसके अलावा हम डाक्टरों से अपील भी कर रहे हैं कि वे जेनरिक दवाएं लिखें।
-डा. वीके शुभुराज, सचिव रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय।
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स्टोर में जरूरी दवाएं नहीं होती हैं। अब सरकार ने दूसरा केंद्र खोल दिया है तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या दूसरा जनऔषधि केंद्र मरीजों के लिए लाभदायक साबित होगा। मंत्रालय के औषधि निर्माण विभाग के सचिव डा. वीके शुभुराज ने दावा किया कि पहले जो औषधि केंद्र चल रहे थे, वे रेडक्रॉस व अन्य एनजीओ के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत संचालित हो रहे थे, इससे दवाओं की निरंतर सप्लाई नहीं हो पाती थी।
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नए केंद्रों की सप्लाई प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इनमें दवाओं की सप्लाई की जिम्मेदारी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग की कंपनियों को हायर किया गया है, जिससे दवाओं की सप्लाई में बाधा नहीं आएगी। पीजीआई में खोले गए स्टोर की जिम्मेदारी बीपीपीआई के पास है, जो पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग कंपनी है। इसके अलावा दवाओं की क्वालिटी पर भी ध्यान दिया गया है। एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी से टेस्टिंग के बाद दवाओं की बिक्री की जा रही है।
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400 से ज्यादा मेडिसिन, 150 से ज्यादा सर्जिकल आइटम का दावा
इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री गंगाराम ने दावा किया कि जनऔषधि केंद्र में 400 से ज्यादा मेडिसिन व 150 से ज्यादा सर्जिकल आइटम मौजूद रहेंगे। इनमें मुख्य रूप से शुगर, ब्लड प्रेशर, गेस्ट्रो, विटामिन्स, एंटीबायोटिक्स सहित कई रूटीन में इस्तेमाल होने वाली दवाएं मौजूद रहेंगी। ये दवाएं ब्रांडेड के मुकाबले 60 प्रतिशत सस्ती होंगी। ऐसा पहले भी दावा किया गया था, जब पहले वाला स्टोर खोला गया था। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य तीन हजार जनऔषधि मेडिकल स्टोर खोलने का है। अब तक 250 से ज्यादा केंद्र खोले जा चुके हैं।
पुराने स्टोर का अधिग्रहण करेगा मंत्रालय
चंडीगढ़ में पहले से तीन जनऔषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। पहला जनऔषधि केंद्र पीजीआई में है, दूसरा जीएमसीएच-32 व तीसरा जीएमएसएच-16 में स्थित है। मंत्रालय के सचिव डा. वीके शुभुराज का कहना है कि जो पुराने स्टोर हैं, उन्हें धीरे-धीरे मंत्रालय अधिग्रहण कर लेगा। उसके बाद उन्हें पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग कंपनी को सौंप दिया जाएगा, जिससे उनकी सप्लाई प्रक्रिया को सुधारा जा सके।
डाक्टर नहीं लिखते जेनरिक दवाएं
पीजीआई व अन्य संस्थानों के डाक्टर मरीजों के लिए जेनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं। जब डाक्टर ही नहीं लिखेंगे, तो मरीज कैसे जेनरिक केंद्र से दवाएं ले पाएगा। हालांकि पीजीआई के कार्ड में साफ-साफ मुहर लगी रहती है कि डाक्टर जेनरिक दवाएं प्रीसक्राइब करें, लेकिन ऐसा नहीं होता। पीजीआई की ओर से भी अब तक उन लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई है, जो जेनरिक की बजाय ब्रांडेड दवाएं प्रीसक्राइब करते हैं। जेनरिक दवाओं की बिक्री में यह सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि केंद्रीय राज्य मंत्री ने डाक्टरों से अपील की है कि वह जेनरिक दवाएं लिखें।
कोट
मेरी डॉक्टरों से अपील है कि वे औषधि केंद्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं को सफल बनाने के लिए मरीजों को जेनरिक दवाएं प्रीस्क्राइब करें, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को लाभ पहुंच सके।
हंसराज गंगाराम अहीर, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री।
कोट
पीजीआई में बनने वाले कार्ड में सिर्फ नाम की मुहर लगती है। डाक्टर कभी भी दवाएं प्रीस्क्राइब नहीं करते। पीजीआई को उन डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जो जेनरिक दवाएं नहीं लिखते।
अश्विनी मुंजाल, जनरल सेक्रेटरी एमटीए पीजीआई।
कोट
हम लोग फार्मास्यूटिकल कंपनियों को सर्कुलर जारी कर रहे हैं कि वे डाक्टर को महंगे गिफ्ट न दें। इसके अलावा हम डाक्टरों से अपील भी कर रहे हैं कि वे जेनरिक दवाएं लिखें।
-डा. वीके शुभुराज, सचिव रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय।