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हरियाणा सरकार के फैसले को चुनौती : निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों को 75 फीसदी आरक्षण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
Fri, 12 Mar 2021 12:28 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 12 Mar 2021 12:28 AM IST
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : amar ujala
प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण देने के हरियाणा सरकार के फैसले को एके इंडस्ट्रीज ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि सरकार का यह फैसला योग्यता से अन्याय है। निजी नियोक्ताओं को इस प्रकार सीमित क्षेत्र से नियुक्ति के लिए बाध्य करना उनके कार्य की गुणवत्ता पर बुरा असर डालेगा। ऐसे में इस प्रावधान पर रोक लगाई जानी चाहिए जिससे नियोक्ता अपने अनुकूल कार्य करने वाले कर्मचारी चुनने को स्वतंत्र रहे।
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याची ने कहा कि सरकार द्वारा बनाई गई यह नीति उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। नियोक्ता को यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी जरूरत के अनुरूप कुशल व्यक्ति को नौकरी पर रख सके। इस प्रकार लाई गई यह नीति नियोक्ता की स्वतंत्रता का हनन है।
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इससे पहले भी इस नीति को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। उस समय हरियाणा सरकार ने यह कहा था कि अभी तक इसकी नोटिफिकेशन जारी नहीं की गई है और न ही राज्यपाल से मंजूरी ली गई है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। अब नोटिफिकेशन और मंजूरी होने के बाद दोबारा याचिका दाखिल करते हुए इस नीति को खारिज करने की मांग की गई है।
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यह है नीति
हरियाणा सरकार ने राज्य में निजी क्षेत्र की नौकरियों में हरियाणा के रहने वाले लोगों के लिए आरक्षाण 75 प्रतिशत अनिवार्य कर दिया। 50 हजार रुपये तक मासिक वेतन की नौकरियों पर यह नियम लागू किया गया है। निजी क्षेत्र की 10 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों, सोसायटी, ट्रस्ट आदि पर यह लागू होगा। एसडीएम या उच्च अधिकारियों को इसे लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। यह अधिकारी संस्थानों का निरीक्षण कर सकेंगे और उल्लंघन की स्थिति में इन्हें नियोक्ता पर 25 हजार रुपये से पांच लाख तक का जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है।