चंडीगढ़ मेयर चुनाव को चुनौती: हाईकोर्ट ने याचिका में तकनीकी खामियों को सुधारने का दिया समय, अब चार फरवरी को होगी सुनवाई
चंडीगढ़ के मेयर चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इसके बाद याची पक्ष ने हाईकोर्ट से संशोधन की मांग की। जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया। अब मामले की अगली सुनवाई चार फरवरी को होगी।
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चंडीगढ़ के मेयर चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका में गुरुवार को यूटी प्रशासन ने तकनीकी खामियां बताईं। इसके बाद याचिका में संशोधन के लिए समय देने की याची पक्ष ने मांग की। संशोधन की अनुमति देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब याचिका पर चार फरवरी को सुनवाई तय की है। आम आदमी पार्टी की अंजू कत्याल, प्रेम लता व राम चंद्र यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को चुनौती दी है।
याचिका में बताया गया कि चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्ड के लिए 24 दिसंबर को चुनाव हुआ था। 27 दिसंबर को जारी नतीजे के अनुसार आप को 14, भाजपा को 12 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थीं। कांग्रेस की एक पार्षद बाद में भाजपा में शामिल हो गईं। आठ जनवरी को मेयर पद का चुनाव करवाया गया तो चंडीगढ़ के सांसद का वोट भी भाजपा के पक्ष में पड़ा। इस तरह आप और भाजपा दोनों के उम्मीदवारों को 14-14 वोट मिले।
मतदान प्रक्रिया के बाद चुनाव अधिकारी ने आप के एक वोट को अवैध करार देकर रद्द कर दिया। इसके बाद भाजपा की उम्मीदवार सरबजीत कौर को मेयर घोषित कर दिया गया। आप ने इस पर उस समय भी आपत्ति दर्ज की थी लेकिन इसका लाभ नहीं हुआ। अब याचिका दाखिल कर आप के उम्मीदवारों ने चुनाव रद्द कर नए सिरे से मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए दोबारा चुनाव करवाने की हाईकोर्ट से मांग की है।
नतीजों को चुनौती नहीं दी
गुरुवार को याचिका पर सुनवाई आरंभ होते ही चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ने इस याचिका पर कई सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि मेयर चुनाव को चुनौती दी गई है, जबकि इसके नतीजों को चुनौती दी ही नहीं गई। समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के आधार पर यह याचिका दायर की गई है।
दूसरी तकनीकी आपत्ति यह बताई कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को चुनौती दी गई है लेकिन याचिका में चयनित लोगों को पक्ष ही नहीं बनाया गया है। इस तरह इस याचिका में कई तकनीकी खामियां है। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि याची इस याचिका को वापस लेकर नए सिरे से दाखिल करें। इस पर याची ने कहा कि उसे याचिका में संशोधन के लिए कुछ समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई चार फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी।