Chandigarh: हजारों लोगों ने अदा की ईद-उल-अजहा की नमाज, बारिश भी भी कम नहीं हुआ उत्साह
मनीमाजरा मदरसा के मौलाना शकील कासमी ने कहा कि हम सब मिलकर साझा तौर पर मानवता की सेवा के लिए अपने आप को समर्पित कर दें।
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चंडीगढ़ में हजारों लोगों ने रविवार को मस्जिदों में ईद उल अजहा की नमाज अदा की। नमाज के बाद मस्जिदों में देश की खुशहाली, अमन और भाईचारे की सलामती के लिए दुआएं की गई। सभी लोगों ने उत्साह के साथ नमाज के बाद एक दूसरे को मुबारक कहा। गले भी मिले। नमाज से पहले मस्जिदों में ईद उल अजहा के महत्व को बताया गया। बारिश में भी नमाजियों का उत्साह में कमी नहीं आई। लोग छाता लेकर मस्जिदों में नमाज के लिए पहुंचे। सेक्टर 20 के जामा मस्जिद के बाहर बड़े ग्राउंड में नमाज अदा की जाती थी। लेकिन इस बार बारिश के कारण खुले मैदान में नमाज नहीं अदा की गई। मस्जिद के अंदर ही नमाज अदा हुई।
दो साल की कोविड पाबंदी के बाद चंडीगढ़ की मस्जिदों में रविवार को ईद उल अजहा की नमाज के लिए बड़े रौनक रही। हर एक नमाजी के चेहरे पर खुशी नजर आई। सेक्टर 20 के जामा मस्जिद, सेक्टर 26 के नूरानी मस्जिद, मनीमाजरा, सेक्टर 31, 45, 29 सहित अन्य जगह की सभी मस्जिदों में ईद उज अजहा की नमाज अदा की गई।
सेक्टर 26 स्थित नूरानी मस्जिद के इमाम वह खतीब मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया । उन्होंने कहा कि इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार ईद-उल-अजहा को बेहद पावन पर्व माना जाता है। सभी मुसलमान इस त्योहार का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि बकरीद पर्व की नींव कुर्बानी शब्द पर रखी गई है। उन्होंने इस पर्व के बारे में कहा कि कुर्बानी का अर्थ इस संदर्भ में है कि इंसान अपने अंदर की पशु वृत्ति यानी अपने अंदर की बुराइयों की कुर्बानी दे।
सेक्टर 20 के जामा मस्जिद के इमाम व खतीब मौलाना मोहम्मद अजमल खान ने इस मौके पर अहल ए वतन को ईद उल अजहा की मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि यह पर्व कुर्बानी और इंसानियत की खिदमत का प्रतीक है। यह त्योहार हमें हजरत इब्राहीम और हजरत इस्माइल की तरफ से दिखाए गए त्याग के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।