{"_id":"5bd0383cbdec226992758771","slug":"para-badminton-player-sanjeev-suffering-from-financial-crisis","type":"story","status":"publish","title_hn":"पैरा खिलाड़ी ने बयां किया दर्द, बोले- 4 गोल्ड, 10 अंतरराष्ट्रीय पदक, फिर भी हैं खाने के लाले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पैरा खिलाड़ी ने बयां किया दर्द, बोले- 4 गोल्ड, 10 अंतरराष्ट्रीय पदक, फिर भी हैं खाने के लाले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 24 Oct 2018 02:45 PM IST
विज्ञापन
पैरा बैडमिंटन प्लेयर संजीव कुमार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार गोल्ड मेडल सहित 10 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके पैरा बैडमिंटन प्लेयर संजीव कुमार आज दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हो गए हैं। तंगहाली से जूझ रहे संजीव कुमार ने सरकार से नौकरी देने की मांग की है, ताकि वह अपने परिवार का सहारा बन सकें। गौर रहे कि देश के नंबर वन पैरा बैडमिंटन प्लेयर और दुनिया के 21वें रैंक के खिलाड़ी संजीव कुमार की हालात काफी खराब है। नौकरी न होने पर उनके सामने परिवार के लालन पालन की समस्या खड़ी हो गई है।
जीव कुमार ने हाल ही डेनमार्क में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण सहित कांस्य पदक जीता है। प्रतियोगिता में उन्होंने विश्व के पांचवें नंबर के खिलाड़ी को हराया। संजीव कुमार अब तक 4 स्वर्ण पदक समेत 10 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर 27 मेडल अपने नाम कर चुके हैं। बावजूद इसके वह अपने परिवार और अपनी रोजी रोटी के लिए चिंतित हैं। कारण यह है कि उनके पास नौकरी नहीं है।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब पहुंचे संजीव कुमार ने कहा कि उन्होंने देश के लिए 10 साल लगातार मेहनत की है। अब तक वह कुल 37 पदक जीते। कई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक देश की झोली में डाले। कर्ज लेकर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। फिर भी सरकार ने उनकी कोई सहायता नहीं की। उन्होंने कहा कि अब उनको परिवार की चिंता सता रही है। उन्होंने बताया कि उनकी दो साल की बेटी है और उनके पास उसकी पढ़ाई के भी पैसे नहीं है।
विज्ञापन
सरकार ने उन्हें पूरी तरह से अनदेखा कर दिया। एक तरफ सरकार दूसरे खिलाड़ियों को एक अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने पर डीएसपी जैसा बड़ा पद दे देती है, वहीं उन्होंने देश को 10 पदक जीत कर दिए हैं। सरकार ने उनकी किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए मदद नहीं की। संजीव ने कहा कि अगर सरकार ने मुझे नौकरी नहीं दी तो मैं अपने परिवार के साथ आमरण अनशन पर बैठने के लिए मजबूर हो जाऊंगा। उन्होंने पंजाब और केंद्र सरकार ने उनकी सहायता करने की अपील की है।
विज्ञापन
जीव कुमार ने हाल ही डेनमार्क में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण सहित कांस्य पदक जीता है। प्रतियोगिता में उन्होंने विश्व के पांचवें नंबर के खिलाड़ी को हराया। संजीव कुमार अब तक 4 स्वर्ण पदक समेत 10 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर 27 मेडल अपने नाम कर चुके हैं। बावजूद इसके वह अपने परिवार और अपनी रोजी रोटी के लिए चिंतित हैं। कारण यह है कि उनके पास नौकरी नहीं है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ प्रेस क्लब पहुंचे संजीव कुमार ने कहा कि उन्होंने देश के लिए 10 साल लगातार मेहनत की है। अब तक वह कुल 37 पदक जीते। कई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक देश की झोली में डाले। कर्ज लेकर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। फिर भी सरकार ने उनकी कोई सहायता नहीं की। उन्होंने कहा कि अब उनको परिवार की चिंता सता रही है। उन्होंने बताया कि उनकी दो साल की बेटी है और उनके पास उसकी पढ़ाई के भी पैसे नहीं है।
विज्ञापन
सरकार ने उन्हें पूरी तरह से अनदेखा कर दिया। एक तरफ सरकार दूसरे खिलाड़ियों को एक अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने पर डीएसपी जैसा बड़ा पद दे देती है, वहीं उन्होंने देश को 10 पदक जीत कर दिए हैं। सरकार ने उनकी किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए मदद नहीं की। संजीव ने कहा कि अगर सरकार ने मुझे नौकरी नहीं दी तो मैं अपने परिवार के साथ आमरण अनशन पर बैठने के लिए मजबूर हो जाऊंगा। उन्होंने पंजाब और केंद्र सरकार ने उनकी सहायता करने की अपील की है।