चंडीगढ़: नैक टीम के शिक्षक भर्ती सुझाव पर पंजाब यूनिवर्सिटी ने नहीं किया काम, अब जुलाई में देना होगा जवाब
नैक की टीम ने वर्ष 2015 में पीयू को बताया था कि हर विभाग में छह शिक्षक होने चाहिए लेकिन यूनिवर्सिटी के 30 से अधिक विभागों के पास एक से तीन ही शिक्षक हैं।
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पंजाब विश्वविद्यालय को छह साल पहले नैक की टीम ने सुझाव दिया था कि हर विभाग में कम से कम छह शिक्षक होने चाहिए, लेकिन पीयू ने इस पर काम नहीं किया। इन विभागों के हालात पहले जैसे ही हैं। 30 से अधिक विभाग ऐसे हैं, जिनमें एक से लेकर चार शिक्षक ही तैनात हैं। इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। पीयू ने आखिर इन छह साल में क्या किया। हालांकि प्रस्ताव शिक्षकों की तैनाती के लिए लाया गया था, लेकिन उसे आज तक सफलता नहीं मिल सकी। अब नैक का दौरा जुलाई में है। पीयू के सामने फिर से वही बड़ा मानक रोड़ा बनकर खड़ा है। इससे पीयू की रैकिंग पर भी असर पड़ सकता है।
इन विभागों में शिक्षकों की भारी कमी
पीयू के गुरुनानक देव सिख स्टडी, म्यूजिक, रशियन, संस्कृत, जर्मन, उर्दू, मेडिकल फिजिक्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, स्टेम सेल आदि विभागों का संचालन एक ही स्थायी शिक्षक के जरिए हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक ह्यूमन राइट, पुलिस प्रशासन, सोशल वर्क, एनिसिएंट इंडियन हिस्ट्री, चाइनीज एंड तिब्बतीयन, गांधीयन एंड पीस स्टडीज, इंडियन थिएटर, पंजाबी आदि विभाग दो शिक्षकों के हवाले हैं। इसी तरह फ्रेंच, लाइन लांग लर्निंग, माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी, फिजिकल एजुकेशन, मनोविज्ञान, फॉरेंसिक साइंस, सिस्टम बायोलॉजी, वुमन स्टडीज, ह्यूमन जिनोम, एनवायरमेंट स्टडीज, लाइब्रेरी इनफोर्मेशन साइंस, फिलॉस्फी, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, नैनो साइंस आदि विभागों में महज तीन से चार शिक्षक हैं। इनके अलावा कई विभाग और हैं, जिनमें मानक के मुताबिक शिक्षक नहीं हैं जबकि छात्रों की संख्या वहां अधिक है। नैक की टीम ने यही कहा था कि छात्रों की संख्या के मुताबिक शिक्षक यहां नहीं हैं।
पीयू ने उठाया था यह कदम
पीयू ने दो साल पहले 26 असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए रिक्तियां निकाली थीं और आवेदन मांगे गए थे, लेकिन सिंडिकेट ने अड़ंगा लगा दिया था। कहा था कि जिन विभागों में रिक्तियां निकाली गई थीं उनमें जरूरत कम है जबकि दूसरे विभागों में शिक्षकों की आवश्यकता है। इस पर सिंडिकेट के सदस्यों की कमेटी बनी और यह प्रस्ताव अटक गया। आज तक यह पास नहीं हो पाया। पीयू के वरिष्ठ शिक्षक कहते हैं कि तमाम प्रस्ताव बिना सिंडिकेट व सीनेट के पास हुए तो शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रस्ताव फिर से क्यों नहीं लाया गया। अब सीनेट पीयू के पास है। ऐसे में देरी किस बात की हो रही है। इस पर क्यों नहीं ध्यान दिया जा रहा।
नैक की टीम ने यह सुझाव दिया था
नैक की टीम का सुझाव था कि छोटे विभागों का विलय बड़े विभागों में कर दिया। उनमें वह सेंटर भी शामिल हैं, जिनमें एक से दो शिक्षक या तीन शिक्षक शामिल हैं। पीयू ने विभागों के विलय पर भी कमेटी तो बनाई, लेकिन पूरे प्रस्ताव को अमलीजामा नहीं पहनाया गया। प्रस्ताव अटका हुआ है। लगातार इसमें देरी हो रही है। वरिष्ठ शिक्षकों ने इस देरी पर चिंता जाहिर की है। वहीं पीयू प्रशासन का कहना है कि प्रस्ताव पाइप लाइन में हैं। जल्द ही शिक्षक तैनाती से लेकर विभागों के विलय पर काम होगा।