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पंचकूला हिंसाः आगजनी के दो साल हुए पूरे, न सभी मुजरिम पकड़े गए और न किसी को मिला मुआवजा

Sun, 25 Aug 2019 01:26 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 25 Aug 2019 01:26 PM IST
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Panchkula Violence Case Completed Two Years
पंचकूला हिंसा - फोटो : फाइल फोटो

पंचकूला स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा के दो साल पूरे हो गए, लेकिन अभी भी आगजनी करवाने वाले कई आरोपी फरार हैं।

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इसके अलावा उन हजारों लोगों के जख्म भी नहीं भरे हैं, जिन्होंने आगजनी में अपनी करोड़ों की संपत्ति को अपनी आंखों के सामने जलते देखा। इस मोर्चे पर हरियाणा सरकार भी पीड़ितों को मुआवजा देने में पीछे रही है। नतीजतन अधिकांश केस अभी भी अदालत में विचाराधीन हैं। 
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करोड़ों के नुकसान की नहीं हुई भरपाई
गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में की गई हिंसा में लोगों को उनके करोड़ों के नुकसान का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। लोगों के जले वाहन आज भी थाना चंडीमंदिर में खुले पड़े हैं, लेकिन पीड़ितों को न तो मुआवजा मिला और न ही कोई सरकारी मदद।
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हिंसा मामले में पुलिस ने कुल 177 एफआईआर दर्ज की थी, इनमें 1137 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। पुलिस को जांच में पुख्ता सबूत नहीं मिलने पर 10 मामलों में दर्ज एफआईआर में नामजद करीब 100 आरोपियों से देशद्रोह की धारा हटानी पड़ी। सबूतों के अभाव में दो मामलों में आरोपियों को बरी किया गया।

आदित्य इंसां की तलाश, विपासना को किया जा सकता है अरेस्ट

Panchkula Violence Case Completed Two Years
पंचकूला हिंसा के दौरान की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

हिंसा के मुख्य आरोपियों में से राम रहीम के राजदार एवं पांच लाख रुपये का इनामी आदित्य इंसां दो साल बीतने के बाद भी फरार है। पुलिस के हाथ ऐसी कोई लीड नहीं लगी है, जिसकी मदद से उस तक पहुंचा जा सके। इसके अलावा राम रहीम के डेरे में उसकी एक अन्य राजदार विपासना को भी पुलिस ने फिलहाल अरेस्ट नहीं किया है। 

आरोपी विपासना ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट पंचकूला में साल की शुरुआत में एक अर्जी दायर कर सदैव पुलिस जांच में सहयोग की बात कही थी। पुलिस उससे एक बार पूछताछ भी कर चुकी थी। इस कारण पुलिस ने फरवरी महीने में विपासना को भगौड़ा डिक्लेयर करने के प्रोसेस को रोक दिया था। लेकिन पुलिस ने विपासना को क्लीन चिट नहीं दी है और उसे कभी भी अरेस्ट भी किया जा सकता है। पंचकूला पुलिस आरोपी विपासना से कभी भी पूछताछ कर सकती है। 

धारा 144 के उल्लंघन के बाद हिंसा पर उतारू हुए दंगाई 
25 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई अदालत की ओर से साध्वी यौन शोषण मामले में फैसला सुनाने के बाद हिंसा की आशंका बनी थी। पुलिस-प्रशासन ने एहतियातन धारा-144 लगाई थी। बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन ने इकट्ठा होती भीड़ को समय रहते न खदेड़ने की भारी लापरवाही की थी।

नतीजतन फैसला आने से पूर्व शहर में राम रहीम के हजारों समर्थकों आ पहुंचे थे और फैसले के बाद हालात ऐसे बिगड़े की आगजनी और हिंसा को अंजाम दे दिया गया। उपद्रवियों ने ओवी वैन, फायर ब्रिगेड, मीडिया कर्मियों की कारें और दर्जनों टू-व्हीलर हिंसा की आग में झोंक डाले थे। 

सैकड़ों लोगों को है मुआवजे का इंतजार है

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हिंसा में जले वाहन - फोटो : अमर उजाला

दंगाइयों ने दर्जनों वाहन जला दिए। इनमें अधिकांश वाहन मीडिया कर्मियों के थे। हिंसा के तत्काल बाद सरकार ने जल्द मुआवजे का भरोसा तो दिया, लेकिन आज तक किसी को मुआवजा राशि नहीं मिल सकी। दंगाइयों ने हिंसा के दौरान सेक्टर-16, एचडीएफसी बैंक को आग के हवाले किया और अग्रवाल भवन में तोड़फोड़ के बाद एंबुलेंस समेत अन्य गाड़ियों को जलाया। 

ये हैं हिंसा व अन्य धाराओं के तहत आरोपी 
पांच लाख का इनामी आदित्य इंसा, पचास हजार का इनामी रहा अमरीक, पचास हजार का इनामी रहा नवदीप कुमार, इकबाल, जसबीर सिंह, अभिजीत शंकर, ओमपाल शर्मा, परामूत, अर्ष अरोड़ा, विजय कुमार, हरदम, पीआर जैन, परगट सिंह, किरपाल मेहता, चरण सिंह, सतीश मेहता, सेवा सिंह, अरविंद, अमरीक, संजीव, सिंगला, जसवंत, अनिल, रंजन व कमल।

हनीप्रीत को किया गया था अरेस्ट 
राम रहीम की सबसे करीबी हनीप्रीत को पंचकूला पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था, जो फिलहाल जेल में है। हिंसा मामले की साजिश और देशद्रोह मामले में हनीप्रीत सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके करीब चार अन्य एफआईआर में 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ पुलिस जांच में पुख्ता सबूत नहीं होने पर उन पर लगी देशद्रोह की धारा को हटाया गया था। 

करीब 35 लोगों की हुई थी मौत 
पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत से डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद भड़की हिंसा में करीब 35 लोगों की मौत हुई थी। लेकिन 17 अगस्त, 2017 को सिरसा स्थित डेरे में हुई बैठक में मौजूद हनीप्रीत समेत आदित्य इंसा सहित दर्जनों ऐसे डेरा करीबी थे, जिन्होंने एक साथ साजिश रचकर वारदात को अंजाम दिया था। 

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समर्थकों को भड़काने समेत हिंसा और आगजनी के लिए उन्हें लाखों की रकम भी बांटी जाने के अरोप हैं। सीबीआई की विशेष अदालत से बीस साल की सजा मिलने के बाद राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। सीबीआई की विशेष कोर्ट ने राम रहीम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या मामले में भी सजा सुना चुकी है।

पुलिस को करनी पड़ी थी फायरिंग, छोड़े थे आंसू गैस के गोले 
डेरा प्रेमियों ने मीडियाकर्मियों पर हमला बोलने समेत चैनल की ओबी वैन व अन्य वाहनों में तोड़ फोड़ की थी। बिगड़े हालात को काबू करने के लिए अर्ध सैनिक बल और पंचकूला पुलिस को फायरिंग करने समेत आंसू गैस के गोले छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था। वे हाथों में हथियार व पेट्रोल बम लेकर बेगू रोड स्थित मिल्क प्लॉट में घुस गए और आग लगा दी थी। 

नतीजतन पुलिस की फायरिंग में करीब 35 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, राम रहीम के समर्थकों ने डेरा से सटे गांव बेगू में बिजली घर को आग लगा दी थी। पुलिस के फायरिंग की कार्रवाई करने पर भी हजारों डेरा प्रेमी बेअसर दिखे थे। पूरे घटनाक्रम से लेकर 19 दिनों तक सिरसा में भी कर्फ्यू लगा रहा। फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए गठित एसआईटी दो साल बाद भी सभी आरोपियों को अरेस्ट नहीं कर सकी है। 

इन आरोप में दर्ज की गई एफआईआर 

सिरसा पुलिस ने हिंसा मामले में उपद्रवियों के खिलाफ देशद्रोह, पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला, सरकारी संपत्ति को नष्ट करना, सरकारी कार्य में बाधा डालने, धारा 144 की अवहेलना, साजिश रचने सहित अन्य कई आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।

हिंसा मामले में सिरसा पुलिस की ओर से अदालत में 900 पेजों का चालान पेश किया गया था। पूरे प्रकरण में 69 लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया था। इसमें पुलिस के ऑफिसर, कर्मचारी व अन्य लोग शामिल हैं। पंचकूला में भी उक्त आरोपों के तहत ही एफआईआर दर्ज की गई। 

मारे गए उपद्रवियों के खिलाफ भी केस दर्ज 
हिंसा के अगले दिन 26 अगस्त को कीर्तिनगर चौकी प्रभारी एएसआई शैलेंद्र कुमार जांच करने के लिए घटना स्थल पर गए तो मौके से पेट्रोल बम की बोतलें बरामद की गई। इसके बाद एसआई वजीर सिंह सिविल अस्पताल पहुंचे और शवगृह में रखी गई मृतक वजीर चंद निवासी पीर कॉलोनी सिरसा, काला सिंह निवासी प्रीत नगर सिरसा, विनोद कुमार निवासी रेगर बस्ती, रोबिन निवासी बहबलपुर जींद के शव को अपने कब्जे में लिए।

इसके बाद शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया था। एसआई गोपाल राम ने फतेहाबाद पहुंचकर मृतक साहिल निवासी रतिया और मीना रानी निवासी फतेहाबाद का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की। मृतकों के खिलाफ पुलिस पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डलाने का केस दर्ज किया गया था।

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