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हरियाणा में पंचकूला और अंबाला नगर निगम भंग, ये रहे प्रमुख कारण
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 29 Dec 2017 09:40 AM IST
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Panchkula municipal corporation
- फोटो : File Photo
हरियाणा की पूर्व हुड्डा सरकार के समय गठित अंबाला और पंचकूला नगर निगम को भंग करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही पूर्व सरकार में बने पांच अन्य व भाजपा सरकार में बने एक नगर निगम के दायरे में शामिल गांव भी बाहर किए जाएंगे।
सीएम मनोहर लाल के हिमाचल प्रदेश से लौटने के बाद बुधवार देर रात हुई कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, बैठक में खेल मंत्री अनिल विज शामिल नहीं थे, लेकिन वह पहले से ही इसके पक्ष में हैं। कैबिनेट की सहमति के बाद अब अगली मंत्रिमंडल बैठक में इसे बतौर एजेंडा लाकर पारित कर दिया जाएगा। अंबाला व पंचकूला नगर निगमों को भंग कर दिया जाएगा। इसके बाद अंबाला छावनी व अंबाला शहर नगर परिषदें बनाई जाएंगी।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज काफी समय से इसकी मांग करते आ रहे हैं। पंचकूला नगर निगम को भंग कर कालका व पिंजौर नगर परिषद बनेंगी, जबकि इसमें शामिल गांव पंचायतों में फिर से समायोजित किए जाएंगे। पंचकूला के शहरी क्षेत्र को ही नगर निगम बनाने की अधिसूचना दोबारा शामिल होगी। इसकी मांग कालका की भाजपा विधायक लतिका शर्मा लगातार कर रही थीं।
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पंचकूला के भाजपा ज्ञानचंद गुप्ता भी नगर निगम में शहरी क्षेत्र को ही शामिल करने के हक में हैं। विज ने अंबाला के गांवों का विकास न होने व लतिका ने कालका व पिंजौर को नगर निगम के बजट का लाभ न मिलने पर इसे भंग करने की मुहिम शुरू की थी। पूर्व हुड्डा सरकार ने पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक व हिसार नगर निगम बनाए थे, जबकि भाजपा सरकार ने सोनीपत को नगर निगम बनाया है। इन निगमों की परिधि में शामिल ढाई सौ से अधिक गांवों को बाहर किया जाएगा। ये गांव दोबारा से पंचायतों में जाएंगे। इसके पीछे बड़ा कारण गांवों के विकास पर नगर निगमों का ध्यान न देना है।
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सीएम मनोहर लाल के हिमाचल प्रदेश से लौटने के बाद बुधवार देर रात हुई कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, बैठक में खेल मंत्री अनिल विज शामिल नहीं थे, लेकिन वह पहले से ही इसके पक्ष में हैं। कैबिनेट की सहमति के बाद अब अगली मंत्रिमंडल बैठक में इसे बतौर एजेंडा लाकर पारित कर दिया जाएगा। अंबाला व पंचकूला नगर निगमों को भंग कर दिया जाएगा। इसके बाद अंबाला छावनी व अंबाला शहर नगर परिषदें बनाई जाएंगी।
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स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज काफी समय से इसकी मांग करते आ रहे हैं। पंचकूला नगर निगम को भंग कर कालका व पिंजौर नगर परिषद बनेंगी, जबकि इसमें शामिल गांव पंचायतों में फिर से समायोजित किए जाएंगे। पंचकूला के शहरी क्षेत्र को ही नगर निगम बनाने की अधिसूचना दोबारा शामिल होगी। इसकी मांग कालका की भाजपा विधायक लतिका शर्मा लगातार कर रही थीं।
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पंचकूला के भाजपा ज्ञानचंद गुप्ता भी नगर निगम में शहरी क्षेत्र को ही शामिल करने के हक में हैं। विज ने अंबाला के गांवों का विकास न होने व लतिका ने कालका व पिंजौर को नगर निगम के बजट का लाभ न मिलने पर इसे भंग करने की मुहिम शुरू की थी। पूर्व हुड्डा सरकार ने पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक व हिसार नगर निगम बनाए थे, जबकि भाजपा सरकार ने सोनीपत को नगर निगम बनाया है। इन निगमों की परिधि में शामिल ढाई सौ से अधिक गांवों को बाहर किया जाएगा। ये गांव दोबारा से पंचायतों में जाएंगे। इसके पीछे बड़ा कारण गांवों के विकास पर नगर निगमों का ध्यान न देना है।
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नगर निगम भंग करने के प्रमुख कारण
Panchkula MC
- फोटो : File Photo
पहले मांगी रिपोर्ट, फिर दिए थे सीएम ने संकेत
अंबाला-पंचकूला नगर निगम को भंग करने के लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने अंबाला मंडलायुक्त को पहली दिसंबर को पत्र लिखकर 15 दिसंबर तक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। आयुक्त इस संबंध में अपनी रिपोर्ट भेज चुके हैं। 2018 में सरकार सारी औपचारिकताएं पूरी कर नगर निगमों को किसी भी समय भंग कर सकती है। बीते नवंबर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंबाला में दोनों नगर निगमों को भंग करने के संकेत दिए थे।
नगर निगम भंग करने के प्रमुख कारण
. राजनीतिक हितों का टकराव। बीजेपी विधायकों में ही नहीं बैठ रही था तालमेल
. गांव शामिल होने से नगर निगम का दायरा काफी बढ़ा। विकास में गांवों की पूरी तरह अनदेखी
. असंतुलित विकास के कारण बीजेपी विधायक खुश नहीं।
.पूर्व हुड्डा सरकार में गठन के चलते राजनीतिक दुर्भावना भी।
. दो-दो विधानसभा क्षेत्र शामिल होने से काम कराने में भी लोगों को दिक्कत
. मेयर-डिप्टी मेयर से भी टकराव। वोट बैंक की राजनीति प्रभावित। स्थानीय लोगों की नेताओं के पास हाजिरी कम।
अंबाला-पंचकूला नगर निगम को भंग करने के लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने अंबाला मंडलायुक्त को पहली दिसंबर को पत्र लिखकर 15 दिसंबर तक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। आयुक्त इस संबंध में अपनी रिपोर्ट भेज चुके हैं। 2018 में सरकार सारी औपचारिकताएं पूरी कर नगर निगमों को किसी भी समय भंग कर सकती है। बीते नवंबर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंबाला में दोनों नगर निगमों को भंग करने के संकेत दिए थे।
नगर निगम भंग करने के प्रमुख कारण
. राजनीतिक हितों का टकराव। बीजेपी विधायकों में ही नहीं बैठ रही था तालमेल
. गांव शामिल होने से नगर निगम का दायरा काफी बढ़ा। विकास में गांवों की पूरी तरह अनदेखी
. असंतुलित विकास के कारण बीजेपी विधायक खुश नहीं।
.पूर्व हुड्डा सरकार में गठन के चलते राजनीतिक दुर्भावना भी।
. दो-दो विधानसभा क्षेत्र शामिल होने से काम कराने में भी लोगों को दिक्कत
. मेयर-डिप्टी मेयर से भी टकराव। वोट बैंक की राजनीति प्रभावित। स्थानीय लोगों की नेताओं के पास हाजिरी कम।