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PAK बच्चे को थी जानलेवा बीमारी, हिंदुस्तान ने बचाई जान

Fri, 02 Sep 2016 10:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना Updated Fri, 02 Sep 2016 10:03 AM IST
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Pakistani child was terminally ill, India saved the live
भारतीय डॉक्टरों ने दुरुस्त किया पाकिस्तानी बच्चे का दिल - फोटो : अमर उजाला
भारत और पाकिस्तान के बीच भले ही कई मुद्दों पर सालों से विवाद रहा है। लेकिन इंसानियत की एक मिशाल उस समय देखने को मिली जब पाकिस्तानी बच्ची की जानलेवा बीमारी का ईलाज भारतीय डॉक्टरों ने किया। जी हां, पाकिस्तान के पेशावर में रहने वाले नौ साल के बच्चे अहमद के दिल को भारतीय डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर दुरुस्त कर दिया।
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इस सफलता के बाद अहमद और उनका परिवार काफी खुश था। अब्दुल के पिता ने कहा कि यहां प्यार और इंसानियत है। उन्होंने दोनों देशों के आपसी संबंध मधुर होने की दुआ भी की। इस सर्जरी का अधिकतर खर्च हेव द हार्ट फाउंडेशन एवं अस्पताल प्रबंधन ने उठाया। बच्चा जन्म से ही एक विशेष बीमारी से ग्रस्त था। ऐसे बच्चों को पाकिस्तान में ब्लू बेबी के नाम से पुकारा जाता है। सर्जरी के बाद बच्चा पूरी तरह तंदुरुस्त है और अपने वतन लौटने के बाद वह नार्मल लाइफ जी सकेगा।
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जन्म से ही दिल की बीमारी से पीड़ित था बच्चा

Pakistani child was terminally ill, India saved the live
भारतीय डॉक्टरों ने दुरुस्त किया पाकिस्तानी बच्चे का दिल - फोटो : अमर उजाला
कांफ्रेंस में एसपीएस अस्पताल के सीनियर पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डा. नवदीप सिंह ने बताया कि यह बच्चा जन्म से दिल की बीमारी से पीड़ित था। नार्मल तौर पर ब्लड पंपिंग के लिए हार्ट के चार हिस्से होते हैं लेकिन इस बच्चे में जन्म से केवल तीन थे। इस कारण खेलते समय उसे सांस लेने में परेशानी होती थी। उसका वजन काफी कम था और शरीर नीला हो जाता था। यह बीमारी काफी जटिल होती है और इसमें सर्जरी करना जरूरी होता है ताकि बाईपास करके फेफड़ों से रक्त कोशिकाओं को जोड़कर हार्ट पर पड़ रहे लोड को कम किया जा सके। 

एसपीएस अस्पताल में आने के बाद बच्चे की एंजियोग्राफी, कैथिटराइजेशन और इकोकार्डियोग्राफी कराई गई। इसके बाद बच्चे को फॉंटन सर्जरी के लिए ले जाया गया। पेशावर से बच्चे को 15 जुलाई को अस्पताल में दाखिल कराया गया था। तीन अगस्त को उसकी सर्जरी हुई। अब बच्चा पूरी तरह फिट है और अपने वतन लौट रहा है। उसके पिता वहां इलेक्ट्रीशियन काम करते हैं। उनके चार बेटे और एक बेटी है।

हेव ए हार्ट फाउंडेशन ने दिया आर्थिक सहयोग

Pakistani child was terminally ill, India saved the live
डाक्टर - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में 100 में से एक बच्चा किसी न किसी तरह की हार्ट प्रॉब्लम के साथ पैदा हो रहा है। भारत में हर साल इस तरह के दो लाख बच्चे पैदा होते हैं। इनमें से 50 फीसदी बच्चों को पहले ही साल इलाज की जरूरत होती है। भारत में हर साल 10 प्रतिशत बच्चों की मौत का कारण हार्ट डिजीज ही होता है।

बच्चे की सर्जरी पर होने वाले खर्च के लिए चेरिटेबल संस्था हेव ए हार्ट फाउंडेशन ने खुलकर  सहयोग किया। फाउंडेशन के प्रेसिडेंट बलबीर कुमार ने बताया कि वह दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चों के इलाज में हमेशा सक्रिय रहते हैं। बच्चे के पिता अब्दुल का कहना है कि अहमद की बीमारी से वह काफी परेशान थे। पेशावर में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने उन्हें भारत में जाकर इलाज कराने की सलाह दी और लुधियाना में संपर्क बनाने में पूरी मदद की।
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