अब भी जारी है ऑपरेशन ब्लू स्टार पर राजनीति
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ऑपरेशन ब्लू स्टार को 30 साल गुजर चुके हैं। जून 1984 में श्री हरमंदिर साहिब पर हुई इस सैन्य कार्रवाई के बाद से अब तक पंजाब ने सियासी उतार-चढ़ाव का एक लंबा दौर देखा है।
पंजाब और पंजाबियों ने ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले और बाद में आतंकवाद का एक लंबा-काला दौर झेला, वहीं 31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों के जख्म आज भी हरे हैं।
हर साल जून और अक्तूबर-नवंबर का महीना आने पर यह जख्म और ताजा हो जाते हैं। 2014 में ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर पंजाब का माहौल खूब गर्माया रहा। ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा यूके सरकार से सलाह लिए जाने से संबंधित खुलासे ने चिंगारी को सुलगा दिया।
नए खुलासे ने सियासी दलों को थमाया मुद्दा
शिरोमणि अकाली दल के कांग्रेस पर हमले तेज हो गए। अकाली नेताओं ने यह कहते हुए इंदिरा को आड़े हाथों लिया कि उन्होंने अपने देश के आंतरिक मामले में विदेशी सलाह क्यों ली। फिर इंदिरा गांधी की ओर से जरनैल सिंह भिंडरांवाला को लिखा गया एक पत्र भी सामने आया।
वहीं कांग्रेसी सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक पत्र जारी करते हुए दावा किया यह 1984 में शिअद के तत्कालीन अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लौंगोवाल की ओर से केंद्र सरकार को लिखा गया था। इसमें उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार से सहमति जताई थी।
कैप्टन का दावा था कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी इसकी जानकारी थी और इस ऑपरेशन के लिए अकाली जिम्मेदार थे। हालांकि मुख्यमंत्री बादल ने कैप्टन के इस दावे को नकारते हुए कहा कि कैप्टन की यह चाल अकालियों को बदनाम करने की कांग्रेस की उस कोशिश की तरह ही है जो ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद व्हाइट पेपर जारी करके की गई थी। केंद्र सरकार के उस श्वेत पत्र को अकाली दल ने सिरे से नकार दिया था।
'ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए कांग्रेस जिम्मेदार'
संत हरचंद सिंह लौंगोवाल के बहुत ही करीबी सहयोगी व पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला ने भी अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान कहा था कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए केवल कांग्रेस जिम्मेदार थी और कैप्टन द्वारा जारी उक्त पत्र पर हस्ताक्षर लौंगोवाल के नहीं थे।
ऑपरेशन ब्लू स्टार के संबंध में केंद्र सरकार का पक्ष रहा है कि श्री हरमंदिर साहिब परिसर को जरनैल सिंह भिंडरांवाला और आतंकियों से मुक्त करवाने के लिए इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
वहीं किताब ‘पंजाब दा बाबा बोहड़ गुरचरण सिंह टोहड़ा’ के अनुसार अकाली नेताओं का दावा है कि अकालियों और भिंडरांवाला के बीच टकराव पैदा करने में नाकाम रहने पर केंद्र सरकार ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना था।
ब्लू स्टार मेमोरियल पर भी विवाद
श्री हरमंदिर साहिब परिसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार मेमोरियल के निर्माण पर भी पिछले कुछ समय के दौरान विवाद उपजा और एक बार फिर अकाली व कांग्रेसी आमने-सामने हुए।
इस मेमोरियल के निर्माण से शिअद की सहयोगी पार्टी भाजपा ने भी खुद को अलग कर लिया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को हुए 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिख संगतों से कहा है कि राजनीतिक कीचड़ उछालने से गुरेज करते हुए, सिख मर्यादा के अनुसार ही धार्मिक रस्मों को अंजाम दिया जाए।