चंडीगढ़ : जीएमएसएच-16 में मानकों की अनदेखी, मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे हैं अधिकारी
चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्थित सरकारी मल्टी स्पेशयलिटी अस्पताल (जीएमएसएच-16) में मानकों की अनदेखी कर संवेदनशील पदों पर एक ही अधिकारी व कर्मचारी वर्षों से तैनात हैं। स्थिति यह है कि संवेदनशील पदों पर पटल परिवर्तन के दो साल वाले शासनादेश की अनदेखी कर मनमाने तरीके से 10 से 12 वर्षों से एक व्यक्ति पद बना हुआ है। यह सबकुछ अधिकारियों की जानकारी में हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक की जानकारी में सबकुछ था लेकिन उन्होंने उन पदों को संवेदनशील न मानते हुए सामान्य की श्रेणी में शामिल कर दिया था जबकि वर्तमान स्वास्थ्य निदेशक इसे गंभीरता से लेते हुए शासनादेश को कड़ाई से लागू करने की बात कह रही हैं। वहीं, अस्पताल के कर्मचारियों व अधिकारियों का कहना है कि उच्च अधिकारियों से मिलीभगत के चलते कुछ अधिकारी व कर्मचारी सालों से मलाईदार पदों पर तैनात होकर कमीशन का मोटा खेल खेल रहे हैं, जिसमें बदलाव बेहद जरूरी है।
किस पद पर कितने साल से नहीं हुई बदली
- एनएचएम नोडल - 12 वर्ष से
- परचेज डिपार्टमेंट में तीन लिपिक- छह वर्ष से
- आउटसोर्सिंग में एक सहायक लिपिक- छह वर्ष से
- स्टोर में चार फार्मासिस्ट- सात वर्ष से
वित्त विभाग में होता है बदलाव
वहीं दूसरी तरफ, अस्पताल में तैनात वित्त विभाग के कर्मचारियों का पटल परिवर्तन रूटीन में होता रहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की बजाय वित्त विभाग से तैनात किए गए हैं। वहां संवेदनशील पटल परिवर्तन के मानक का पालन करते हुए दो सालों पर कर्मचारियों का स्थान परिवर्तित कर दिया जाता है।
इसलिए नहीं छूट रहा पद का मोह
स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में संवेदनशील पदों पर दो साल के बाद पटल परिवर्तन का नियम इसलिए बनाया गया है ताकि उस पद पर तैनात कर्मचारी और अधिकारी उस पद का फायदा न उठा सकें। एक उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के नोडल का पद सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है लेकिन जीएचएसएच-16 में पिछले 12 वर्षों से वहां एक ही अधिकारी तैनात है।
वहीं, स्टोर में दवाओं से लेकर उपकरण व अन्य जरूरी चीजों की खरीद बिक्री से जुड़े सभी निर्णय वहां तैनात फार्मासिस्ट के हाथ में ही होता है। इसके अलावा आउटसोर्सिंग में तैनात वरिष्ठ सहायक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के टेंडर में महत्वपूर्ण रोल निभाता है। इन पदों पर कमीशन का लंबा खेल चलता है। इसके कारण एक बार तैनाती मिल जाने के बाद वहां बने रहने के लिए तमाम उपाय किए जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ही नहीं सभी विभागों के संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मचारियों का पटल परिवर्तन दो से तीन साल के अंदर होना अनिवार्य है। यह नियम बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मचारी ज्यादा समय तक वहां रहने पर अपना नेक्सेस एक्टिव न कर सकें और उन पर विभाग का नियंत्रण न बना रहे। -डॉ आर के गुप्ता, पूर्व निदेशक स्वास्थ्य, पंजाब।
इसकी जानकारी मुझे भी है लेकिन कोविड-19 में यह परिवर्तन करना संभव नहीं होगा। इससे व्यवस्था प्रभावित होगी इसलिए स्थिति सामान्य होने पर इसे गंभीरता से लेते हुए पटल परिवर्तन के नियम को कड़ाई से लागू किया जाएगा। - डॉ अमनदीप कौर कंग, स्वास्थ्य निदेशक, चंडीगढ़।