केपीएस गिल की जीवनी में पंजाब आतंकवाद से जुड़ी खास बातें
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पूर्व डीजीपी केपीएस गिल की जीवनी ‘दि पैरामाउंट कॉप’ पर सवार उठाए गए हैं। साथ में मुख्यमंत्री बादल पर आरोप लगाए गए हैं।
पूर्व कांग्रेसी विधायक सुखपाल खैहरा ने पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के जीवन पर लिखी गई किताब ‘दि पैरामाउंट कॉप’ पर सवार उठाए हैं। खैहरा ने इसके आधार पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा है कि इस किताब के अनुसार आतंकवाद के दौर में बादल निरंतर गिल के साथ बैठकें करते रहे। वह स्पष्ट करें कि गिल के साथ इन गुप्त बैठकों में क्या विचार-विमर्श होता रहा। किताब के लेखक राहुल चंदन हैं।
खैहरा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अपील की कि वह बादल के इस पंथ विरोधी रवैये के लिए उनसे पंथ रत्न की उपाधि वापस लें। खैहरा सोमवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि उस वक्त बादल आतंकवादियों के हक में बोलते थे और उनके भोगों पर भी जाते थे, जबकि केपीएस गिल सरकार के नुमाइंदे के तौर पर आतंकवाद से लड़ाई लड़ रहे थे। ऐसे में दोनों के बीच भोजन व चाय पर बैठकों का होना कई संकेत देता है।
गिल के साथ हुई गुप्त बैठकों पर स्पष्टीकरण मांगा
खैहरा ने कहा कि बादल को स्पष्ट करना चाहिए कि कहीं वह शिरोमणि अकाली दल की गुप्त बातें तो गिल के जरिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार तक नहीं पहुंचाते थे। यह भी स्पष्ट करें कि वह दोहरी नीति क्यों अपनाते रहे?
खैहरा के अनुसार किताब में गिल का यह कहना कि बादल के साथ सेक्टर-9 में उनकी कई बैठकें हुईं और इनमें पंजाब के हालात पर लंबी चर्चा होती रही, कई संदेह पैदा करता है।
इसके साथ ही जब तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह ने डीजीपी केपीएस गिल को बादल की सुरक्षा वापस लेने के लिए कहा तो उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। इसलिए बादल को अपने व गिल के रिश्तों के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।