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Exclusive: इतना दहेज देते ही क्यों हो कि मारपीट होने लगे?

Sun, 10 Apr 2016 02:55 PM IST
शिवानी मेहता/अमर उजाला, चंडीगढ़
शिवानी मेहता/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 10 Apr 2016 02:55 PM IST
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now Dowry harassment under Family Violence Act in australia
woman - फोटो : DEMO Pics

दहेज उत्पीड़न भारत में आम बात है लेकिन अगर भारतीय लड़की विदेश में इसकी शिकार हो तो शायद उसे वही झेलना पड़ेगा तो अब ऑस्ट्रेलिया में सिमरन (बदला हुआ नाम) झेल रही है। दहेज की मांग को लेकर सिमरन के पति ने उसे इस कदर प्रताड़ित किया कि वह अपनी जान बचाने की गुहार लेकर थाने पहुंच गई।

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पर ऑस्ट्रेलिया की पुलिस क्या जाने दहेज उत्पीड़न को। सिमरन ने जब आपबीती सुनाई तो पुलिस ने पूछा कि दहेज क्या होता है। घबराई सिमरन ने बताया कि लड़की को शादी के समय परिवार की तरफ से दिए गए गिफ्ट दहेज में आते हैं। उसकी शादी पर परिवार ने 65 लाख रुपये खर्च किए और लड़के वालों को गहने, कार और अन्य कीमती सामान भी दिया।
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इस पर पुलिस ने फिर सवाल दागा- ‘तो इतना दहेज क्यों देते हो कि आपसे मारपीट होने लगे।’ यह व्यथा केवल सिमरन की नहीं, विदेशों में बसीं कई महिलाओं की है जो आंसू पीने को मजबूर हैं। लेकिन अब सिमरन और ऐसी कई पीड़ित महिलाओं को इंसाफ की उम्मीद जगी है।
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ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने दहेज उत्पीड़न को पारिवारिक हिंसा कानून के दायरे में शामिल करने की स्वीकृति दे दी है। वहां का मानवाधिकार विभाग सिमरन के पक्ष में उतर आया है। फिलहाल उसे पति और परिवार से अलग मेलबर्न में किसी सुरक्षित जगह पर रखा गया है।

आखिर माना ऑस्ट्रेलिया, अपराध है दहेज उत्पीड़न

now Dowry harassment under Family Violence Act in australia
महिला से गैंगरेप

दिसंबर 2015 में विक्टोरिया पार्लियामेंट में एक याचिका पेश की गई थी जिसमें दहेज उत्पीड़न को पारिवारिक हिंसा में शामिल करने का अनुरोध किया गया था। रॉयल कमीशन इनटू फैमिली वॉयलेंस ने भी विक्टोरिया सरकार से 12 माह के भीतर दहेज उत्पीड़न को पारिवारिक हिंसा में शामिल करने की अनुशंसा की है। इस संबंध में 1900 पेज की रिपोर्ट सौंपी गई है। सरकार ने इन सभी दिशा-निर्देशों को लागू करने की स्वीकृति दे दी है। प्रीमियर डेनियल एंड्रूज ने इसकी पुष्टि की है। 
 
चार साल पहले शुरू हुई थी मुहिम
दहेज प्रताड़ना के मामले सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई मानवाधिकार व स्वास्थ्य केंद्र की निदेशक मंजुला ओ’कोनर ने नवंबर 2012 में दहेज उत्पीड़न को कानून के दायरे में लाने की मुहिम शुरू की थी। मंजुला का कहना है कि पिछले कुछ साल में मिलीं शिकायतों में 50 फीसदी दहेज उत्पीड़न की थी। बाद में इनमें से कुछ पीड़ित महिलाओं ने खुदकुशी कर ली। इस दौरान दो महिलाओं की दहेज के कारण हत्या के केस भी सामने आए।
 
मंजुला ओ’कोनर, निदेशक, ऑस्ट्रेलियाई मानवाधिकार व स्वास्थ्य केंद्र के मुताबिक यह बड़ी उपलब्धि है। भारत में बसे लोगों को भी यह जानकारी होनी चाहिए कि ऑस्ट्रेलिया में अब दहेज उत्पीड़न पारिवारिक हिंसा कानून के दायरे में आएगा।

सिमरन, पीड़ित ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में दहेज उत्पीड़न को हिंसा के कानून में शामिल किए जाने से यहां बसीं भारतीय महिलाओं के हालात सुधरेंगे। यहां के प्रशासन को बस अब इसे विस्तार से समझने की जरूरत है।

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