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विदेशों में बसे भारतीयों ने नोटबंदी पर उठाया सवाल, हमारी सुनिए मोदी जी
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Thu, 17 Nov 2016 07:55 PM IST
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नोटबंदी के कारण एनआरआई हुए परेशान
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500 और 1000 के नोट बंद होने से विदेशों में बसे एनआरआईज खासे परेशान हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सामने सवाल उठाए हैं। एनआरआईज का कहना है कि उनके पास भारतीय करेंसी तो है, लेकिन बदलने के लिए विदेशों में स्थित भारतीय बैंकों ने साफ हाथ खड़े कर दिए हैं।
बैंकों ने तर्क दिया है कि भारतीय दूतावास की ओर से उनको इस संबंध में कोई आदेश नहीं मिला है कि वह इस करेंसी को कैसे बदल सकते हैं? यही नहीं करेंसी को खाते में डिपॉजिट भी नहीं किया जा रहा है। इससे एनआरआईज की परेशानी बढ़ती जा रही है।
भारी संख्या में पंजाबी मूल के लोग अमेरिका, कनाडा, यूके, दुबई, यूरोप, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में बसे हुए हैं। वह भारत से वापस रवाना होते समय भारतीय करेंसी को साथ ले जाते हैं, ताकि अगर रास्ते में उनको दिल्ली या अमृतसर एयरपोर्ट पर कोई आपातकालीन समस्या पैदा हो जाए तो वह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
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कई एनआरआई अपनी बंद कोठियों की तिजोरी में रुपये रखकर गए हैं, जिनको अब वह भारत आने के बाद खोल सकते हैं और तब तक नोट बदलने की सीमा समाप्त हो सकती है।
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बैंकों ने तर्क दिया है कि भारतीय दूतावास की ओर से उनको इस संबंध में कोई आदेश नहीं मिला है कि वह इस करेंसी को कैसे बदल सकते हैं? यही नहीं करेंसी को खाते में डिपॉजिट भी नहीं किया जा रहा है। इससे एनआरआईज की परेशानी बढ़ती जा रही है।
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भारी संख्या में पंजाबी मूल के लोग अमेरिका, कनाडा, यूके, दुबई, यूरोप, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में बसे हुए हैं। वह भारत से वापस रवाना होते समय भारतीय करेंसी को साथ ले जाते हैं, ताकि अगर रास्ते में उनको दिल्ली या अमृतसर एयरपोर्ट पर कोई आपातकालीन समस्या पैदा हो जाए तो वह इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
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कई एनआरआई अपनी बंद कोठियों की तिजोरी में रुपये रखकर गए हैं, जिनको अब वह भारत आने के बाद खोल सकते हैं और तब तक नोट बदलने की सीमा समाप्त हो सकती है।
कोई बैंक पुराने नोट लेने को तैयार नहीं है
black money
जालंधर के रहने वाले प्रिंस कुमार कनाडा की वेंकूवर सिटी में रह रहे हैं। वह जब परिवार के साथ कनाडा गए तो उनके पास एक लाख 34 हजार रुपये थे, जो अब वहां पर कोई बैंक लेने के लिए तैयार नहीं है।
उन्होंने आईसीआईसीआई समेत कई बैंकों की ब्रांचों से संपर्क किया, लेकिन हरेक ब्रांच अधिकारी ने हाथ खड़े कर दिए हैं कि वह पुराने नोटों को नहीं ले सकते और न ही इनको खाते में जमा किया जा सकता है।
ऐसी ही कहानी निर्मल सिंह की है, जो लंबे समय से यूएसए में बसे हुए हैं। वह हर साल भारत आते जाते हैं और अमेरिकन ग्रीन कार्ड होल्डर हैं। उनके पास करीब तीन लाख रुपये हैं, जो उन्होंने बचाकर रखे थे।
ताकि अगर किसी समय मजबूरी में भारत जाना पड़े तो वह इन पैसों को साथ लेकर जा सकें, लेकिन अब अमेरिका के तमाम बैंकों ने इस करेंसी को लेने में हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि उनको भारतीय दूतावास की ओर से आदेश ही नहीं है।
उन्होंने आईसीआईसीआई समेत कई बैंकों की ब्रांचों से संपर्क किया, लेकिन हरेक ब्रांच अधिकारी ने हाथ खड़े कर दिए हैं कि वह पुराने नोटों को नहीं ले सकते और न ही इनको खाते में जमा किया जा सकता है।
ऐसी ही कहानी निर्मल सिंह की है, जो लंबे समय से यूएसए में बसे हुए हैं। वह हर साल भारत आते जाते हैं और अमेरिकन ग्रीन कार्ड होल्डर हैं। उनके पास करीब तीन लाख रुपये हैं, जो उन्होंने बचाकर रखे थे।
ताकि अगर किसी समय मजबूरी में भारत जाना पड़े तो वह इन पैसों को साथ लेकर जा सकें, लेकिन अब अमेरिका के तमाम बैंकों ने इस करेंसी को लेने में हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि उनको भारतीय दूतावास की ओर से आदेश ही नहीं है।
यूके में भी कोई बैंक नहीं ले रहा पुराने नोट
black money
यूके के चाटम कैंट की रहने वाली गुरजीत कौर गैबी और राज घिक्क की समस्या भी कुछ ऐसी ही है, उनके बुजुर्गों ने उनको भारतीय करेंसी के नोट उस समय गिफ्ट किए थे, वह पहली बार भारतीय दौरे पर आई थी। उनके पास एक लाख 90 हजार के एक-एक हजार के नोट हैं, लेकिन इस नगदी को यूके का कोई बैंक लेने के लिए तैयार ही नहीं है।
खासकर कई एनआरआईज परिवार ऐसे हैं, जो अपनी कोठियों को बंद कर विदेश गए हुए हैं। उनको घरों में एक-एक हजार के नोटों की राशि लॉकर में पड़ी हुई है, वह जब तक भारत आएंगे तब तक इन नोटों को भारतीय बैंक भी नहीं लेंगे। 31 दिसंबर की तारीख क्रास कर चुकी होगी।
एनआरआईज के लिए सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए : दत्त
अमेरिकन इंडियन फ्रेंडज क्लब के प्रधान रमन दत्त का कहना है कि एनआरआईज का कसूर क्या है? भारतीय दूतावास को विदेशों में स्थित भारतीय बैंकों को गाइड लाइन जारी करनी चाहिए कि वह 31 दिसंबर तक भारतीय करेंसी के नोटों को जमा कर उनको तबदील करें।
यह भी व्यवस्था होनी चाहिए कि एनआरआईज जब भारत लौटे वह पासपोर्ट दिखाकर 31 दिसंबर के बाद भी बैंकों से राशि बदल सकते हैं। अब किसी की कोठी में अगर एक लाख की राशि पड़ी है तो वह तत्काल टिकट लेकर भारत नहीं आ सकता, इतना तो टिकट पर खर्च हो जाएगा।
खासकर कई एनआरआईज परिवार ऐसे हैं, जो अपनी कोठियों को बंद कर विदेश गए हुए हैं। उनको घरों में एक-एक हजार के नोटों की राशि लॉकर में पड़ी हुई है, वह जब तक भारत आएंगे तब तक इन नोटों को भारतीय बैंक भी नहीं लेंगे। 31 दिसंबर की तारीख क्रास कर चुकी होगी।
एनआरआईज के लिए सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए : दत्त
अमेरिकन इंडियन फ्रेंडज क्लब के प्रधान रमन दत्त का कहना है कि एनआरआईज का कसूर क्या है? भारतीय दूतावास को विदेशों में स्थित भारतीय बैंकों को गाइड लाइन जारी करनी चाहिए कि वह 31 दिसंबर तक भारतीय करेंसी के नोटों को जमा कर उनको तबदील करें।
यह भी व्यवस्था होनी चाहिए कि एनआरआईज जब भारत लौटे वह पासपोर्ट दिखाकर 31 दिसंबर के बाद भी बैंकों से राशि बदल सकते हैं। अब किसी की कोठी में अगर एक लाख की राशि पड़ी है तो वह तत्काल टिकट लेकर भारत नहीं आ सकता, इतना तो टिकट पर खर्च हो जाएगा।