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अब शातिर ओटीपी नहीं, बैंक कोड मांगते हैं- एम कृष्णन
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चंडीगढ़। साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि फोन करने वाला व्यक्ति काफी विनम्रता से बात कर आपको जाल में फंसा लेता है। शातिरों ने सीख लिया है कि अब लोग वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के नाम पर जागरूक हो गए हैं इसलिए वह अब बैंक कोड मांगते हैं। ऐसे नंबरों को ठीक से पहचान लें और अपनी गोपनीय जानकारी किसी को न दें। बैंकों के संदेश को लगातार पढ़ते रहें, इसी से आपकी जमा पूंजी की सुरक्षा हो सकती है। यह जानकारी सोमवार को पंजाब एंड सिंध बैंक के एमडी सीईओ एम कृष्णन ने एक प्रेसवार्ता के दौरान दी।
सेक्टर-17 स्थित एक निजी होटल में एम कृष्णन ने कहा कि मैं एक बैंक में 30 साल रहा। वहां से सेवानिवृत्त होने के कुछ दिन बाद मुझे एक फोन आया कि आपके बैंक का केवाईसी अपडेट करना है। उस व्यक्ति ने मुझे उसी बैंक का नाम बताया जिस बैंक में मैं काम करता था। मैंने पूछा कि आपको पता है मैं कौन बोल रहा हूं तो उसने बताया कि मुझे पता है आप हमारे जीएम रहे हैं। उसके बाद मैंने तत्काल उस बैंक के आईटी विभाग से संपर्क किया। वहां पता चला कि मुझसे पहले लगभग 5 सेवानिवृत्त जीएम को ऐसे ही फोन कर उनके साथ ठगी की जा चुकी है। इससे पता चलता है कि साइबर ठग काफी आगे निकल गए हैं, लेकिन ग्राहक बैंक के संदेशों को नियम से पढ़ेगा तो उसकी पूंजी बिल्कुल सुरक्षित है। हमारे बैंक ने इसके लिए एक फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट बनाया है। जैसे चंडीगढ़ से एक बार खाते से ट्रांजेक्शन हुआ और कुछ देर बाद चेन्नई से दूसरा ट्रांजेक्शन हुआ तो उसकी जानकारी तत्काल ग्राहक को दी जाती है और पूछा जाता है क्योंकि इतनी तेजी से लोग इतनी दूरी तय नहीं कर सकते हैं। सरकार डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रही है तो बैंकों ने भी इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। इस मौके पर फील्ड जनरल मैनेजर प्रवीण मोंगिया व एचआरडी मैनेजर कामेश सेठी भी मौजूद रहे।
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सेक्टर-17 स्थित एक निजी होटल में एम कृष्णन ने कहा कि मैं एक बैंक में 30 साल रहा। वहां से सेवानिवृत्त होने के कुछ दिन बाद मुझे एक फोन आया कि आपके बैंक का केवाईसी अपडेट करना है। उस व्यक्ति ने मुझे उसी बैंक का नाम बताया जिस बैंक में मैं काम करता था। मैंने पूछा कि आपको पता है मैं कौन बोल रहा हूं तो उसने बताया कि मुझे पता है आप हमारे जीएम रहे हैं। उसके बाद मैंने तत्काल उस बैंक के आईटी विभाग से संपर्क किया। वहां पता चला कि मुझसे पहले लगभग 5 सेवानिवृत्त जीएम को ऐसे ही फोन कर उनके साथ ठगी की जा चुकी है। इससे पता चलता है कि साइबर ठग काफी आगे निकल गए हैं, लेकिन ग्राहक बैंक के संदेशों को नियम से पढ़ेगा तो उसकी पूंजी बिल्कुल सुरक्षित है। हमारे बैंक ने इसके लिए एक फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट बनाया है। जैसे चंडीगढ़ से एक बार खाते से ट्रांजेक्शन हुआ और कुछ देर बाद चेन्नई से दूसरा ट्रांजेक्शन हुआ तो उसकी जानकारी तत्काल ग्राहक को दी जाती है और पूछा जाता है क्योंकि इतनी तेजी से लोग इतनी दूरी तय नहीं कर सकते हैं। सरकार डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रही है तो बैंकों ने भी इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। इस मौके पर फील्ड जनरल मैनेजर प्रवीण मोंगिया व एचआरडी मैनेजर कामेश सेठी भी मौजूद रहे।
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