{"_id":"e11c3920920525206d6d4c53c5e6cf7b","slug":"no-humanity-no-justice-can-be","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंसानियत नहीं तो इंसाफ नहीं किया जा सकता ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंसानियत नहीं तो इंसाफ नहीं किया जा सकता
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Tue, 10 Dec 2013 09:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर इंसानियत नहीं है तो आप इंसाफ भी नहीं कर सकते। इंसाफ करना तो दूर इंसाफ की बात भी नहीं कर सकते।
कुछ इसी तरह के संबोधन के जरिए पुलिस कमिश्नर राजबीर देसवाल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में लोगों को इंसानियत का महत्व समझाने की कोशिश की।
वह सेक्टर-14 थाने के पुलिस कम्यूनिटी हब में ऑल इंडिया ह्यूमन राइटस वाच व पुलिस के संयुक्त सहयोग से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में पहुंचे थे।
देसवाल ने कहा कि अगर बात ह्यूमन राइट्स की हो रही है तो फिर पुलिस भी ह्यूमन है और पुलिस वालों के भी राइट्स हैं।
अफसरों को तो फिर भी शेव करने, अच्छे कपड़े पहनने और कई सारी सुविधाएं मिल जाती हैं, लेकिन उस पुलिस वाले का क्या, जो तीन-तीन दिन तक लगातार नाके पर खड़ा रहता है।
दाढ़ी नहीं बना पाता और कपड़ों की तो बात ही क्या? उनके भी राइटस हैं, लेकिन पुलिस को राइट्स के मामले में नहीं आंका जाता।
बच्चों के लिए क्यों बोझ बन जाते हैं बुजुर्ग
देसवाल ने कहा कि कभी किसी के हक को नहीं मारना चाहिए और न ही किसी से नफरत करनी चाहिए। क्या पता, कौन किस वक्त काम आ जाए।
उन्हें बड़ा दुख होता है, जब वह उन बूढ़े लोगों को देखते हैं, जो अपना हक पाने के लिए पुलिस की मदद लेते हैं। उनके बच्चे उन्हें घर से निकाल चुके होते हैं।
विज्ञापन
जब दो लोग दस लोगों को पाल सकते हैं तो जरूरत पड़ने पर दस लोग मिलकर दो लोगों को क्यों नहीं पाल सकते? उन्हें क्यों घर से निकाल दिया जाता है?
जब ऐसे किस्से देखने को मिलते हैं तो एक ही बात जेहन में आती है कि ह्यूमन राइटस कहां है?
बदल रहा पुलिस महकमे का माहौल
डीसीपी अश्विन शेणवी ने कहा कि पहले और अब पुलिस में काफी फर्क आया है। अब पुलिस संवेदनशील हो रही है। भले ही कुछ एनजीओ या अन्य संगठनों की मदद से ही सही, लेकिन पुलिस लोगों के बीच पहुंच रही है।
कार्यक्रम के दौरान रिटायर्ड डीएसपी राणा विर्क ने कहा कि उनके जमाने की पुलिस और अब की पुलिस में काफी फर्क है। उनकी नौ पीढ़ियां पुलिस महकमे में काम करती आ रही हैं और हर पीढ़ी के साथ पुलिस का माहौल बदल रहा है।
इस कार्यक्रम में मेयर उपेंद्र आहलूवालिया, पार्षद ओमवती पुनिया, रोड सेफ्टी संगठन के प्रधान सुभाष कपूर, सहित ऑल इंडिया ह्यूमन राइटस वाच के कई पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
कुछ इसी तरह के संबोधन के जरिए पुलिस कमिश्नर राजबीर देसवाल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में लोगों को इंसानियत का महत्व समझाने की कोशिश की।
वह सेक्टर-14 थाने के पुलिस कम्यूनिटी हब में ऑल इंडिया ह्यूमन राइटस वाच व पुलिस के संयुक्त सहयोग से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में पहुंचे थे।
देसवाल ने कहा कि अगर बात ह्यूमन राइट्स की हो रही है तो फिर पुलिस भी ह्यूमन है और पुलिस वालों के भी राइट्स हैं।
अफसरों को तो फिर भी शेव करने, अच्छे कपड़े पहनने और कई सारी सुविधाएं मिल जाती हैं, लेकिन उस पुलिस वाले का क्या, जो तीन-तीन दिन तक लगातार नाके पर खड़ा रहता है।
विज्ञापन
दाढ़ी नहीं बना पाता और कपड़ों की तो बात ही क्या? उनके भी राइटस हैं, लेकिन पुलिस को राइट्स के मामले में नहीं आंका जाता।
बच्चों के लिए क्यों बोझ बन जाते हैं बुजुर्ग
देसवाल ने कहा कि कभी किसी के हक को नहीं मारना चाहिए और न ही किसी से नफरत करनी चाहिए। क्या पता, कौन किस वक्त काम आ जाए।
उन्हें बड़ा दुख होता है, जब वह उन बूढ़े लोगों को देखते हैं, जो अपना हक पाने के लिए पुलिस की मदद लेते हैं। उनके बच्चे उन्हें घर से निकाल चुके होते हैं।
विज्ञापन
जब दो लोग दस लोगों को पाल सकते हैं तो जरूरत पड़ने पर दस लोग मिलकर दो लोगों को क्यों नहीं पाल सकते? उन्हें क्यों घर से निकाल दिया जाता है?
जब ऐसे किस्से देखने को मिलते हैं तो एक ही बात जेहन में आती है कि ह्यूमन राइटस कहां है?
बदल रहा पुलिस महकमे का माहौल
डीसीपी अश्विन शेणवी ने कहा कि पहले और अब पुलिस में काफी फर्क आया है। अब पुलिस संवेदनशील हो रही है। भले ही कुछ एनजीओ या अन्य संगठनों की मदद से ही सही, लेकिन पुलिस लोगों के बीच पहुंच रही है।
कार्यक्रम के दौरान रिटायर्ड डीएसपी राणा विर्क ने कहा कि उनके जमाने की पुलिस और अब की पुलिस में काफी फर्क है। उनकी नौ पीढ़ियां पुलिस महकमे में काम करती आ रही हैं और हर पीढ़ी के साथ पुलिस का माहौल बदल रहा है।
इस कार्यक्रम में मेयर उपेंद्र आहलूवालिया, पार्षद ओमवती पुनिया, रोड सेफ्टी संगठन के प्रधान सुभाष कपूर, सहित ऑल इंडिया ह्यूमन राइटस वाच के कई पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।