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जाटों को बड़ा झटका, आरक्षण पर नहीं हुआ कोई फैसला, रोक बरकरार

Fri, 23 Dec 2016 12:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 23 Dec 2016 12:16 PM IST
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no decision on haryana jat reservation case hearing in punjab haryana highcourt
जाट आरक्षण के लिए आंदोलन - फोटो : amar ujala
हरियाणा में जाटों सहित 6 जातियों को आरक्षण पर लगी रोक हटाने पर कोई फैसला नहीं हो सका। फिलहाल इस पर रोक बरकरार रहेगी। रोक हटवाने के लिए हरियाणा सरकार की अर्जी पर वीरवार को तीन घंटे बहस चली। इस बीच सरकार की तमाम दलीलों के बावजूद आरक्षण पर रोक हटाने को मंजूरी नहीं मिली। उधर, याची की बहस पूरी न हो पाने के कारण हाईकोर्ट ने केस की अगली सुनवाई 11 जनवरी तक टाल दी।
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बहस की शुरुआत हरियाणा सरकार की ओर से हुई। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि याची ने जो भी आधार बनाएं हैं, वे सभी हरियाणा में जाटों को आरक्षण देने को चुनौती देने के लिए नाकाफी हैं। सरकार ने कहा कि एनसीबीसी, सुप्रीम कोर्ट या देश की किसी भी संवैधानिक संस्था ने कभी भी हरियाणा में जाटों को आरक्षण देने को गलत नहीं माना। एनसीबीसी की रिपोर्ट को आधार बनाकर केंद्र में जाटों का आरक्षण रद किया गया था।
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जाट के हरियाणा में कई बार मुख्यमंत्री व कैबिनेट में मंत्रियों तथा विधायकों की कुल संख्या में जाटों की संख्या को जाटों के पिछड़ा न होने का आधार बताना तर्क संगत नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि एनसीबीसी ने जाटों सहित अन्य को आरक्षण देने के लिए सिफारिश करने वाली केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को नहीं माना था। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीबीसी के फैसले कोसही करार दिया था। ऐसे में केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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हरियाणा सरकार ने ये सब दलीलें दीं

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जाट नेता - फोटो : amar ujala
हरियाणा सरकार की ओर से दलील दी गई कि हरियाणा में केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को आधार नहीं बनाया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब एक्ट बनाया गया तो इसकी प्रक्रिया के दौरान केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को बिल में शामिल किया गया था।

इस पर हरियाणा सरकार ने कहा कि एक्ट तभी ज्यूडिशियल रिव्यू की श्रेणी में आता है, जब संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन हो। इस मामले में गवर्नर की मंजूरी के बाद इसे कानून का रूप दिया गया। याची ने कहा कि तमिलनाडु में दिए गए आरक्षण के लिए भी आंकड़े एकत्रित नहीं किए गए थे।

स्टेट के ओपिनियन के आधार पर आरक्षण का लाभ दिया गया था। ऐसे में आरक्षण देने का हरियाणा सरकार का फैसला भी सही है। हरियाणा सरकार की बहस पूरी होते-होते हाईकोर्ट का समय समाप्त हो गया, जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को टालने की बात कही।

इस पर हरियाणा सरकार ने स्टे हटाने की अपील दोहराई। याची पक्ष की ओर से कहा गया कि बिना उनका पक्ष सुने रोक न हटाई जाए।

 

याची से पूछा, क्यों न पूरा एक्ट ही खत्म कर दिया जाए

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जाट नेता - फोटो : amar ujala
सुनवाई के दौरान याची की ओर से बहस का प्रयास किया गया, तो हाईकोर्ट ने कहा कि याची का पक्ष तब सुना जाएगा, जब याची यह साबित करे की जनहित याचिका दाखिल करने के लिए बनाए गए नियमों पर वह खरा उतरता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह लगा कि अदालत को धोखे में रखा गया है।

ऐसे में हाईकोर्ट यह सुनिश्चित करेगा कि जनहित के नाम पर निजी हित को साधने का प्रयास न किया जाए, हाईकोर्ट का गौरव बनाए रखना हमारा दायित्व है। इस पर याची पक्ष की ओर से बताया गया कि इसको साबित करने के लिए संबंधित दस्तावेज अर्जी के माध्यम से दाखिल किए गए हैं, हालांकि अर्जी आज सुनवाई के लिए पहुंची नहीं है।

क्यों न एक्ट को खारिज कर दिया जाए, याची ने कहा आपत्ति नहीं
हाईकोर्ट में जब कुम्हार महासभा की याचिका सुनवाई के लिए पहुंची तो हाईकोर्ट ने याची से पूछा कि कुम्हार पिछड़ा वर्ग में आते हैं और जब वे खुद आरक्षण का लाभ पा रहे हैं, तो दूसरों को आरक्षण मिले इससे उन्हें क्या समस्या है।

हाईकोर्ट ने कहा कि क्यों न पूरे एक्ट को खारिज कर दें और इससे सभी पिछड़ा वर्ग को मिला आरक्षण समाप्त हो जाए और नए सिरे से आरक्षण का लाभ देने के लिए सर्वे करवाया जाए । इस पर याची ने कहा कि उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।

आंदोलन में हुए नुकसान के क्लेम पर हाईकोर्ट सख्त

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जाट आंदोलन - फोटो : amar ujala
पंजाब -हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में हुए संपत्ति के नुकसान की भरपाई पर स्थिति स्पष्ट न करने पर हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है। मामले में अदालत ने क्लेम कमिश्नर की रिपोर्ट तलब की है। याचिका दाखिल करते हुए एंटी करप्शन सोसाइटी ने कहा था कि हरियाणा में 2010 में भी जाट आरक्षण आंदोलन हुआ था।

उस दौरान जो भी नुक्सान हुआ था उसे देखते हुए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए थे। इन आदेशों में आगे ऐसी कोई घटना न हो इसके लिए कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों की पालना न होने की बात कहते हुए याची की ओर से बताया गया कि जिन लोगों का नुकसान हुआ था, उन्हें क्लेम कमिश्नर के सामने दावा पेश करने को कहा गया था।

इस बारे में हाईकोर्ट ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए हरियाणा सरकार को पिछली सुनवाई के दौरान आदेश दिए थे। वीरवार को सुनवाई के दौरान स्थिति स्पष्ट न कर पाने पर हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए अब क्लेम कमिश्नर की रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस रिपोर्ट को देखकर पता चल जाएगा कि इस दिशा में सरकार ने कितना काम किया है।
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