जेल ब्रेक केसः हवारा-भ्यौरा आतंकी रहेंगे, देशद्रोही नहीं
बुड़ैल जेल ब्रेक मामले में आतंकी जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा के खिलाफ देशद्रोह और घुसपैठ की अतिरिक्त धाराएं लगाने की अपील को सीजेएम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि एडिशनल एंड सेशन जज व हाईकोर्ट में इन धाराओं को पहले ही अस्वीकार कर दिया है। ऐसे में यह धाराएं इस स्तर पर लगाने की अपील मेंटेनेबल नहीं है।
इसके अलावा जेल वार्डन राम मेहर के फिर से बयान देने की अपील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। वहीं, बचाव पक्ष के वकील तरमिंदर सिंह के मुताबिक मामले में आतंकी जगतार सिंह तारा का अलग से ट्रायल चलेगा। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।
तोड़-मरोड़ कर बयान दर्ज कराने का आरोप
जेल ब्रेक मामले की सीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने जिस जेल वार्डन राम मेहर की अर्जी खारिज की गई वह बिना पूर्व सूचना और नोटिस के अचानक दोबारा गवाही देने की इच्छा से कोर्ट रूम में आ गया था।
उसने अदालत से उसके पहले दिए बयान को तोड़मरोड़ पर दर्ज कराने की बात कही थी। उसने पूर्व जेल वार्डन हीरानंद मिश्रा की तर्ज पर अदालत में फिर से बयान दर्ज कराने की अर्जी देकर कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोगों को चौंका दिया।
जेल वार्डन ने शक जताया था कि सरकारी वकील की गैर-मौजूदगी में उसके जो बयान दर्ज किए गए थे उसे कुछ वकीलों ने तोड़ मरोड़ कर दर्ज करवाया हो सकता है।
राम मेहर के अनुसार उसे इस वर्ष 22 जनवरी को समाचार पत्रों से पता चला कि सरकारी वकील ने कहा है कि जेल वार्डन जिसमें उसका गवाह के तौर पर नाम था पुलिस के दिए बयान से अदालत में मुकर चुका है।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि मामले में राम मेहर के बयान जनवरी 2013 में हो चुके हैं और फिर से बयान दर्ज करवाने का कोई औचित्य नहीं है। साथ ही उल्टा अर्जी दायर करने वाले वार्डन की ड्यूटी में लापरवाही बरतना करार दिया था।
बचाव पक्ष ने कहा था कि वर्तमान अर्जी दायर करने के पीछे खुद को बचाने की कोशिश है, जिसने संदिग्ध गतिविधियों के बारे में वरिष्ठ जेल अधिकारियों को सूचित नहीं किया था। बचाव पक्ष ने इसे ट्रायल में विलंब भी करार दिया था।
बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि जेल वार्डन शिक्षित व्यक्ति है। सीजेएम कोर्ट में ही उसके बयान दर्ज हुए थे, ऐसे में जो उसने कहा वही दर्ज किया गया था। ऐसे में यदि राम मेहर की अर्जी स्वीकार होती है तो अन्य गवाह भी ऐसी मांग रख सकते हैं।
उनका कहना है कि मामले में पहले ही कई गवाह हो चुके हैं। अगली तारीख में आधा दर्जन आरोपियों के सीआरपीसी 313 के तहत बयान दर्ज होने हैं जिसके बाद केस में बचाव पक्ष बहस करेगा।