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अब दवाएं बनेंगी असरदार, नाइपर मोहाली में नई नैनों तकनीक विकसित
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
Updated Sat, 04 Nov 2017 06:06 PM IST
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- फोटो : सांकेतिक चित्र
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देश के नामी संस्थान नाइपर संस्थान ने एक नैनो तकनीक विकसित की है। इससे दवाओं का मानव शरीर पर जल्द असर होगा। वहीं, दवाओं के साइड इफेक्ट भी कम होंगे। इतना ही नहीं, इस तकनीक का भारत ने बाकायदा पेंटेंट भी करवाया है। यह खुलासा शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में नाइपर के फार्मास्यूटिकल विभाग के एचओडी प्रो. अरविंद कुमार बंसल ने किया। इस मौके पर संस्थान के डायरेक्टर समेत कई अन्य सदस्य मौजूद थे।
प्रो. अरविंद कुमार बंसल ने बताया कि कई दवाएं मनुष्य शरीर में कम असर करती है। जबकि कई के साइड इफेक्ट भी दिखाई देते हैं। लेकिन अब दवाओं को मनुष्य शरीर पर असरदार बनाने के लिए ही नैनो तकनीक विकसित की गई है। इस तकनीक के तहत दवा के छोटे छह क्रिस्टल बनाए गए हैं। जो कि फार्मास्यूटिक्ल एक्सिपिएट में फैले होते हैं। उन्होंने कहा ऐसे में छोटे आकार की दवाओं की कीमत कम और असर अधिक होता है।
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प्रो. अरविंद कुमार बंसल ने बताया कि कई दवाएं मनुष्य शरीर में कम असर करती है। जबकि कई के साइड इफेक्ट भी दिखाई देते हैं। लेकिन अब दवाओं को मनुष्य शरीर पर असरदार बनाने के लिए ही नैनो तकनीक विकसित की गई है। इस तकनीक के तहत दवा के छोटे छह क्रिस्टल बनाए गए हैं। जो कि फार्मास्यूटिक्ल एक्सिपिएट में फैले होते हैं। उन्होंने कहा ऐसे में छोटे आकार की दवाओं की कीमत कम और असर अधिक होता है।
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नई तकनीक से बनी दवाएं अगले साल सितंबर तक आएंगी
नई तकनीक से बनी दवाएं अगले साल सितंबर तक आएंगी
प्रोफेसर अरविंद ने बताया की कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के लिए भी दवाएं नई तकनीक से तैयार की जा रही हैं। इन दवाओं को सितंबर 2018 तक मरीजों के लिए मुहैया करवा दी जाएगी। इस तकनीक का भारत में पेटेंट कराया गया है।
वहीं, नाइपर के निदेशक प्रो. रघुराम राव आक्किनेपल्ली ने कहा कि उनकी कोशिश है की दवाओं की रिसर्च में नाईपर को विश्व का सर्वोत्तम संस्थान बनाया जाए। इससे पहले भी नाइपर ने फार्मास्यूटिकल के साथ-साथ आयुर्वेद के क्षेत्र में भी कदम रख रहा है। किसानों को वैज्ञानिक ढंग के साथ खेती करने के लिए एमओयू भी साइन किया गया है।
देहरादून की कंपनी से साइन किया एमओयू
प्रो. अरविंद ने कहा कि कहा कि उक्त तकनीक भारत में पेटेंट करवाई गई है। इसके और विकास के लिए मेसर्स विल्डास बायोटेक देहरादून के साथ समझौता किया गया है। इस इंडस्ट्री हिस्सेदार को यूएसए व यूरोप में पेेंटेंट फाइल करने को कहा गया है। बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंट काउंसिल ने स्केल अप व फार्मयुलेशन विकास के लिए कई एक योजना ने भी वित्तीय सहायता दी है। इंडस्ट्री हिस्सेदार की फैक्टरी में एक स्प्रे ड्रायर का प्रयोग करके इस तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। साथ ही दवाओं को तैयार किया गया है। इससे यूएस पेटेंट ग्रांट भी मिली है। साथ ही यूरोपियन पेटेंट विचाराधीन है।
प्रोफेसर अरविंद ने बताया की कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के लिए भी दवाएं नई तकनीक से तैयार की जा रही हैं। इन दवाओं को सितंबर 2018 तक मरीजों के लिए मुहैया करवा दी जाएगी। इस तकनीक का भारत में पेटेंट कराया गया है।
वहीं, नाइपर के निदेशक प्रो. रघुराम राव आक्किनेपल्ली ने कहा कि उनकी कोशिश है की दवाओं की रिसर्च में नाईपर को विश्व का सर्वोत्तम संस्थान बनाया जाए। इससे पहले भी नाइपर ने फार्मास्यूटिकल के साथ-साथ आयुर्वेद के क्षेत्र में भी कदम रख रहा है। किसानों को वैज्ञानिक ढंग के साथ खेती करने के लिए एमओयू भी साइन किया गया है।
देहरादून की कंपनी से साइन किया एमओयू
प्रो. अरविंद ने कहा कि कहा कि उक्त तकनीक भारत में पेटेंट करवाई गई है। इसके और विकास के लिए मेसर्स विल्डास बायोटेक देहरादून के साथ समझौता किया गया है। इस इंडस्ट्री हिस्सेदार को यूएसए व यूरोप में पेेंटेंट फाइल करने को कहा गया है। बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंट काउंसिल ने स्केल अप व फार्मयुलेशन विकास के लिए कई एक योजना ने भी वित्तीय सहायता दी है। इंडस्ट्री हिस्सेदार की फैक्टरी में एक स्प्रे ड्रायर का प्रयोग करके इस तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। साथ ही दवाओं को तैयार किया गया है। इससे यूएस पेटेंट ग्रांट भी मिली है। साथ ही यूरोपियन पेटेंट विचाराधीन है।