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हरियाणाः साल 2019 में गरमाई रहेगी सियासत, 5 पार्टियां चुनावी माहौल...और कांटे की टक्कर
Tue, 01 Jan 2019 12:13 PM IST
खुशबू गोयल
विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 01 Jan 2019 12:13 PM IST
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BJP
- फोटो : social media
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नया साल चुनावी वर्ष है। पूरे साल हरियाणा का सियासी माहौल गरम रहेगा। अप्रैल में लोकसभा चुनाव होंगे तो अक्तूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। जनवरी में जींद उपचुनाव होने की घोषणा हो चुकी है। इस साल जनता तय करेगी कि अगले पांच साल प्रदेश में पर कौन राज करेगा। 10 लोकसभा क्षेत्रों से सांसद कौन होंगे। साल 2014 के मुकाबले 2019 में राजनीतिक हालात अलग हैं।
पांच साल पहले जहां केंद्र व राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, वहीं इस बार दोनों जगहों पर भाजपा सत्ता में है। अप्रैल माह में केंद्र सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके बाद चुनाव की तारीख घोषित हो जाएगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने रोहतक, जबकि इनेलो ने हिसार और सिरसा की सीट पर जीत हासिल की थी। बाकी सात सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया था। इस बार प्रदेश में सियासी समीकरण बदल चुके हैं।
इनेलो दो फाड़ हो चुका है, जबकि फरवरी 2016 के दंगों के बाद प्रदेश की सियासत में सक्रिय हुए भाजपा के कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी नई पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच का गठन कर चुके हैं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में कूद चुकी है। वहीं, कांग्रेस पहले की तरह गुटों में बंटी हुई है। पांच साल पहले जहां पूर्व सीएम हुड्डा के नेतृत्व में लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ा गया था, अब प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर हैं।
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पांच साल पहले जहां केंद्र व राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, वहीं इस बार दोनों जगहों पर भाजपा सत्ता में है। अप्रैल माह में केंद्र सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके बाद चुनाव की तारीख घोषित हो जाएगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने रोहतक, जबकि इनेलो ने हिसार और सिरसा की सीट पर जीत हासिल की थी। बाकी सात सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया था। इस बार प्रदेश में सियासी समीकरण बदल चुके हैं।
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इनेलो दो फाड़ हो चुका है, जबकि फरवरी 2016 के दंगों के बाद प्रदेश की सियासत में सक्रिय हुए भाजपा के कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी नई पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच का गठन कर चुके हैं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में कूद चुकी है। वहीं, कांग्रेस पहले की तरह गुटों में बंटी हुई है। पांच साल पहले जहां पूर्व सीएम हुड्डा के नेतृत्व में लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ा गया था, अब प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर हैं।
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भाजपा : मनोहर सपना फिर साकार करने की तैयारी
साल 2014 में भाजपा मोदी लहर पर सवार होकर पहली बार अपने दम पर सत्ता में आई। व्यवस्था में बदलाव के नाम पर जमकर प्रयोग किए। अब 2019 में पार्टी को पहले लोकसभा चुनाव में परीक्षा देनी है। फिर विधानसभा चुनाव में दोबारा मनोहर सपना साकार करना है। सत्ता में आई भाजपा कभी जाट आंदोलन, कभी कर्मचारी आंदोलनों का सामना करती रही। बीच-बीच में बगावत के सुर उठे, लेकिन किसी अंजाम तक नहीं पहुंचे। पहली बार चुनाव लड़कर सीएम बने मनोहर लाल दोबारा से सियासी मैच में बैटिंग के लिए तैयार हैं। पांच निगमों में जीत से पार्टी उत्साहित है, लेकिन असली परीक्षा पहले लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव में होगी।
कांग्रेस: पूर्व सीएम हुड्डा होंगे सीएम का चेहरा या कोई और..
पहले लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद कांग्रेस संघर्ष कर रही है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा जहां जनक्रांति यात्राएं कर रहे हैं, जबकि अशोक तंवर साइकिल यात्राएं निकाल रहे हैं। सियासी हलकों में माना जा रहा है कि कांग्रेस आला कमान पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को अभी खत्म नहीं करेगी। हर नेता के समर्थकों को लगता है कि जिस नेता से वे जुड़े हैं, वही सीएम बन सकता है। चुनाव के बाद किस नेता के कितने समर्थक विधायक चुनकर आते हैं। तब आला कमान विधायकों से बातचीत कर तय करेगा कि कांग्रेस सत्ता में आई तो सीएम का चेहरा कौन होगा।
कांग्रेस: पूर्व सीएम हुड्डा होंगे सीएम का चेहरा या कोई और..
पहले लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद कांग्रेस संघर्ष कर रही है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा जहां जनक्रांति यात्राएं कर रहे हैं, जबकि अशोक तंवर साइकिल यात्राएं निकाल रहे हैं। सियासी हलकों में माना जा रहा है कि कांग्रेस आला कमान पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को अभी खत्म नहीं करेगी। हर नेता के समर्थकों को लगता है कि जिस नेता से वे जुड़े हैं, वही सीएम बन सकता है। चुनाव के बाद किस नेता के कितने समर्थक विधायक चुनकर आते हैं। तब आला कमान विधायकों से बातचीत कर तय करेगा कि कांग्रेस सत्ता में आई तो सीएम का चेहरा कौन होगा।
इनेलो: अभय के कौशल की असली परीक्षा इसी साल
प्रदेश का अहम सियासी दल इनेलो साल 2018 में टूट कर बिखर गया। एक तरफ जहां पुरानी पार्टी पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व में रह गई, जिसके व्यावहारिक कप्तान फिलहाल अभय चौटाला हैं। जबकि अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में जननायक जनता पार्टी भी मैदान में आ गई है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अब अभय चौटाला के कौशल की असली परीक्षा होगी।
जननायक जनता पार्टी: दुष्यंत की पकड़ की भी परीक्षा लेगा वोटर
इनेलो से टूटकर अलग हुए हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला ने जन नायक जनता पार्टी का गठन किया है। विवाद रहा कि इनेलो के अंदर ज्यादातर कार्यकर्ता खासकर युवा दुष्यंत चौटाला को सीएम देखना चाहता है, जबकि उनके चाचा दुष्यंत पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला को फिर से सीएम बनाने की बात करते आए हैं। हालांकि ओपी चौटाला जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में तिहाड़ जेल में हैं। अब फाइनल फैसला 2019 में होगा। पहले लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव में दुष्यंत चौटाला की पकड़ परीक्षा वोटर लेगा।
जननायक जनता पार्टी: दुष्यंत की पकड़ की भी परीक्षा लेगा वोटर
इनेलो से टूटकर अलग हुए हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला ने जन नायक जनता पार्टी का गठन किया है। विवाद रहा कि इनेलो के अंदर ज्यादातर कार्यकर्ता खासकर युवा दुष्यंत चौटाला को सीएम देखना चाहता है, जबकि उनके चाचा दुष्यंत पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला को फिर से सीएम बनाने की बात करते आए हैं। हालांकि ओपी चौटाला जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में तिहाड़ जेल में हैं। अब फाइनल फैसला 2019 में होगा। पहले लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव में दुष्यंत चौटाला की पकड़ परीक्षा वोटर लेगा।
आप: वोटर बताएगा केजरीवाल के नवीन जयहिंद किस अंदाज में कहेंगे
दिल्ली में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया। पार्टी कांग्रेस के बाद दूसरे स्थान पर रही। अब दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का पूरा फोकस हरियाणा पर है। उन्होंने खास मित्र एवं एमडीयू रोहतक के छात्र नेता रहे नवीन जयहिंद को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। देखना है कि आम लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कैसा प्रदर्शन करती है। इसी साल तय होगा कि नवीन कहां खड़े होकर जयहिंद कहेंगे।
लोकतंत्र सुरक्षा मंच: राजकुमार की सियासी दावों की होगी परीक्षा
सत्ता में आते ही मुखर हुए भाजपा के कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी लंबे समय से अलग अंदाज में सियासत कर रहे हैं। यहां तक भाजपा छोड़े बगैर अलग पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच तक का गठन कर लिया। साथ ही एलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ेगी। इसी साल वोटर तय करेगा कि सांसद के दावों में कितना दम है।
लोकतंत्र सुरक्षा मंच: राजकुमार की सियासी दावों की होगी परीक्षा
सत्ता में आते ही मुखर हुए भाजपा के कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी लंबे समय से अलग अंदाज में सियासत कर रहे हैं। यहां तक भाजपा छोड़े बगैर अलग पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच तक का गठन कर लिया। साथ ही एलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ेगी। इसी साल वोटर तय करेगा कि सांसद के दावों में कितना दम है।