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SYL के लिए आया नया सुझाव, ऐसे पहुंचाया जा सकता है सतलुज का पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 26 Dec 2016 10:18 PM IST
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सतलुज यमुना लिंक नहर
- फोटो : फाइल फोटो
एसवाईएल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बावजूद पंजाब-हरियाणा के बीच इस मुद्दे पर तनातनी जारी है। इस बीच इस मुद्दे के हल के लिए प्रजातंत्र के लिए वकील संघ ने अपनी ओर से एक सुझाव तैयार किया है। संघ का सुझाव प्रधानमंत्री को भेज दिया गया है। दावा है कि इस प्रस्ताव पर अमल हुआ तो सतलुज का पानी हिमाचल होते हुए कौशल्या डैम (पिंजौर) तक लाया जा सकता है। प्रस्ताव के तहत यदि नदी का पानी हिमाचल प्रदेश होते हुए भाखड़ा नंगल डैम से हरियाणा की सीमा तक लाया जाता है तो इसकी मौजूदा प्रस्तावित दूरी कम हो जाएगी।
सतलुज के पानी को पंजाब से होकर हरियाणा तक पहुंचाने के लिए 124 किमी लंबी एसवाईएल नहर के निर्माण का कार्य प्रस्तावित है, जो दोनों प्रदेशों के बीच लंबे समय से जारी विवाद का कारण बनी हुई है। ताजा प्रस्ताव के तहत दावा किया गया है कि यदि पानी को हिमाचल प्रदेश के रास्ते हरियाणा तक लाया जाता है तो यह दूरी 57 किमी घटकर 67 किमी रह जाएगी। प्रजातंत्र के लिए वकील संघ के संयोजक जितेंद्र नाथ ने बताया कि जल्द ही उनका एक प्रतिनिधिमंडल पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और मुख्य मंत्रियों से मुुलाकात कर उन्हें अपने सुझाव से अवगत कराएगा।
प्रेस कांफ्रेंस में जितेंद्र नाथ ने बताया कि उनके विकल्प को अपनाने से हरियाणा तक सतलुज का पानी पहुंच सकता है। ऐसा हुआ तो हरियाणा के अलग-अलग हिससों के किसानों को फायदा होगा। पंजाब की जमीन पहले ही उपजाऊ है, जबकि हिमाचल प्रदेश की जमीन जंगल, पहाड़ी या सरकारी है। भाखड़ा डैम हिमाचल प्रदेश में है और पानी का बहाव नीचे की तरफ होने की वजह से हरियाणा को इस रास्ते पानी मुहैया कराना अपेक्षाकृत आसान है। अगर एसवाईएल का निर्माण पंजाब की बजाय हिमाचल प्रदेश के रास्ते सीधे किया जाए, तो सरकार को अधिक खर्च वहन नहीं करना पड़ेगा। बताया कि पंजाब के हिस्से का सतलुज नदी का 43 प्रतिशत पानी अब भी पाकिस्तान जा रहा है।
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सतलुज के पानी को पंजाब से होकर हरियाणा तक पहुंचाने के लिए 124 किमी लंबी एसवाईएल नहर के निर्माण का कार्य प्रस्तावित है, जो दोनों प्रदेशों के बीच लंबे समय से जारी विवाद का कारण बनी हुई है। ताजा प्रस्ताव के तहत दावा किया गया है कि यदि पानी को हिमाचल प्रदेश के रास्ते हरियाणा तक लाया जाता है तो यह दूरी 57 किमी घटकर 67 किमी रह जाएगी। प्रजातंत्र के लिए वकील संघ के संयोजक जितेंद्र नाथ ने बताया कि जल्द ही उनका एक प्रतिनिधिमंडल पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और मुख्य मंत्रियों से मुुलाकात कर उन्हें अपने सुझाव से अवगत कराएगा।
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प्रेस कांफ्रेंस में जितेंद्र नाथ ने बताया कि उनके विकल्प को अपनाने से हरियाणा तक सतलुज का पानी पहुंच सकता है। ऐसा हुआ तो हरियाणा के अलग-अलग हिससों के किसानों को फायदा होगा। पंजाब की जमीन पहले ही उपजाऊ है, जबकि हिमाचल प्रदेश की जमीन जंगल, पहाड़ी या सरकारी है। भाखड़ा डैम हिमाचल प्रदेश में है और पानी का बहाव नीचे की तरफ होने की वजह से हरियाणा को इस रास्ते पानी मुहैया कराना अपेक्षाकृत आसान है। अगर एसवाईएल का निर्माण पंजाब की बजाय हिमाचल प्रदेश के रास्ते सीधे किया जाए, तो सरकार को अधिक खर्च वहन नहीं करना पड़ेगा। बताया कि पंजाब के हिस्से का सतलुज नदी का 43 प्रतिशत पानी अब भी पाकिस्तान जा रहा है।
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