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लघु उद्योगों को हाइटेक बनाएगी ये कवायद
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Jan 2014 06:27 PM IST
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चाहे पेच बनाने वाले हों या फिर वायर का निर्माण करने वाले, अब सब हाइटेक होंगे। सीआईआई नॉर्दर्न रीजन की एमएसएमई पर बनाई गई कमेटी ने नया ट्रेंड सिखाने की योजना तैयार की है।
सीआईआई नॉर्दर्न रीजन की एमएसएमई कमेटी के चेयरमैन रमन सलूजा के अनुसार, एमएसएमई को नई तकनीक का प्रयोग करना और हाइटेक इक्युपमेंट का उपयोग करेंगे।
एक्सपोर्ट मार्केट भी बड़ी है, जिसको कैप्चर करने की आवश्यकता है। सीआईआई के अनुसार,यह सेक्टर ऐसा है, जिससे इंडिया का एक्सपोर्ट बढ़ाया जा सकता है।
यदि वर्ष 2013 को देखें तो एक्सपोर्ट दो फीसदी घट गया है। यह तीन सौ बिलियन रह गया। नेशनल एक्सपोर्ट में एमएसएमई शेयर 36 फीसदी रह गया।
इसीलिए आवश्यकता यह है कि एमएसएमई सेक्टर को इंप्रूव किया जाए। जरूरी यह है कि इंडस्ट्री में रिसर्च और डेवलपमेंट की जाए।
एमएसएमई की स्थिति
करीब .5 फीसदी इंडियन एमएसएमई एक्सपोर्ट में लगे हैं, जबकि यूरोप की बात करें तो वहां पच्चीस फीसदी एसएमई एक्सपोर्ट करते हैं। इनमें से आधे यानी 13 फीसदी विश्वभर में एक्सपोर्ट करते हैं। ताईवान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया के एसएमई की स्थिति बिल्कुल अलग है।
रेडीमेड गारमेंट, लेदर गुड्स हैं बेस्ट
चंडीगढ़ या नॉर्दर्न रीजन के एमएसएमई रेडीमेड गारमेंट, लेदर गुड्स, प्रोसेस्ड फूड, इंजीनियरिंग आइटम, स्पोर्ट्स गुड्स के संग कई प्रोडक्ट तैयार करते हैं।
मसलन जालंधर से दुनियाभर में क्रिकेट का सामान एक्सपोर्ट होता है तो वहीं इसी रीजन के लेदर गुड्स भी विदेश में सप्लाई होते हैं।
इसके अतिरिक्त यदि देखा जाए तो यहां से टेक्सटाइल, एसेसरीज, फार्मस्युटिकल प्रोडक्ट, मशीनरी और मेकेनिकल अप्लायंसेस, स्टील और ऑर्गेनिक केमिकल्स के साथ ही फुटवियर और ट्रेवल गुड्स को भी देखा जा सकता है।
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कास्मेटिक आइटम के संग ही सीमेंट, एजबेस्टस, कारपेट्स को भी बड़े स्तर पर सप्लाई किया जा सकता है।
सीआईआई यह करेगा
1-सीआईआई करवाएगा फाइनेंस की सुविधा उपलब्ध
2-सीआईआई यहां आयोजित करेगा सेमिनार
3-एमएसएमई एक्ट को लागू करवाने की कोशिश करेंगे
4-एमएसएमई की ट्रेनिंग के लिए होंगी स्पेशल वर्कशॉप
5-एक्सपोजर के लिए बड़ी कंपनियों के संग टाईअप
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सीआईआई नॉर्दर्न रीजन की एमएसएमई कमेटी के चेयरमैन रमन सलूजा के अनुसार, एमएसएमई को नई तकनीक का प्रयोग करना और हाइटेक इक्युपमेंट का उपयोग करेंगे।
एक्सपोर्ट मार्केट भी बड़ी है, जिसको कैप्चर करने की आवश्यकता है। सीआईआई के अनुसार,यह सेक्टर ऐसा है, जिससे इंडिया का एक्सपोर्ट बढ़ाया जा सकता है।
यदि वर्ष 2013 को देखें तो एक्सपोर्ट दो फीसदी घट गया है। यह तीन सौ बिलियन रह गया। नेशनल एक्सपोर्ट में एमएसएमई शेयर 36 फीसदी रह गया।
इसीलिए आवश्यकता यह है कि एमएसएमई सेक्टर को इंप्रूव किया जाए। जरूरी यह है कि इंडस्ट्री में रिसर्च और डेवलपमेंट की जाए।
एमएसएमई की स्थिति
करीब .5 फीसदी इंडियन एमएसएमई एक्सपोर्ट में लगे हैं, जबकि यूरोप की बात करें तो वहां पच्चीस फीसदी एसएमई एक्सपोर्ट करते हैं। इनमें से आधे यानी 13 फीसदी विश्वभर में एक्सपोर्ट करते हैं। ताईवान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया के एसएमई की स्थिति बिल्कुल अलग है।
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रेडीमेड गारमेंट, लेदर गुड्स हैं बेस्ट
चंडीगढ़ या नॉर्दर्न रीजन के एमएसएमई रेडीमेड गारमेंट, लेदर गुड्स, प्रोसेस्ड फूड, इंजीनियरिंग आइटम, स्पोर्ट्स गुड्स के संग कई प्रोडक्ट तैयार करते हैं।
मसलन जालंधर से दुनियाभर में क्रिकेट का सामान एक्सपोर्ट होता है तो वहीं इसी रीजन के लेदर गुड्स भी विदेश में सप्लाई होते हैं।
इसके अतिरिक्त यदि देखा जाए तो यहां से टेक्सटाइल, एसेसरीज, फार्मस्युटिकल प्रोडक्ट, मशीनरी और मेकेनिकल अप्लायंसेस, स्टील और ऑर्गेनिक केमिकल्स के साथ ही फुटवियर और ट्रेवल गुड्स को भी देखा जा सकता है।
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कास्मेटिक आइटम के संग ही सीमेंट, एजबेस्टस, कारपेट्स को भी बड़े स्तर पर सप्लाई किया जा सकता है।
सीआईआई यह करेगा
1-सीआईआई करवाएगा फाइनेंस की सुविधा उपलब्ध
2-सीआईआई यहां आयोजित करेगा सेमिनार
3-एमएसएमई एक्ट को लागू करवाने की कोशिश करेंगे
4-एमएसएमई की ट्रेनिंग के लिए होंगी स्पेशल वर्कशॉप
5-एक्सपोजर के लिए बड़ी कंपनियों के संग टाईअप