{"_id":"fc4d12bf3acb5f88cc08100b0143ade8","slug":"new-invention-of-4-students-for-heart-patients","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल के मरीजों के लिए 4 छात्रों की नई खोज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल के मरीजों के लिए 4 छात्रों की नई खोज
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 31 Mar 2014 12:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आर्यंस ग्रुप ऑफ कालेज के विद्यार्थियों द्वारा की गई नई खोज से दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए नई उम्मीद की किरण जागी है।
विज्ञापन
कालेज के जम्मू एवं कश्मीर के इंजीनियरिंग के चार विद्यार्थियों ने कालेज की ही नर्सिंग टीम की मदद से लॉइफ सेविंग ग्लव तैयार किया है। इससे पीड़ित लोगों को समय पर सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी।
रविवार को कालेज द्वारा आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में इस ग्लव की लांचिंग की गई। जिसे फोर्टिस अस्पताल के डायरेक्टर कार्डियोलाजी डॉ. एचके बाली और कालेज के चेयरमैन डॉ. अंशु कटारिया ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर लांच किया।
विज्ञापन
इस ग्लव को जम्मू एवं कश्मीर से विद्यार्थियों शोकत, दानिश, इश्फाक और आदिल ने अध्यापकों की मेंटरशिप के दौरान तैयार किया है। नर्सिंग टीम मैंबर्स रश्पाल, अलीशा और सोनिया ने पूरे प्रोजेक्ट पर काम किया है।
विज्ञापन
डॉ बाली ने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह ग्लव दिल की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए वरदान साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह खोज मेडिकल एवं टेक्नॉलोजी के सहयोग का परिणाम है।
डॉ अंशु कटारिया ने बताया कि यह ग्लव थोड़े-थोड़े समय के बाद पल्स रेट की चेक करता रहेगा। यहीं नही इससे दिल की बीमारी के कारण पल्स रेट में आए असाधारण बदलाव, जोकि मानव सीमा से परे होगा इस ग्लव द्वारा पता लग जाएगा और मरीज के डाक्टर एवं रिश्तेदारों को अपने आप कॉल और एसएमएस भी चला जाएगा।
इससे मरीज को तुरंत सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस ग्लव की कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करने व अंतिम रूप देने के लिए डाक्टरी सलाह भी ली गई थी।
इसकी खोज करने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि यह बैटरी और पॉवर सप्लाई दोनों पर काम करेगा और इसमें एक सिम कार्ड भी होगा, जो जीएसएम पर काम करेगा। इसमें मरीज के रिश्तेदारों एवं डाक्टर का नंबर माइक्रो कंट्रोलर में रिकार्ड होगा। जिसे बदला भी जा सकता है।
प्रोजेक्ट पर कुल 25 हजार रुपये खर्च आया है। इसे पूरे करने में 35-40 दिन लगे। अभी तक तो यह सिस्टम तारों से जुड़ा हुआ है, पर वह इसे वायरलेस बनाने की योजना बना रहे हैं। इस मौके डॉ. कटारिया द्वारा इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने और वायरलेस बनाने के लिए विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की राशि देने का भी ऐलान किया।