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चंडीगढ़ में तेजी से कोरोना बढ़ने के पीछे वायरस का नया रूप
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चंडीगढ़। शहर में कोरोना की दूसरी लहर के घातक होने के पीछे वायरस का डबल म्यूटेंट और यूके स्ट्रेन हैं। इस बात का खुलासा पीजीआई ने जीनोम सिक्वेंसिंग के आधार पर किया है। पीजीआई समेत विश्व के वैज्ञानिकों ने भी माना है कि वायरस के दोनों रूप काफी घातक और जानलेवा हैं। वायरस के ये दोनों रूप काफी तेजी से फैलते हैं।
डबल म्यूटेंट तो शरीर में एंटीबॉडीज को बनने से रोकता है। पीजीआई के निदेशक प्रो. जगतराम ने बताया है कि संस्थान ने 23 कोरोना संक्रमितों के सैंपल नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय योग नियंत्रण केंद्र को भेजे थे। दो दिन पहले उनकी रिपोर्ट आई है, जिसके मुताबिक पांच सैंपलों में वायरस का डबल म्यूटेंट मिला है, जबकि नौ में यूके स्ट्रेन। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी भारत में फैले डबल म्यूटेंट पर चिंता जता चुका है।
क्या है डबल म्यूटेंट वायरस
वायरस अपने आपको जिंदा रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। भारत में मिले डबल म्यूटेंट का नाम बी.1.617 दिया गया है। डबल म्यूटेशन तब होता है, जब वायरस के दो म्यूटेटेड स्ट्रेन मिलते हैं। डबल म्यूटेंट वायरस ई 484क्यू व एल 452 आर के मिलने के प्रभाव से बना है। इसकी पहचान पिछले साल हुई थी। भारत में यह म्यूटेंट सबसे पहले महाराष्ट्र में मिला था।
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डबल म्यूटेंट पर वैक्सीन असरदार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जहां इस वायरस को खतरनाक बताया है, वहीं संगठन ने यह भी दावा किया है कि वायरस के नए रूप पर कोरोना के टीके असरदार हैं। वैक्सीन इसके संक्रमण से लोगों को बचाने में सक्षम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने इसी हफ्ते अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत में अचानक से कोरोना विस्फोट के पीछे का कारण इसका नया वैरिएंट बी.1.617 है। इससे बचने का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। उनके मुताबिक, यह वैरिएंट इतना खतरनाक है कि यह शरीर में एंटीबॉडी बनाने से भी रोकता है और बहुत तेजी से म्यूटेट करता है।
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डबल म्यूटेंट तो शरीर में एंटीबॉडीज को बनने से रोकता है। पीजीआई के निदेशक प्रो. जगतराम ने बताया है कि संस्थान ने 23 कोरोना संक्रमितों के सैंपल नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय योग नियंत्रण केंद्र को भेजे थे। दो दिन पहले उनकी रिपोर्ट आई है, जिसके मुताबिक पांच सैंपलों में वायरस का डबल म्यूटेंट मिला है, जबकि नौ में यूके स्ट्रेन। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी भारत में फैले डबल म्यूटेंट पर चिंता जता चुका है।
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क्या है डबल म्यूटेंट वायरस
वायरस अपने आपको जिंदा रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। भारत में मिले डबल म्यूटेंट का नाम बी.1.617 दिया गया है। डबल म्यूटेशन तब होता है, जब वायरस के दो म्यूटेटेड स्ट्रेन मिलते हैं। डबल म्यूटेंट वायरस ई 484क्यू व एल 452 आर के मिलने के प्रभाव से बना है। इसकी पहचान पिछले साल हुई थी। भारत में यह म्यूटेंट सबसे पहले महाराष्ट्र में मिला था।
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डबल म्यूटेंट पर वैक्सीन असरदार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जहां इस वायरस को खतरनाक बताया है, वहीं संगठन ने यह भी दावा किया है कि वायरस के नए रूप पर कोरोना के टीके असरदार हैं। वैक्सीन इसके संक्रमण से लोगों को बचाने में सक्षम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने इसी हफ्ते अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत में अचानक से कोरोना विस्फोट के पीछे का कारण इसका नया वैरिएंट बी.1.617 है। इससे बचने का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। उनके मुताबिक, यह वैरिएंट इतना खतरनाक है कि यह शरीर में एंटीबॉडी बनाने से भी रोकता है और बहुत तेजी से म्यूटेट करता है।