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Hindi News ›   Chandigarh ›   Netaji 125th Birth Anniversary: How was Azad Hind Fauj Formed, Founded By General Mohan Singh Of Punjab, Azad Hind Fauj ka Gathan

सुभाष चन्द्र बोस जयंती: यूं अस्तित्व में आई आजाद हिंद फौज, पंजाब के जनरल मोहन सिंह ने की थी स्थापना

Sun, 23 Jan 2022 09:30 AM IST
अनुराग सक्सेना हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़ Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sun, 23 Jan 2022 09:30 AM IST
सार

जनरल मोहन सिंह का कहना था कि मातृभूमि की आजादी के लिए एक अलग सेना की बहुत जरूरत है, जो अंग्रेजों की सैनिक ताकत का मुकाबला कर सके। इसके लिए उन्होंने जापान से मदद हासिल करने का सुझाव भी नेताजी के सामने रखा था। फौज के तिरंगे झंडे में दौड़ते हुए शेर का चित्र अंकित किया गया, जो फौज की वीरता का प्रतीक था।

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Netaji 125th Birth Anniversary: How was Azad Hind Fauj Formed, Founded By General Mohan Singh Of Punjab, Azad Hind Fauj ka Gathan
सुभाष चंद्र बोस (फाइल फोटो) - फोटो : गूगल

विस्तार

भारत जब 40 और 50 के दशक में अंग्रेजों की पराधीनता से बाहर निकलने के लिए कड़ी जद्दोजहद कर रहा था, तब आजाद हिंद फौज की स्थापना में पंजाबियों ने बहुमूल्य योगदान दिया। पंजाब के जनरल मोहन सिंह ने 15 दिसंबर 1941 को आजाद हिंद फौज की स्थापना की और बाद में 21 अक्तूबर 1943 को उन्होंने इस फौज का नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया। इसके साथ ही नेताजी को आजाद हिंद फौज का सर्वोच्च सेनापति भी घोषित कर दिया गया।

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जनरल मोहन सिंह का कहना था कि मातृभूमि की आजादी के लिए एक अलग सेना की बहुत जरूरत है, जो अंग्रेजों की सैनिक ताकत का मुकाबला कर सके। इसके लिए उन्होंने जापान से मदद हासिल करने का सुझाव भी नेताजी के सामने रखा था। फौज के तिरंगे झंडे में दौड़ते हुए शेर का चित्र अंकित किया गया, जो फौज की वीरता का प्रतीक था।

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एक ओर जहां आजाद हिंद फौज को तीन ब्रिगेड सुभाष ब्रिगेड, गांधी ब्रिगेड और जवाहर ब्रिगेड के साथ-साथ महिला रेजिमेंट को लक्ष्मीबाई रेजिमेंट नाम दिया गया, वहीं नेताजी की फौज में निचले स्तर पर सैनिकों की भर्ती का पहला अभियान पंजाब में ही शुरू किया गया, जिसे जनरल हरबख्श सिंह ने संभाला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आजाद हिंद फौज की इस पहली भर्ती में पंजाब से अधिकतर किसानों और नौकरीपेशा लोगों ने अपनी सेवाएं प्रस्तुत कीं और देश की आजादी के लिए आजाद हिंद फौज की वर्दी पहनकर जंग में उतर गए। बाद में जापान के युद्ध बंदी भी इस सेना का हिस्सा बन गए क्योंकि जापान का मानना था कि भारतीय भी अंग्रेजों की गुलामी झेल रहे हैं।

दिल्ली में कैदखाने के बाहर लोग लगाते थे इंकलाब के नारे

इस संबंध में आल इंडिया डिफेंस ब्रदरहुड के अध्यक्ष रिटायर्ड ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह काहलों से जब चर्चा की गई तो उन्होंने इतिहास के कुछ पन्ने पलटते हुए बताया कि आजाद हिंद फौज की स्थापना का विचार सबसे पहले जनरल मोहन सिंह के मन में आया था। फिर भी इस सेना के गठन में जनरल मोहन सिंह के साथ रास बिहारी बोस और पंजाब से निरंजन सिंह गिल भी अहम भूमिका में रहे। हालांकि उन्होंने कहा कि आजाद हिंद फौज में अधिकारी और सैनिक स्तर पर कितने पंजाबी थे, इसका विस्तृत विवरण मिल पाना संभव नहीं है क्योंकि नेताजी की इस सेना के बारे में जो भी तथ्य एकत्र किए गए, वह देश की आजादी के बाद ही संभव हो सका।

उन्होंने बताया कि आरंभ में इस सेना में 16,000 से अधिक सैनिक भर्ती हुए जिनकी संख्या बाद में तेजी से बढ़ी और 80,000 को पार कर गई थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आजाद हिंद फौज को अंग्रेजों के खिलाफ जंग में पीछे हटना पड़ा। इस दौरान आजाद हिंद फौज के मुख्य सेनानी कर्नल सहगल, कर्नल ढिल्लों जोकि पंजाब प्रांत से संबंधित थे, समेत कई अधिकारियों के विरुद्ध अंग्रेजों ने राजद्रोह का मुकदमा चलाया। जनरल मोहन सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। इन सभी को दिल्ली में कैद रखा गया। ब्रिगेडियर काहलों बताते हैं कि दिल्ली में जिस जगह आजाद हिंद के बहादुरों को कैद रखा गया था, वहां भीतर से आने वाली आवाजों को बाहर भी इतना समर्थन मिलता था कि उस कैद खाने के बाहर से आते-जाते लोग भी इंकलाब के नारे लगाते हुए गुजरते थे।

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