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नवजोत सिद्धू ने बढ़ाई मुश्किलें, राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जाने से किया इंकार, मांगा ये पद

Thu, 20 Jun 2019 12:23 AM IST
खुशबू गोयल हर्ष सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 20 Jun 2019 12:23 AM IST
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Navjot Sidhu Rejected to Accept National secretary General Post, Want to be Punjab State President
Navjot Singh Sidhu - फोटो : ANI

पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना मानकर नया विभाग ज्वाइन करने की हामी तो जरूर भरी थी लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनकी मूंछ की लड़ाई बदस्तूर जारी है।

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विभाग बदले जाने से नाराज सिद्धू किसी भी स्तर पर कैप्टन से खुद को कम आंके जाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने आलाकमान को स्पष्ट कर दिया है कि वे नया विभाग संभालने को तैयार हैं लेकिन उन्हें इसके साथ ही प्रदेश में कोई बड़ी जिम्मेदारी भी दी जाए।
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इनमें पहले तो उन्होंने डिप्टी सीएम पद की मांग की लेकिन यह पद न मिलता देख अब नई मांग रख दी है कि प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद उन्हें दिया जाए। इससे साफ है कि सिद्धू किसी भी कीमत पर कैप्टन के साथ अपनी जंग को खत्म करने को तैयार नहीं हैं। 
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राहुल और प्रियंका से मिलने के बाद सिद्धू की चुप्पी से यही कयास लगाए जाने लगे थे कि आलाकमान ने सिद्धू और कैप्टन के बीच तनातनी का निपटारा कर दिया है और सिद्धू जल्द बिजली विभाग का कार्यभार संभाल लेंगे। लेकिन एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। 

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पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना मानकर नया विभाग ज्वाइन करने की हामी तो जरूर भरी थी लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनकी मूंछ की लड़ाई बदस्तूर जारी है। विभाग बदले जाने से नाराज सिद्धू किसी भी स्तर पर कैप्टन से खुद को कम आंके जाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने आलाकमान को स्पष्ट कर दिया है कि वे नया विभाग संभालने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें इसके साथ ही प्रदेश में कोई बड़ी जिम्मेदारी भी दी जाए।

इनमें पहले तो उन्होंने डिप्टी सीएम पद की मांग की लेकिन यह पद न मिलता देख अब नई मांग रख दी है कि प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद उन्हें दिया जाए। इससे साफ है कि सिद्धू किसी भी कीमत पर कैप्टन के साथ अपनी जंग को खत्म करने को तैयार नहीं हैं। राहुल और प्रियंका से मिलने के बाद सिद्धू की चुप्पी से यही कयास लगाए जाने लगे थे कि आलाकमान ने सिद्धू और कैप्टन के बीच तनातनी का निपटारा कर दिया है और सिद्धू जल्द बिजली विभाग का कार्यभार संभाल लेंगे। लेकिन एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

दरअसल, सिद्धू ने लोकल बाडीज विभाग वापस लिए जाने को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। उनका मानना है कि कैप्टन ने विभाग बदलकर कैबिनेट में उनका कद घटाया है। उधर, सिद्धू और आलाकमान के बीच चल रही कशमकश पर कैप्टन ने भी चुप्पी साध ली है और वे सिद्धू के खिलाफ भी कोई टिप्पणी नहीं कर रहे।

बात नहीं बनी

पार्टी आलाकमान के सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिलने पर सिद्धू की पहली मांग यही रही कि उनसे वापस लिया गया विभाग लौटाया जाए। उन्होंने कैप्टन द्वारा लगाए गए उन आरोपों को पार्टी अध्यक्ष के सामने भी खारिज किया कि जिसमें कैप्टन ने लोकसभा चुनाव के दौरान सिद्धू के बठिंडा में दिए गए भाषण और लोकल बाडीज की खराब कार्यप्रणाली के चलते शहरों से कांग्रेस को कम वोट मिलने की बात कही थी।

सिद्धू अपनी सफाई में राहुल के पास पूरा डाटा लेकर पहुंचे थे लेकिन बात बनी नहीं। राहुल और प्रियंका ने उन्हें नया विभाग संभालने की हिदायत ही दी। इस पर सिद्धू ने नए विभाग के साथ डिप्टी सीएम के पद की मांग रखी, लेकिन उसे भी राहुल ने स्वीकार नहीं किया।

प्रदेश अध्यक्ष बन ताकत हासिल करना चाह रहे सिद्धू:
हालांकि राहुल और प्रियंका ने सिद्धू को राष्ट्रीय राजनीति में लाने का भरोसा देते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव का ओहदा देने की पेशकश भी रखी। लेकिन पता चला है कि सिद्धू ने एक बार फिर आलाकमान से गुजारिश की है कि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की बजाए पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद सौंप दिया जाए ताकि वे प्रदेश कांग्रेस के लिए काम कर सकें। उल्लेखनीय है कि सुनील जाखड़ ने गुरदासपुर संसदीय चुनाव में हार के बाद आलाकमान को प्रदेशाध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा भेज दिया था। लेकिन कैप्टन और पंजाब के अन्य कांग्रेस नेताओं ने आलाकमान से सिफारिश की है कि जाखड़ को ही प्रदेशाध्यक्ष बनाए रखा जाए।

हरियाणा की लड़ाई से राहुल पहले ही परेशान:
राहुल गांधी हरियाणा अध्यक्ष की जंग को लेकर पहले ही परेशान हैं। उधर सिद्धू ने पंजाब में भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी की मांग रख कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। हरियाणा में आलाकमान यह विवाद विधानसभा चुनाव से पहले निपटाना चाह रहा है। अब सिद्धू की प्रदेश अध्यक्ष की डिमांड के बाद कांग्रेस में खेमेबाजी बढ़नी स्वाभाविक है।
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