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ध्यान दें: बच्चों को साइबर क्राइम से बचाना है तो अपनाए ये तरीका, सुरक्षित रहेंगे
योगेंद्र त्रिपाठी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 03 Dec 2017 05:32 PM IST
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Cyber crime
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Jio के आगमन के बाद से देश में इंटरनेट सर्फिंग यूजर्स में गजब की बढ़ौतरी हुई है और उसी तेजी से साइबर क्राइम भी बढ़ा है, जिसका सबसे ज्यादा शिकार नाबालिग बच्चे होते हैं। बच्चों में लगातार क्राइम बढ़ता जा रहा है। इसके बाद भी लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
चंडीगढ़ के एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे लगातार सोशल मीडिया में बंधकर रह गए हैं। एकल परिवार बढ़ गए हैं, परिजन उन पर नजर नहीं रख पा रहे हैं। इस कारण सोशल मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं हो पाया है। इस कारण रयान स्कूल गुरुग्राम जैसा प्रदुम्न हत्याकांड की घटना चंडीगढ़ में हो सकती है। इसलिए शहर में लोगों को अपने बच्चों को समय देना चाहिए, जिससे कि वह उनकी बात जान सकें और शहर को क्राइम फ्री बनाया जा सके।
यह कहना है लोगों का
बच्चों को स्मार्ट फोन न दें
शहर के स्कूलाें में जिस तरह से फोन बैन कर दिया गया है। अभिभावकों की यह जिम्मेवारी बनती है कि बच्चों को सोशल मीडिया का उपयोग अपने सामने करने दें। बच्चे गलत वेबसाइट का उपयोग न करें। इसलिए कंप्यूटर का कंट्रोल अपने पास मोबाइल पर रखे। बच्चों को आज नार्मल फोन भले दे दिए जाएं। चंडीगढ़ में माता पिता दोनों वर्किंग हैं। परिवार भी एकल हैं। इस कारण पैरेंट्स उन्हें ध्यान नहीं दे पा रहे। बच्चों पर ध्यान उन्हें देना होगा जिससे कि इस तरह की घटना न हो।
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- हरजिंदर कौर, चेयरपर्सन, सीसीपीसीआर
स्कूलों में बच्चे आ रहे मोबाइल फोन लेकर
शहर के प्राईवेट और सरकारी स्कूलों में फोन लेकर आना मना है। स्टूडेंट्स स्मार्ट फोन लेकर आ रहे हैं। इसके बाद इनकी कोई जांच नहीं हो रही है। स्मार्ट फोन पर बच्चे गलत वेबसाइट देखते हैं। इस पर सर्कुलर निकालने के अलावा शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। स्मार्ट फोन आज केसमय में बहुत खतरनाक है। इसलिए इनका प्रयोग बंद होना चाहिए
स्वर्ण सिंह कंबोज ,प्रेसीडेंट , यूटी कैडर एजुकेशनल इंप्लाइज यूनियन
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चंडीगढ़ के एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे लगातार सोशल मीडिया में बंधकर रह गए हैं। एकल परिवार बढ़ गए हैं, परिजन उन पर नजर नहीं रख पा रहे हैं। इस कारण सोशल मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं हो पाया है। इस कारण रयान स्कूल गुरुग्राम जैसा प्रदुम्न हत्याकांड की घटना चंडीगढ़ में हो सकती है। इसलिए शहर में लोगों को अपने बच्चों को समय देना चाहिए, जिससे कि वह उनकी बात जान सकें और शहर को क्राइम फ्री बनाया जा सके।
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यह कहना है लोगों का
बच्चों को स्मार्ट फोन न दें
शहर के स्कूलाें में जिस तरह से फोन बैन कर दिया गया है। अभिभावकों की यह जिम्मेवारी बनती है कि बच्चों को सोशल मीडिया का उपयोग अपने सामने करने दें। बच्चे गलत वेबसाइट का उपयोग न करें। इसलिए कंप्यूटर का कंट्रोल अपने पास मोबाइल पर रखे। बच्चों को आज नार्मल फोन भले दे दिए जाएं। चंडीगढ़ में माता पिता दोनों वर्किंग हैं। परिवार भी एकल हैं। इस कारण पैरेंट्स उन्हें ध्यान नहीं दे पा रहे। बच्चों पर ध्यान उन्हें देना होगा जिससे कि इस तरह की घटना न हो।
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- हरजिंदर कौर, चेयरपर्सन, सीसीपीसीआर
स्कूलों में बच्चे आ रहे मोबाइल फोन लेकर
शहर के प्राईवेट और सरकारी स्कूलों में फोन लेकर आना मना है। स्टूडेंट्स स्मार्ट फोन लेकर आ रहे हैं। इसके बाद इनकी कोई जांच नहीं हो रही है। स्मार्ट फोन पर बच्चे गलत वेबसाइट देखते हैं। इस पर सर्कुलर निकालने के अलावा शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। स्मार्ट फोन आज केसमय में बहुत खतरनाक है। इसलिए इनका प्रयोग बंद होना चाहिए
स्वर्ण सिंह कंबोज ,प्रेसीडेंट , यूटी कैडर एजुकेशनल इंप्लाइज यूनियन
सामाजिक तौर पर नहीं हो रहा स्टूडेंट्स का विकास
cyber crime
स्टूडेंट्स पर पैरेंट्स रखें नजर
स्कूल में हम सर्कुलर निकालकर पैरेंट्स को जागरूक कर रहे हैं। स्कूल के अलावा बच्चों को गेम में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जाए। माता पिता को बच्चों को समय देना होगा। सही तरीके से बच्चों की देखरेख की जानी चाहिए।
डा. परमिंदर दुग्गल, प्रिंसिपल , अंकुर स्कूल, सेक्टर - 14
सामाजिक तौर पर नहीं हो रहा स्टूडेंट्स का विकास
आज स्टूडेंट्स सोशल मीडिया पर ही बडे़ हो रहे हैं। उनका सामाजिक विकास नहीं हो पा रहा है। इस कारण वह जिस परिवेश को देखते हैं उसे खुद पर अप्लाई करने लगते हैं। माता पिता बच्चे को जैसे जैसे बडे़ हों उन्हें समाज का ज्ञान दे, जिससे कि वह डेवलप हो सके। सोशल मीडिया के फेर से निकल सके और एक आदर्श नागरिक बन सकें।
मंजीत सिंह , सीनियर प्रोफेसर , समाजशास्त्र विभाग
सोशल मीडिया के उपयोग से दूर रखें
अभिभावक अपने बच्चे का फेसबुक अकाउंट उसे खुद बनाकर दे देते हैं। वह बच्चे का ज्ञान बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन बच्चे की देखरेख नहीं कर पाते हैं। इस कारण कई बार बच्चे गलत वेबसाइट के फेर में फंसकर जान भी दे दते हैं। इस कारण इस पर नजर रखना बहुत जरुरी है।
- नितिन गोयल, प्रेसीडेंट, चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन
स्कूल में हम सर्कुलर निकालकर पैरेंट्स को जागरूक कर रहे हैं। स्कूल के अलावा बच्चों को गेम में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जाए। माता पिता को बच्चों को समय देना होगा। सही तरीके से बच्चों की देखरेख की जानी चाहिए।
डा. परमिंदर दुग्गल, प्रिंसिपल , अंकुर स्कूल, सेक्टर - 14
सामाजिक तौर पर नहीं हो रहा स्टूडेंट्स का विकास
आज स्टूडेंट्स सोशल मीडिया पर ही बडे़ हो रहे हैं। उनका सामाजिक विकास नहीं हो पा रहा है। इस कारण वह जिस परिवेश को देखते हैं उसे खुद पर अप्लाई करने लगते हैं। माता पिता बच्चे को जैसे जैसे बडे़ हों उन्हें समाज का ज्ञान दे, जिससे कि वह डेवलप हो सके। सोशल मीडिया के फेर से निकल सके और एक आदर्श नागरिक बन सकें।
मंजीत सिंह , सीनियर प्रोफेसर , समाजशास्त्र विभाग
सोशल मीडिया के उपयोग से दूर रखें
अभिभावक अपने बच्चे का फेसबुक अकाउंट उसे खुद बनाकर दे देते हैं। वह बच्चे का ज्ञान बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन बच्चे की देखरेख नहीं कर पाते हैं। इस कारण कई बार बच्चे गलत वेबसाइट के फेर में फंसकर जान भी दे दते हैं। इस कारण इस पर नजर रखना बहुत जरुरी है।
- नितिन गोयल, प्रेसीडेंट, चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन
सुविधाएं देने के अलावा नजर रखें
साइबर क्राइम
- फोटो : self
बच्चों की काउंसलिंग सही होनी चाहिए
शहर के स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग होनी चाहिए। हर महीने अगर स्टूडेंट्स की काउंसलिंग स्कूल में होगी तो बच्चों की मनोदशा का पता चल जाएगा। इससे वह गलत रास्ते पर नहीं जा सकेंगे। इससे सही रास्ते पर लाने का प्रयास समय रहते किया जा सकता है। सोशल मीडिया का सही प्रयोग स्टूडेंट्स करें इसके लिए घर वाले पूरी तरह नजर रखें।
प्रोफेसर रोशनलाल, मनोविज्ञान विभाग , पीयू
सुविधाएं देने के अलावा नजर रखें
आजकल अभिभावक बच्चें को सुविधाएं देने के लिए कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल उपलब्ध करवाते हैं। लेकिन इसके बाद वह उन पर वह नजर नहीं रख पाते हैं। इस कारण वह गलत वेबसाइट के चक्कर में फंसकर अपराधी प्रवृत्ति के बन जाते हैं। इस पर नियंत्रण होना चाहिए तभी वह एक सही दिशा में चल सकेंगे।
प्रमोद शर्मा , युवसत्ता, कोआर्डिनेटर
यह है एनसीआरबी की रिपोर्ट में सच
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट बताती है कि शहर में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। वर्ष 2016 में 69 बलात्कार पीड़ित होने के मामले सामने आए हैं। इसमें 41 नाबालिग थे। इनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया है कि शहर में जो लोग बलात्कार की घटना में शामिल हैं उनमें 29 लोग जानने वाले, 12 पड़ोसी, 11 शादी का वादा कर, सात रिलेटिव और चार अनजान लोग शामिल हैं। इसमें तीन लोग करीबी रिश्तेदार हैं। एक लिव इन पार्टनर है। एक इंप्लाई एंड उसकी को वर्कर है।
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट बताती है कि शहर में बच्चे सुरक्षित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में 69 बलात्कार पीड़ितों में 41 नाबालिग थे। जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। शहर के एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज शहर में एकल परिवार बढ़ गए हैं। इस कारण बच्चों को ध्यान अधिक नहीं दिया जा रहा है। बच्चे सोशल मीडिया में तेजी से उपयोग कर रहे है। इस दौरान वहां पर वह गलत चीजों की सीख लेने लगते है जिससे कि वह रास्ते से भटक रहे हैं।
शहर के स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग होनी चाहिए। हर महीने अगर स्टूडेंट्स की काउंसलिंग स्कूल में होगी तो बच्चों की मनोदशा का पता चल जाएगा। इससे वह गलत रास्ते पर नहीं जा सकेंगे। इससे सही रास्ते पर लाने का प्रयास समय रहते किया जा सकता है। सोशल मीडिया का सही प्रयोग स्टूडेंट्स करें इसके लिए घर वाले पूरी तरह नजर रखें।
प्रोफेसर रोशनलाल, मनोविज्ञान विभाग , पीयू
सुविधाएं देने के अलावा नजर रखें
आजकल अभिभावक बच्चें को सुविधाएं देने के लिए कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल उपलब्ध करवाते हैं। लेकिन इसके बाद वह उन पर वह नजर नहीं रख पाते हैं। इस कारण वह गलत वेबसाइट के चक्कर में फंसकर अपराधी प्रवृत्ति के बन जाते हैं। इस पर नियंत्रण होना चाहिए तभी वह एक सही दिशा में चल सकेंगे।
प्रमोद शर्मा , युवसत्ता, कोआर्डिनेटर
यह है एनसीआरबी की रिपोर्ट में सच
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट बताती है कि शहर में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। वर्ष 2016 में 69 बलात्कार पीड़ित होने के मामले सामने आए हैं। इसमें 41 नाबालिग थे। इनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया है कि शहर में जो लोग बलात्कार की घटना में शामिल हैं उनमें 29 लोग जानने वाले, 12 पड़ोसी, 11 शादी का वादा कर, सात रिलेटिव और चार अनजान लोग शामिल हैं। इसमें तीन लोग करीबी रिश्तेदार हैं। एक लिव इन पार्टनर है। एक इंप्लाई एंड उसकी को वर्कर है।
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट बताती है कि शहर में बच्चे सुरक्षित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में 69 बलात्कार पीड़ितों में 41 नाबालिग थे। जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। शहर के एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज शहर में एकल परिवार बढ़ गए हैं। इस कारण बच्चों को ध्यान अधिक नहीं दिया जा रहा है। बच्चे सोशल मीडिया में तेजी से उपयोग कर रहे है। इस दौरान वहां पर वह गलत चीजों की सीख लेने लगते है जिससे कि वह रास्ते से भटक रहे हैं।
यह है स्थिति
CYBER CRIME
यह है स्थिति
उम्र ----------------- रेप पीड़ित
0 से छह वर्ष के बीच -------2 केस
छह से बारह वर्ष के बीच -----4 केस
12 से 16 वर्ष के बीच -------18 केस
16 से 18 वर्ष के बीच -------17 केस
18 से 30 वर्ष के बीच -------21 केस
30 से 45 वर्ष के बीच --------6 केस
60 वर्ष के बीच ------------1 केस
उम्र ----------------- रेप पीड़ित
0 से छह वर्ष के बीच -------2 केस
छह से बारह वर्ष के बीच -----4 केस
12 से 16 वर्ष के बीच -------18 केस
16 से 18 वर्ष के बीच -------17 केस
18 से 30 वर्ष के बीच -------21 केस
30 से 45 वर्ष के बीच --------6 केस
60 वर्ष के बीच ------------1 केस