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म्यूजिक के संग हावभावों से यूं दिखा अशक्तों का हुनर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 10 May 2014 02:43 PM IST
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म्यूजिक व हावभावों के जरिए अशक्त बच्चों ने ऐसी अनोखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया कि दर्शकों ने स्टैंडिंग ओवेशन दिया। यह नजारा था पंजाब कला भवन का, जहां कुछ अशक्त बच्चे मंच पर एक नाटक 'स्टोन सूप फॉर सोल' का मंचन कर रहे थे।
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भूख लगी हो तो कुछ भी अच्छा लगता है। ऐसा ही कुछ था नाटक 'स्टोन सूप फॉर सोल' में। वाटिका स्पेशल स्कूल के 30 बच्चों ने नाटक स्टोन सूप फॉर सोल का मंचन किया।
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चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित इस नाटक का निर्देशन दिल्ली के फेसलीटेटर ग्रुप पर्पल मैंगो की सदस्य सुमेधा शर्मा और निवेदिता सोनी ने किया।
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नाटक की कहानी शुरू होती है तीन दोस्तों से। तीनों एक यात्रा में निकले हैं। तीनों जंगल से गुजरते हैं तो बहुत ही कठिनाइयों का सामना करते हैं। यह कठिनाइयां नाटक में हास्य भी पैदा करती है। यात्रा के दौरान तीनों को बहुत भूख लगती है और खाने की आस में वह एक गांव में पहुंचते हैं।
गांव के लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं होता यह देख तीनों को बहुत निराशा होती है। तभी एक दोस्त को ख्याल आता है कि क्यों न पत्थर का सूप बनाया जाए। तीनों दोस्त खाने की तैयारी करते है। धीरे धीरे सभी गांव वाले तीनों दोस्तों की मदद को आ जाते है और सभी तरह के मिर्च मसाले में ले आते हैं।
अंत में तीनों दोस्तों पत्थर को फेंक गांव वालों को जो सूप पिलाते है वह सभी को पसंद आता है। क्योंकि कलाकार बोलने में अक्षम थे इसलिए म्यूजिक और हाव भाव से ही नाटक को चलाया गया। नाटक में न सुन पाने की स्थिति में भी कलाकारों का आपस में तालमेल बहुत सटीक था।
स्टेज पर लाइव म्यूजिक ने सभी दृश्यों में जान डाली। पहले कुछ दृश्यों के लिए हाफ स्टेज का इस्तेमाल किया गया और गांव के सीन के लिए पूरे स्टेज का। नाटक के अंत में घर की खिड़की पर स्पेशल लाइट्स इफेक्ट बेहतरीन रहें।
नाटक में कोई संवाद नहीं थे इसलिए दर्शकों का ध्यान हटना आम बात थी, लेकिन नाटक के दौरान कलाकारों ने बीच बीच में अपनी साइन लैंग्वेज को दर्शकों को समझाया।
कलाकारों ने थैंक्यू और आईडिया को साइन लैंग्वेज में किस तरह बोला जाए यह भी बताया। नाटक के अंत में दर्शकों ने स्टैंडिंग ऑवेशन से सभी कलाकारों का सम्मान किया और हाथ खड़े करके सबको बहुत अच्छा है का साइन दिया।