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‘द कलाउंस क्राई फोर द मून’ ने बच्चों को खूब रिझाया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 13 Apr 2014 02:32 PM IST
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आमतौर पर नाटक के दौरान स्टेज पर जब कोई कलाकार किरदार निभाता है तो वह दर्शकों की ओर से कोई शोर नहीं चाहता। इससे उसकी एकाग्रता भंग होती है। लेकिन टैगोर थिएटर में हुए नाटक ‘द कलाउंस क्राई फोर द मून’ में किरदार खुद दर्शकों से बात करते नजर आए और दर्शक प्रतिक्रिया देते रहे।
यह नाटक चंडीगढ़ संगीत नाटक कला अकादमी आयोजित किया गया। इसमें अभिनय किया दिल्ली के खिलौना ग्रुप ने। विनोद शर्मा द्वारा निर्देशित इस नाटक की अवधि एक घंटा पंद्रह मिनट रही।
नाटक की शुरुआत में रंगीन लाइटों के बीच एक जोकर पेश होता है जो बहुत भूखा है। वह चांद को रोटी समझ खाने की कोशिश करता है। इतने में चांद को पसंद करने वाली गुड़िया जोकर को चांद खाने से मना करती है। वह उसे कहती है कि घर से उसके लिए कुछ खाने को लाएगी।
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जब गुड़िया खाना लेकर आती है तो रास्ते में उसे कुछ भूखे लोग मिलते हैं। वह उन्हें खाना दे देती है और अंत में जोकर के लिए कुछ नहीं बचता।
नाटक के इतने हिस्से के बाद निर्देशक विनोद शर्मा ने दर्शकों में से कुछ बच्चों को बुलाकर उन्हें किरदार निभाने को कहा और उन्होंने निभाया भी। इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है और अंत में जोकर को रोटी का टुकड़ा दर्शकों से ही मिलता है।
नाटक में बच्चों की कहानियों से संबंधित किरदार जैसे हंप्टी-डंप्टी, स्केयर्ड क्रो, मगरमच्छ और बंदर की कहानी, सपाइडरमैन और चालाक लोमड़ी को इस्तेमाल किया इससे बच्चे नाटक से ज्यादातर जुड़े रहे।
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यह नाटक चंडीगढ़ संगीत नाटक कला अकादमी आयोजित किया गया। इसमें अभिनय किया दिल्ली के खिलौना ग्रुप ने। विनोद शर्मा द्वारा निर्देशित इस नाटक की अवधि एक घंटा पंद्रह मिनट रही।
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नाटक की शुरुआत में रंगीन लाइटों के बीच एक जोकर पेश होता है जो बहुत भूखा है। वह चांद को रोटी समझ खाने की कोशिश करता है। इतने में चांद को पसंद करने वाली गुड़िया जोकर को चांद खाने से मना करती है। वह उसे कहती है कि घर से उसके लिए कुछ खाने को लाएगी।
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जब गुड़िया खाना लेकर आती है तो रास्ते में उसे कुछ भूखे लोग मिलते हैं। वह उन्हें खाना दे देती है और अंत में जोकर के लिए कुछ नहीं बचता।
नाटक के इतने हिस्से के बाद निर्देशक विनोद शर्मा ने दर्शकों में से कुछ बच्चों को बुलाकर उन्हें किरदार निभाने को कहा और उन्होंने निभाया भी। इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है और अंत में जोकर को रोटी का टुकड़ा दर्शकों से ही मिलता है।
नाटक में बच्चों की कहानियों से संबंधित किरदार जैसे हंप्टी-डंप्टी, स्केयर्ड क्रो, मगरमच्छ और बंदर की कहानी, सपाइडरमैन और चालाक लोमड़ी को इस्तेमाल किया इससे बच्चे नाटक से ज्यादातर जुड़े रहे।