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‘बड़े भाई साहब’ और 'गुरदक्षिणा' में दिखा अद्भुत हुनर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 30 May 2014 03:47 PM IST
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फूल्स पैराडाइज द्वारा चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में मुंशी प्रेम चंद की कहानी बड़े भाई साहब और दीनदयाल वर्मा की कहानी गुरुदक्षिणा का मंचन किया गया। पंजाब कला भवन के ओपन एयर थिएटर में मंचित नाटक बड़े भाई साहब दो भाइयों की कहानी है।
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इसमें बड़ा भाई छोटे भाई को हमेशा पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करता रहता है। बड़ा भाई फेल होता रहता है। एक दिन छोटा भाई सोचता है कि वह खेलने कूदने के बावजूद हमेशा पास हो जाता है और बड़ा भाई इतना पढ़ने के बावजूद फेल होता रहता है। वह बड़े भाई की बात को मानने से इंकार कर देता है। हमेशा ही खेलने कूदने लगता है।
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एक दिन बड़ा भाई उसको समझाता है कि बेशक वह फेल होता रहता है लेकिन जिंदगी का तजुर्बा उसका कहीं ज्यादा है। इस कहानी की समाप्ति होती है छोटे और बड़े भाई के वार्तालाप से। जिसमें छोटा भाई आखिरकार मानता है कि बड़ा जो कह रहा है वह ठीक है।
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इस नाटक में बड़े भाई का किरदार निभाया है दिनेश बैंस ने और छोटे भाई का किरदार निभाया है अर्श ने। दूसरा नाटक गुरुदक्षिणा दीनदयाल वर्मा की कहानी पर आधारित है।
इसमें दिखाया गया है कि एकलव्य को अपना शिष्य बनाने से इंकार करने के बाद जब द्रोणाचार्य एकलव्य की तीरंदाजी में निपुणता देखते हैं को अपने प्रिय शिष्य अर्जुन को दिए वचन का मान रखने के लिए द्रोणाचार्य एकलव्य से उसका अंगूठा गुरुदक्षिणा में मांग लेते हैं।