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'तमाशा मोटियां दा' देखना है तो आज पहुंचें कला भवन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 06 Jun 2014 02:37 PM IST
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पंजाबी मूवी एंड थिएटर अकादमी द्वारा पंजाब कला भवन के आडिटोरियम में तमाशा मोटियां दा और नवां जन्म का आयोजन किया जाएगा। इस नाटक के निर्देशक दलजीत सिंह हैं।
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प्रेस कांफ्रेंस में दलजीत सिंह ने बताया कि तमाशा मोटियां दा गुरशरण सिंह की कहानी पर आधारित है। इस नाटक की कहानी एक पुलिस इंस्पेक्टर पर आधारित है।
यह एक शहर के पुलिस थाने में थानेदार है। पुलिस गैरकानूनी काम करने वालों से अच्छी रकम वसूलती है। नाटक के शुरू होते ही पुलिस कप्तान की ओर से ऐलान होता है कि जिसको तरक्की चाहिए वह वजन घटाए।
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इस ऐलान को सुनकर थानेदार परेशान हो जाते हैं। वह अपनी पत्नी से कहता है कि पतला होने के टिप्स दे वरना उसकी नौकरी में तरक्की नहीं होगी। पत्नी कहती है कि शराब और कबाब सब छोड़ दे और दौड़ने लगो, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाता। पत्नी योग बताती है, लेकिन वह योग से भी पतला नहीं होता। आखिरकार हारकर वह थाने जाता है और शपथ लेता है कि अब न रिश्वत लेगा न दारू पिएगा।
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दलजीत सिंह ने बताया कि दूसरा नाटक नवां जन्म है जो एक निम्न जाति के व्यक्ति की कहानी है जो गांव का लागी है। कहानी में दिखाया गया है कि किस तरह से इस व्यक्ति के संग गांव का सरपंच भेदभाव करता है। यह हर किसी की खुशी और गमी की खबर उनके रिश्तेदारों को देने का काम करता है।
इस कमाई से वह अपने बेटे बिल्लू को पढ़ाता है। वह चाहता है कि अच्छी नौकरी पर लग जाए। उसका बेटा बड़ा होकर नौकरी पर लग जाता है और अच्छी कमाई करता है, लेकिन पिता अपना काम नहीं छोड़ता है।
एक समारोह के लिए उसका पिता सरपंच को बुलाता है, लेकिन सरपंच उनके नीची जाति के होने के कारण नहीं आता। इस नाटक का मंचन छह जून को शाम सात बजे किया जाएगा।