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मुरथल कांड: हाईकोर्ट ने आंदोलन के दौरान दर्ज सभी FIR की मांगी रिपोर्ट

Thu, 02 Jun 2016 05:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 02 Jun 2016 05:35 PM IST
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murthal rape scandle: High Court seeks report of FIR registered during jat movement
हाईकोर्ट - फोटो : file photo

मुरथल कांड की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आंदोलन के दौरान दर्ज सभी FIR की रिपोर्ट मंगवाई है। दरअसल हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में कथित गैंगरेप मामले की सुनवाई कर रही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को आंदोलन के दौरान घटी घटनाओं का विवेचन करने का फैसला लिया है।

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हाईकोर्ट ने एक ओर तो हरियाणा सरकार को प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट के गोपनीय हिस्से को सीलबंद कर अदालत को सौंपने के निर्देश दिए, वहीं राज्य के सभी इलाका मजिस्ट्रेटों को निर्देश जारी कर कहा कि वे अपने जिलों में आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज की गई सभी एफआईआर का ब्योरा और उन पर अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करें। हाईकोर्ट ने इलाका मजिस्ट्रेटों को दिए निर्देश में कहा कि सभी इलाका मजिस्ट्रेट एफआईआर संबंधी ब्योरे की रिपोर्ट संबंधित जिले के सीजेएम को सौंप दें और सीजेएम उन रिपोर्टों की समीक्षा करके हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल करें। हाईकोर्ट का कहना है कि इससे मुरथल समेत सभी स्थानों पर आरक्षण आंदोलन के दौरान स्थिति का आकलन हो सकेगा। मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी।
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प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का दूसरा भाग पेश करने के निर्देश
मुरथल मामले की सुनवाई बुधवार को जैसे ही शुरू हुई, जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस गुरमीत राम की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई पर प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का दूसरा भाग कोर्ट में पेश करें। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रिपोर्ट का दूसरा भाग इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली से संबंधित है और यह गोपनीय है। इस पर बैंच ने सरकार को कहा कि वह रिपोर्ट के इस भाग को सीलबंद कर कोर्ट में पेश करे।
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सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने जाट आरक्षण आंदोलन में अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के नेतृत्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट का केवल एक भाग ही कोर्ट को सौंपा गया था। बुधवार को अदालत ने कहा कि मुरथल केस के कारण जाट आरक्षण से जुड़े अन्य मामलों की अनदेखी नहीं की जा सकती। बैंच ने आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज की गई 2120 एफआईआर के बारे में संबंधित जिलों के इलाका मजिस्ट्रेटों को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए। बैंच 4 जुलाई को सीजेएम से मंगाई गई रिपोर्ट देखने के बाद इस मामले में आगे दिशा निर्देश जारी करेगा।

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