{"_id":"570f36154f1c1bf27c4a6af9","slug":"murthal-gangrape-advocate-utsav-bains-jat-andolan-jat-reservation-murthal-sonipat-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुरथल गैंगरेप: डीजीपी, एडीजीपी और डीआईजी राजश्री को सस्पेंड किया जाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुरथल गैंगरेप: डीजीपी, एडीजीपी और डीआईजी राजश्री को सस्पेंड किया जाए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Thu, 14 Apr 2016 11:48 AM IST
विज्ञापन
मुरथल गैंगरेप
- फोटो : file
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में महिलाओं से कथित दुराचार के मामले को उजागर करने वाले एडवोकेट उत्सव बैंस ने कहा है कि हरियाणा
विज्ञापन
के डीजीपी और एडीजीपी का ट्रांसफर किया जाना ही काफी नहीं है बल्कि इन अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने मुरथल मामले की जांच को गठित कमेटी
की पूर्व इंचार्ज राजश्री सिंह को भी निलंबित करने की मांग की।
बुधवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने डीजीपी और एडीजीपी को केंद्र सरकार के दबाव के चलते ही हटाया है
विज्ञापन
क्योंकि मुरथल मामले में पीड़ितों की शिकायतें दबाने के बावजूद सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जिस तरह के पीड़ितों की शिकायतें छिपाईं,
विज्ञापन
यह डीजीपी, एडीजीपी और सोनीपत के एसपी के खिलाफ सीधे-सीधे डिस्ट्रक्शन आफ एविडेंस का मामला बनता है। उन्होंने कहा कि खेतों से मिले महिलाओं के
अंडरगारमेंट को भी आदिवासी महिलाओं के बताकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में जारी इस मामले में अब तक यह बात साफ हो गई है कि पुलिस ने मामले को जानबूझकर दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार
की ओर से इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की इंचार्ज रही डीआईजी राजश्री सिंह ने हाईकोर्ट में झूठा एफिडेविट दिया कि उन्हें कोई पीड़ित नहीं मिला, जबकि
ममता सिंह की ओर से दायर एफिडेविट ने यह साबित कर दिया है कि 2 मार्च को फरीदाबाद की युवती और 5 मार्च को एनआरआई महिला ने अपनी शिकायत पुलिस को
भेज दी थी। एडवोकेट बैंस ने कहा कि वे जल्द ही डीआईजी राजश्री के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना का मामला दाखिल करेंगे।
एडवोकेट बैंस ने कहा कि दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ से कई महिला संगठनों ने मिलकर मुरथल मामले की जांच की मांग की थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को गुमराह करते हुए पुलिस के आला अफसरों ने गलत रिपोर्ट सौंपी। लेकिन अब मामला खुल जाने के बाद साफ हो गया कि पुलिस अफसरों ने प्रदेश सरकार के अलावा हाईकोर्ट और पीएमओ को भी अंधेरे में रखा।
उधर, मुरथल मामले में यह बात भी सामने आई है कि सोनीपत के एसपी ने जांच रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी थी। इस मामले में एडीजीपी सीआईडी को कोई जिम्मेदारी नहीं दी
गई थी। इसलिए एडीजीपी सीआईडी की ओर से इस मामले में डीजीपी को कोई रिपोर्ट नहीं दी गई।
मुरथल मामले की पहले ही जांच कर रही है एसआईटी : डीजीपी
नवनियुक्त डीजीपी केपी सिंह ने कहा कि पुलिस की छवि को और बेहतर करने लिए पुरस्कार व सजा की नीति को तर्कसंगत बनाया जाएगा। पुलिस अधिकारियों और
जवानों के बीच सामंजस्य बढ़ाया जाएगा। सामाजिक संगठनों के सहयोग से पुलिस समाज में भाईचारा को बनाए रखने की दिशा में कदम बढ़ाएगी। डीजीपी ने मुरथल मामले
में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि इसके लिए एसआईटी का गठन किया जा चुका है।