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ठेका कर्मचारियों को नगर पालिका देंगी वेतन
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Nov 2013 09:28 PM IST
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हरियाणा में नगर पालिकाओं और नगर निगमों में आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत नियुक्त किए गए सफाई कर्मचारी अब ठेका प्रणाली से मुक्त हो जाएंगे।
मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक, एक जनवरी से इस सफाई कर्मचारियों को अब वेतन सीधे नगर पालिकाएं ही देंगी। यह जानकारी शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक विकास गुप्ता ने दी।
उन्होंने बताया कि नगर पालिकाओं को अपने-अपने क्षेत्र में आबादी के हिसाब से मंजूर सफाई कर्मचारियों के पदों का ब्योरा तीन दिन में देने के लिए कहा गया है ताकि उसमें समय रहते संशोधन किया जा सके।
ब्योरे में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की मौजूदा संख्या और स्वीकृत पदों की संख्या बताने के लिए भी कहा गया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में लगे सफाई कर्मचारियों को ठेकेदारी प्रथा से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
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उन्होंने बताया कि सफाई मजदूर नियम के अनुसार 200 व्यक्तियों की जनसंख्या पर एक सफाई कर्मचारी होना चाहिए।
हरियाणा में पांच लाख के कार्यों के लिए ई-टेंडर
प्रदेश में अब नगर पालिकाओं में पांच लाख रुपए और इससे अधिक लागत के कार्यों के लिए ई-टेंडर के जरिए टेंडर मंजूर करने होंगे।
यह प्रक्रिया दिसंबर माह से लागू हो जाएगी। सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि इससे टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और पक्षपात की संभावनाएं खत्म होंगी।
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मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक, एक जनवरी से इस सफाई कर्मचारियों को अब वेतन सीधे नगर पालिकाएं ही देंगी। यह जानकारी शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक विकास गुप्ता ने दी।
उन्होंने बताया कि नगर पालिकाओं को अपने-अपने क्षेत्र में आबादी के हिसाब से मंजूर सफाई कर्मचारियों के पदों का ब्योरा तीन दिन में देने के लिए कहा गया है ताकि उसमें समय रहते संशोधन किया जा सके।
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ब्योरे में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की मौजूदा संख्या और स्वीकृत पदों की संख्या बताने के लिए भी कहा गया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में लगे सफाई कर्मचारियों को ठेकेदारी प्रथा से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
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उन्होंने बताया कि सफाई मजदूर नियम के अनुसार 200 व्यक्तियों की जनसंख्या पर एक सफाई कर्मचारी होना चाहिए।
हरियाणा में पांच लाख के कार्यों के लिए ई-टेंडर
प्रदेश में अब नगर पालिकाओं में पांच लाख रुपए और इससे अधिक लागत के कार्यों के लिए ई-टेंडर के जरिए टेंडर मंजूर करने होंगे।
यह प्रक्रिया दिसंबर माह से लागू हो जाएगी। सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि इससे टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और पक्षपात की संभावनाएं खत्म होंगी।