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इस शख्स ने बनाई 'शांति' गन, दंगाइयों को मारेगी थप्पड़, खास स्याही से होगी सबकी पहचान

Wed, 04 Sep 2019 02:31 AM IST
ajay kumar अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 04 Sep 2019 02:31 AM IST
सार

  • मोहाली के साइंटिस्ट ने बनाई रबड़ की गोली छोड़ने वाली गन।
  • गोली पर लगी स्याही से हो सकेगी दंगा करने वालों की पहचान।
  • गोली लगने से शरीर पर होगा थप्पड़ की चोट जितना अहसास। 
  • वातावरण में आएगी चमेली लैवेंडर और चंदन की खुशबू।

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Mohali's Scientist Made Unique Gun
प्रोफेसर डॉ. सम्राट घोष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दंगाइयों से निपटने के लिए मोहाली के एक साइंटिस्ट ने नायाब गन बनाई है। इसकी मदद से उनकी पहचान करना आसान हो जाएगा। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) के प्रोफेसर डॉ. सम्राट घोष ने ऐसी गन बनाई है, जिससे स्याही लगी रबड़ की गोली निकलेगी। इससे शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होगा और स्याही के कारण उनकी पहचान आसानी से हो जाएगी। 

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हां, गोली लगते ही दंगाइयों को थप्पड़ की चोट जितना अहसास जरूर होगा। खास बात यह है कि इस गन के चलने पर पर्यावरण में चमेली, लैवेंडर, चंदन, लैमन ग्रास की खूशबू फैल जाएगी। साइंटिस्ट डॉ. घोष ने बताया कि उन्होंने इस गननुमा डिवाइस को ‘शांति’ नाम दिया है। क्योंकि दंगे में शामिल लोग कोई दुश्मन नहीं होते हैं। बल्कि अपने देश के नागरिक होते हैं। 
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वहीं, सुरक्षा एजेंसियां भी अपनी होती हैं। ऐसे में कोशिश यही थी कि इसी बहाने शांति की जाए। यह गन मेक इन इंडिया मुहिम के तहत बनाई गई। इसमें प्लास्टिक की खाली बोतलों और आसानी से घर में मिलने वाले सामान का प्रयोग किया गया है। वहीं, जो इसमें रबड़ की गोलियां प्रयोग की हैं, वह नोएडा की एक कंपनी से उन्होंने मंगवाई है।

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यूं लगेगा जैसे चली हो असली गोली

उन्होंने बताया कि जब यह गन चलेगी तो उसकी आवाज एक असली गन की तरह ही आएगी। इससे लोगों में एकदम दहशत मच जाएगी। लेकिन असली गन में प्रयोग होने वाले छर्रों की अपेक्षा इससे नुकसान कम होता है। क्योंकि छर्रे तेजी से निकलते हैं और शरीर को नुकसान भी पहुंचाते हैं। उन्होंने यह गन शॉक एंड अ प्रोसेस पर बनाई है। 

छह महीने में तैयार की है गन

घोष ने बताया कि इस गन को तैयार करने में करीब छह महीने का समय लगा है। दो महीने गन को असेंबलिंग में लगे हैं। क्योंकि गन में कलर और रबड़ का एक साथ प्रयोग आसान नहीं था। यह करीब पचास मीटर तक एरिया कवर पाएगी। वहीं, इसका रंग बिखरेगा नहीं। उन्हें उम्मीद है कि यह प्रयोग पूरी तरह से कामयाब रहेगा। इसकी जानकारी केंद्र सरकार को भेज दी गई है। साथ ही गुजारिश की गई है कि इसे सुरक्षा एजेंसियों में शामिल करें। 

प्लास्टिक का सही प्रयोग, लोगों को रोजगार

डॉ घोष ने बताया कि इसी बहाने जो प्लास्टिक की बोतलें बेकार हो जाती हैं। लोगों द्वारा गली नालियों में फेंक दी जाती हैं। उससे सीवरेज व ड्रेनेज की लाइन खराब होती है। इस तकनीक से उनका भी सही प्रयोग होगा। इसी बहाने लोगों को रोजगार मिलेगा। वह आसपास कबाड़ इकट्ठा करने वाले कई लोगों से ऐसी बोतलें खरीदते थे।

यह खोज भी है इनके नाम

इससे पहले डॉ. सम्राट घोष पॉल्यूशन फ्री पटाखे बनाकर सुर्खियों में आए थे। उनके इन पटाखों को केंद्र सरकार ने भी खूब सराहा था। इसके बाद उन्होंने फायर सेफ्टी उपकरण तैयार किया था। जिसे कोई भी आसानी से प्रयोग कर सकता है। इसके अलावा पानी को प्यूरीफाई करने फार्मूला भी तैयार कर चुके हैं।

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