हरियाणा: मनरेगा श्रमिकों को दोगुने से ज्यादा मिलेगा रोजगार, 1000 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य
- रजिस्ट्रियों के काम में आएगी रफ्तार, मंगलवार से सुबह 9 से शाम 5 बजे तक होंगी रजिस्ट्री
- सीएम मनोहर लाल ने ली मनरेगा की समीक्षा बैठक, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दी जानकारी
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हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि हालात सामान्य करने के साथ-साथ प्रदेश सरकार राजस्व को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक गतिविधियों को वापस पटरी पर ला रही है। एक हजार करोड़ रुपये के बजट के साथ मनरेगा के जरिए इस वर्ष बड़े पैमाने पर विकास कार्य करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की सहायता से राज्य को मजबूती मिलेगी। वह सीएम मनोहर लाल के मनरेगा की समीक्षा बैठक लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बीते पांच सालों में हर साल मनरेगा के जरिये 350 से 450 करोड़ रुपये तक के काम करवाए जाते रहे हैं लेकिन इस साल लक्ष्य है कि नए कामों को शामिल कर 1000 करोड़ का रोजगार मनरेगा के तहत देंगे। स्कूलों में निर्माण, नदियों की सफाई, वन विभाग के काम और पौधे लगाने आदि में इस वर्ष मनरेगा मजदूरों की मदद ली जाएगी।
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उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों में और रियायत मिलने से धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और इससे प्रदेश का राजस्व भी बढ़ेगा। पिछले एक सप्ताह में आबकारी विभाग को 300 से 350 करोड़ रुपये के बीच का राजस्व प्राप्त हुआ। इसी तरह तहसीलों व उप-तहसीलों में शुरू की गई रजिस्ट्री प्रक्रिया के माध्यम से प्रदेश को करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।
मंगलवार से रजिस्ट्रियों की समय-सारिणी व संख्या में इजाफा कर दिया है। रजिस्ट्रियां सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खोलने का आदेश जारी किया है ताकि जनता के कामकाज सुचारू होने के साथ-साथ प्रदेश का राजस्व बढ़े। जिला उपायुक्तों को अधिकार दिया गया है कि वे अपने यहां बाजार और व्यावसायिक गतिविधियां शुरु करने पर योजना बनाएं और लागू करें।
राज्य में आधारभूत ढांचा विकसित कर नए उद्योगों को लाने पर भी सरकार गंभीरता से काम कर रही है, ताकि शिक्षित और प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ें। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़ने और उद्योगों के शुरू होने से इस महीने के अंत तक संतोषजनक राजस्व आने लगेगा। साथ ही केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता भी अहम रहेगी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों का पलायन एक गंभीर विषय है और लोग भावनाओं में वशीभूत होकर घरों की ओर जा रहे हैं। इस स्थिति को स्वीकार करना पड़ेगा कि ज्यादातर मजदूर एक बार घर जाकर ही कुछ महीनों बाद वापस आएंगे। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि राज्य सरकार इसके लिए तैयार है और उद्योगों के लिए कामगारों की कमी नहीं रहने दी जाएगी।