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Hindi News ›   Chandigarh ›   Minister Nitin Gadkari Rally in Rohtak

पाकिस्तान जा रहा पंजाब की नदियों का पानी हरियाणा, राजस्थान को देंगे: गडकरी

Tue, 27 Mar 2018 11:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Tue, 27 Mar 2018 11:36 AM IST
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Minister Nitin Gadkari Rally in Rohtak
मंत्री नीतिन गडकरी
जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सतलुज, व्यास और रावी का पाकिस्तान जा रहा पानी रोककर हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को दिया जाएगा। इस तरह सतलुज यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) का नाम लिए बिना ही वह 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हरियाणा की पानी की राजनीति को नई हवा दे गए। गडकरी रोहतक में सोमवार को तृतीय एग्री लीडरशिप समिट-2018 के समापन पर किसानों को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि सिंधु जल समझौते के तहत तीन नदियां (रावी, व्यास और सतलुज) भारत के हिस्से में आईं। इनका जो पानी अब भी पाकिस्तान जाता है उसे रोककर हरियाणा और राजस्थान के किसानों को दिया जाएगा। रावी व्यास और सतलुज का पानी यमुना में लाया जाएगा। उत्तराखंड में तीन बांध बनाए जाएंगे। इस योजना पर अमल के बाद हरियाणा और राजस्थान के किसानों के पास पानी की कमी नहीं रहेगी।
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घोषणा को एसवाईएल से जोड़ना ठीक नहीं : धनखड़
गडकरी की घोषणा के संबंध में जब प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ से पूछा गया कि क्या एसवाईएल को पूरा कर पंजाब की नदियों का पानी यमुना में लाया जाएगा तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री की बात को एसवाईएल से जोड़ना ठीक नहीं है। गडकरी की पूरी योजना अभी कांसेप्ट स्तर पर है। इसके निर्माण में मान लिया जाए कि 10 वर्ष लगेंगे तो हरियाणा सरकार एसवाईएल को शुरू करने के लिए इतना वक्त नहीं रुक सकती। सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलते ही हरियाणा सरकार एसवाईएल पर तुरंत काम शुरू कर देगी। इसमें कोई संदेह नहीं है। यह जरूर है कि नई योजना के शुरू होने पर हरियाणा को अतिरिक्त पानी मिलेगा।
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क्या है सिंधु जल संधि
वर्ल्ड बैंक की मध्यस्था में भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था। 19 सितंबर 1960 को कराची में दोनों राष्ट्रप्रमुखों ने इसपर हस्ताक्षर किये। इसके मुताबिक सिंधु, जेहलम और चिनाब का सारा पानी पाकिस्तान को जाएगा तथा सतलुज, व्यास और रावी का सारा पानी भारत को मिलेगा। पाकिस्तान को दस साल की छूट देते हुए भारत को 1970 से अपने हिस्से आई नदियों का सारा पानी पाकिस्तान जाने से रोककर खुद इस्तेमाल करना था। इसी पर अमल करते हुए भारत ने अपनी नदियों को आपस में लिंक करने की योजना बनाई। रावी को व्यास से जोड़ा जाना था। व्यास को सतुलज से टनल के जरिये जोड़ा गया। सतलुज को यमुना से जोड़ कर पानी देश के सूखे हिस्सों राजस्थान और हरियाणा को देना था।


एसवाईएल विवाद
सतलुज से यमुना को जोड़ने के लिए एसवाईएल नहर के निर्माण की योजना बनी। मगर पंजाब ने इसका विरोध कर दिया। 8 अप्रैल 1982 को पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच संशोधित समझौते के मुताबिक पंजाब का पानी का शेयर 4.22 एमएएफ (मिलियन एकड़ फुट) बढ़ा दिया गया। राजस्थान को 8.6 एमएएफ, हरियाणा को 17.17 एमएएफ और दिल्ली को 0.2 एमएएफ पानी दिया जाना था। पंजाब की ओर से एसवाईएल का विरोध जारी है और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
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