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डेयरी संचालक की बेटी विश्व की सबसे ऊंची चोटी फतेह कर लौटी
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल(हरियाणा)
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:04 PM IST
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हरियाणा की बेटी सीमा गोस्वीमी ने फतेह की माउंट एवरेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
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पहले ममता सौदा, अब कैथल के एक डेयरी संचालक की बेटी सीमा गोस्वामी ने माउंट एवरेस्ट फतेह कर नाम रोशन किया है। वे एवरेस्ट फतेह करने के बाद मंगलवार सांय कैथल पहुंची। जहां महाराणा प्रताप चौक पर शहर के गणमान्य लोगों ने सीमा का अभिनंदन किया।
सीमा गोस्वामी से पहले कैथल की बेटी ममता सौढ़ा माउंट एवरेस्ट फतेह कर चुकी हैं। उन्हें हरियाणा सरकार ने बाद में डीएसपी नियुक्त किया था। अपने मिशन में सीमा गोस्वामी एवरेस्ट फतेह करने के बाद वापिसी में बीमार होने के चलते फंस गई थीं। भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई मदद के बाद उनकी वतन वापिसी हो सकी।
सीमा पिछले साल व उससे पहले भी माउंट एवरेस्ट फतेह के लिए गई थीं। लेकिन पिछले साल आए भूकंप के कारण उनकी मुश्किल से जान बची थी। वे वापिस लौट आई थीं। लेकिन मन में सफलता का जो जज्बा था, उसकी बदौलत सीमा आखिरकार माउंट एवरेस्ट फतेह करने में सफल रही।
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कैथल पहुंचने पर सीमा ने बताया कि उसने 20 मई की सुबह 7.53 बजे तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया है। सीमा ने बताया कि आज उन्हें बहुत खुशी हो रही है, उसने जो सपना देखा था, वह पूरा हो गया है। अपनी सफलता का श्रेय सीमा ने अपने माता-पिता, सहायता करने वाले लोगों व हरियाणा सरकार को दिया है।
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सीमा गोस्वामी से पहले कैथल की बेटी ममता सौढ़ा माउंट एवरेस्ट फतेह कर चुकी हैं। उन्हें हरियाणा सरकार ने बाद में डीएसपी नियुक्त किया था। अपने मिशन में सीमा गोस्वामी एवरेस्ट फतेह करने के बाद वापिसी में बीमार होने के चलते फंस गई थीं। भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई मदद के बाद उनकी वतन वापिसी हो सकी।
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सीमा पिछले साल व उससे पहले भी माउंट एवरेस्ट फतेह के लिए गई थीं। लेकिन पिछले साल आए भूकंप के कारण उनकी मुश्किल से जान बची थी। वे वापिस लौट आई थीं। लेकिन मन में सफलता का जो जज्बा था, उसकी बदौलत सीमा आखिरकार माउंट एवरेस्ट फतेह करने में सफल रही।
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कैथल पहुंचने पर सीमा ने बताया कि उसने 20 मई की सुबह 7.53 बजे तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया है। सीमा ने बताया कि आज उन्हें बहुत खुशी हो रही है, उसने जो सपना देखा था, वह पूरा हो गया है। अपनी सफलता का श्रेय सीमा ने अपने माता-पिता, सहायता करने वाले लोगों व हरियाणा सरकार को दिया है।
ऑक्सीजन खत्म होने पर आई परेशानियां
हरियाणा की बेटी सीमा गोस्वीमी ने फतेह की माउंट एवरेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
सीमा ने बताया कि झंडा फहराकर जब वह वापिस कैंप की तरफ लौट रही थी तो आक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया। उसे सांस लेने में काफी परेशानी होनी लगी, पांव सूज गए थे और तेज बुखार हो गया। सभी साथी उससे आगे निकल गए थे और उसने घनी ठंड के बीच पहाड़ पर बिना टैंट व पानी के एक रात गुजारी।
सुबह होने पर उसे एक बैग मिला, जिसमें 2 आक्सीजन सिलेंडर थे। उसमें से सिर्फ एक में आक्सीजन थी। जिसे लगाकर उसकी जान बच पाई। अगली सुबह बचाव दल हेलीकाप्टर लेकर उसके पास पहुंचा और उसे नीचे बेस कैंप में लेकर पहुंचे। तबीयत अधिक खराब होने पर उसे काठमांडू के अस्पताल में दाखिल करवाया गया और वहां पर उसका 10 दिनों तक इलाज चला। उसे पहाड़ से नीचे लाने, हेलीकाप्टर व अन्य का खर्च 10 लाख रुपये आया।
उसमें से 4 लाख रुपये तो उन्होंने उसका कम कर दिया। बाकी के 6 लाख न मिलने के कारण उसे वतन वापिसी में परेशानी आई। जिसकी सूचना मिलने पर भारत सरकार ने ये 6 लाख रुपये अदा किए। वह हरियाणा सरकार, खासकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज व भारतीय दूतावास की आभारी हैं। जिन्होंने नेपाल सरकार से बातचीत कर उसकी भारत लाने में मदद की।
सुबह होने पर उसे एक बैग मिला, जिसमें 2 आक्सीजन सिलेंडर थे। उसमें से सिर्फ एक में आक्सीजन थी। जिसे लगाकर उसकी जान बच पाई। अगली सुबह बचाव दल हेलीकाप्टर लेकर उसके पास पहुंचा और उसे नीचे बेस कैंप में लेकर पहुंचे। तबीयत अधिक खराब होने पर उसे काठमांडू के अस्पताल में दाखिल करवाया गया और वहां पर उसका 10 दिनों तक इलाज चला। उसे पहाड़ से नीचे लाने, हेलीकाप्टर व अन्य का खर्च 10 लाख रुपये आया।
उसमें से 4 लाख रुपये तो उन्होंने उसका कम कर दिया। बाकी के 6 लाख न मिलने के कारण उसे वतन वापिसी में परेशानी आई। जिसकी सूचना मिलने पर भारत सरकार ने ये 6 लाख रुपये अदा किए। वह हरियाणा सरकार, खासकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज व भारतीय दूतावास की आभारी हैं। जिन्होंने नेपाल सरकार से बातचीत कर उसकी भारत लाने में मदद की।
सीमा को डीएसपी का पद देने की मांग
हरियाणा की बेटी सीमा गोस्वीमी ने फतेह की माउंट एवरेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
सीमा गोस्वामी का कैथल पहुंचने पर सीवन व कैथल शहर के लोग मानस रोड पर एकत्रित हो गए थे। उन्होंने सीमा का कैथल पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया। इस दौरान सीवन के पूर्व सरपंच सतीश मुंजाल, संदीप सैनी, पाला राम सैनी, गोस्वामी समाज के प्रधान लाभ गिरी, राजेंद्र गिरी, अतर सिंह मलिक, राजबीर गिरी, गांव गदली से महिलाओं के साथ पहुंची बहन शशी गोस्वामी ने सरकार से मांग की है कि सीमा गोस्वामी को भी ममता सौदा की तरह डीएसपी का पद देकर सम्मानित किया जाए।
ममता सौदा को बनाया गया था डीएसपी
इससे पूर्व कैथल की बेटी ममता सौदा ने माउंट एवरेस्ट फतेह किया था। उन्हें तत्कालीन हरियाणा सरकार ने डीएसपी बनाया था। इसके बाद अब सीमा को भी डीएसपी बनाने की मांग उठने लगी है।
तीसरी बार में हासिल हुई सफलता
यह सीमा की लगन ही थी कि उसे तीसरी बार में यह सफलता हासिल हुई। सीमा ने बताया कि वर्ष 2014 में वह मिशन पर गई थी, लेकिन आर्थिक अभाव के चलते वापिस लौट आई। दूसरी बार भूकंप के कारण मिशन अधूरा छोड़ना पड़ा। वहां बर्फ में दब जाने के बाद मुश्किल से जान बची थी। तीसरी बार के प्रयास में वह सफल रही।
साधारण परिवार से सीमा ने कर दिखाया बड़ा कारनामा
सीमा के पिता ओमप्रकाश सीवन में डेयरी चलाते हैं। उनकी मां बिमला देवी गृहिणी हैं। परिवार में वे पांच बहनें व एक भाई है। सीमा की तीन बड़ी बहनों व भाई का विवाह हो चुका है। सीमा की छोटी बहन कुसुम गोस्वामी एमएम इकोनोमिक्स में पढ़ रही हैं। सीमा अब ऑफिसर बनना चाहती है। उसने एमए फिजिकल की है। साधारण परिवार संबंध रखने वाली सीमा ने लगन व जज्बे से सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
ममता सौदा को बनाया गया था डीएसपी
इससे पूर्व कैथल की बेटी ममता सौदा ने माउंट एवरेस्ट फतेह किया था। उन्हें तत्कालीन हरियाणा सरकार ने डीएसपी बनाया था। इसके बाद अब सीमा को भी डीएसपी बनाने की मांग उठने लगी है।
तीसरी बार में हासिल हुई सफलता
यह सीमा की लगन ही थी कि उसे तीसरी बार में यह सफलता हासिल हुई। सीमा ने बताया कि वर्ष 2014 में वह मिशन पर गई थी, लेकिन आर्थिक अभाव के चलते वापिस लौट आई। दूसरी बार भूकंप के कारण मिशन अधूरा छोड़ना पड़ा। वहां बर्फ में दब जाने के बाद मुश्किल से जान बची थी। तीसरी बार के प्रयास में वह सफल रही।
साधारण परिवार से सीमा ने कर दिखाया बड़ा कारनामा
सीमा के पिता ओमप्रकाश सीवन में डेयरी चलाते हैं। उनकी मां बिमला देवी गृहिणी हैं। परिवार में वे पांच बहनें व एक भाई है। सीमा की तीन बड़ी बहनों व भाई का विवाह हो चुका है। सीमा की छोटी बहन कुसुम गोस्वामी एमएम इकोनोमिक्स में पढ़ रही हैं। सीमा अब ऑफिसर बनना चाहती है। उसने एमए फिजिकल की है। साधारण परिवार संबंध रखने वाली सीमा ने लगन व जज्बे से सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है।