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रक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता- खतरनाक है चीन की बीआरआई परियोजना, छोटे देश बन रहे हैं शिकार
Sat, 19 Dec 2020 03:14 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 19 Dec 2020 03:14 AM IST
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पिछले तीन दशक से चीन तेजी से अपना रणनीतिक विस्तार कर रहा है और सड़कों के निर्माण पर खास जोर दे रहा है। चीन में रणनीतिक बदलाव भी तेजी से देखने को मिल रहा है। इसमें चीन का बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) काफी अहम है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ मौजूदा परिवेश में भारत के लिए सही नहीं मानते। इसी तरह के कई पहलुओं पर रक्षा विशेषज्ञों ने शुक्रवार शाम को मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में चर्चा की। चर्चा में चीन की विस्तारवादी नीति और बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) विषय पर रक्षा विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी।
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पैनल चर्चा में रक्षा विशेषज्ञ व पूर्व भारतीय राजदूत गुरजीत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल पीएम बाली और ब्रिगेडियर प्रवीण बद्रीनाथ मौजूद रहे जबकि मेजर जनरल अमृतपाल सिंह ने संचालन किया। लेफ्टिनेंट जनरल बाली ने कहा कि पिछले तीन दशकों के दौरान चीन का रणनीतक विस्तार देखने को मिला है, जिसने दुनिया की अर्थव्यवस्था के हिसाब से भौगोलिक क्षेत्र में बदलाव करना शुरू कर दिया है।
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पूर्व भारतीय राजदूत गुरजीत सिंह ने कहा कि ब्रिटिश काल के दौरान चीन तिब्बत से घिरा हुआ था, परंतु अब कनेक्टिविटी और प्रौद्योगिकी स्वरूप दुनिया समतल हो गई है। चीनी बड़ी संख्या में रेल पटरी, बंदरगाह, हवाई अड्डों का जाल फैला रहा है। तेजी से सड़कों का निर्माण कर रहा है। चीन अपने प्रभावशाली बीआरआई परियोजना के बावजूद अपने घरेलू बाजारों को बनाए रखने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि आज चीन की आर्थिक योजनाएं खतरे से भरी हैं। यह आर्थिक योजनाएं एक तरह से चीन के रणनीतिक प्रोजेक्ट हैं, जो मौजूदा बने तनावग्रस्त समय के अनुरूप सही नहीं हैं। उन्होंने रूस-चीन संबंधों पर भी ध्यान दिलाया।
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ब्रिगेडियर प्रवीण बद्रीनाथ ने हार्टलैंड थ्योरी संबंधी चीनी दृष्टिकोण बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीआरआई कॉरिडोर के द्वारा छोटे देश चीन के इन सड़क संबंधी परियोजनाओं का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि पिछले कुछ दशकों से घट रही घटनाएं यह दिखाती हैं कि चीन धीरे-धीरे कर्जे की लपेट में फंसे देशों की तरफ बढ़ता जा रहा है।