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मेट्रो प्रोजेक्ट की बैठक स्थगित
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 08 Jan 2014 02:07 AM IST
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ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट के एमओयू में अब और देरी होगी। एमओयू को लेकर नई दिल्ली में बुधवार दोपहर 12 बजे केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से बुलाई गई बैठक स्थगित हो गई। बैठक की नई तिथि अभी तय नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि इस माह के अंत में बैठक होगी।
इसमें चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों को भी हिस्सा लेना था। इससे पहले दिसंबर में भी एक बार मंत्रालय की ओर से बुलाई गई बैठक स्थगित हो चुकी है। ऐसे में मेट्रो के प्रोजेक्ट के एमओयू पर हस्ताक्षर होने में देरी होगी।
एमओयू पर हस्ताक्षर होंने के बाद ही इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी का गठन होगा। पंजाब और हरियाणा की मांग पर प्रशासन ने एमओयू की कुछ शर्तों में बदलाव कर एमओयू के ड्रॉफ्ट को नवंबर में मंजूरी के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा था। मंत्रालय ने मंजूरी देने से पहले प्रशासन और पंजाब व हरियाणा के अधिकारियों की बैठक दिसंबर में बुलाई थी। लेकिन, बैठक न हो सकी।
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पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र की बराबर की हिस्सा
इसमें पंजाब और हरियाणा की सबसे बड़ी आपत्ति यहा थी कि मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप (पीपीपी) मोड में न किया जाए। एमओयू के ड्रॉफ्ट से अब इस शर्त को हटा लिया गया है। एमओयू में स्पष्ट होगा कि ट्राइसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए गठित एसपीवी में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा होगा।
एसपीवी का नाम चंडीगढ़ ट्राइसिटी मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (सीटीएमटीसी) होगा। यह एसपीवी कंपनीज एक्ट, 1956 के तहत पंजीकृत होगी। अब सीटीएमटीसी ही ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे ले जाएगी और प्रोजेक्ट से जुड़े तमाम फैसले लेने का अधिकार भी कंपनी के पास ही होगा। ध्यान रहे कि एमओयू के नियमों व शर्तों को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच कई बैठकों के बाद सहमति बन पाई है। इसमें छह महीने लग गए।
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इसमें चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों को भी हिस्सा लेना था। इससे पहले दिसंबर में भी एक बार मंत्रालय की ओर से बुलाई गई बैठक स्थगित हो चुकी है। ऐसे में मेट्रो के प्रोजेक्ट के एमओयू पर हस्ताक्षर होने में देरी होगी।
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एमओयू पर हस्ताक्षर होंने के बाद ही इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी का गठन होगा। पंजाब और हरियाणा की मांग पर प्रशासन ने एमओयू की कुछ शर्तों में बदलाव कर एमओयू के ड्रॉफ्ट को नवंबर में मंजूरी के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा था। मंत्रालय ने मंजूरी देने से पहले प्रशासन और पंजाब व हरियाणा के अधिकारियों की बैठक दिसंबर में बुलाई थी। लेकिन, बैठक न हो सकी।
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पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र की बराबर की हिस्सा
इसमें पंजाब और हरियाणा की सबसे बड़ी आपत्ति यहा थी कि मेट्रो के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप (पीपीपी) मोड में न किया जाए। एमओयू के ड्रॉफ्ट से अब इस शर्त को हटा लिया गया है। एमओयू में स्पष्ट होगा कि ट्राइसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए गठित एसपीवी में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा होगा।
एसपीवी का नाम चंडीगढ़ ट्राइसिटी मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (सीटीएमटीसी) होगा। यह एसपीवी कंपनीज एक्ट, 1956 के तहत पंजीकृत होगी। अब सीटीएमटीसी ही ट्राइसिटी के मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे ले जाएगी और प्रोजेक्ट से जुड़े तमाम फैसले लेने का अधिकार भी कंपनी के पास ही होगा। ध्यान रहे कि एमओयू के नियमों व शर्तों को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच कई बैठकों के बाद सहमति बन पाई है। इसमें छह महीने लग गए।