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चंडीगढ़ में मेट्रो चलेगी या नहीं: राइट्स के सर्वे पर सवाल, इन छह बिंदुओं पर दोबारा मंथन से होगा तय

Mon, 31 Mar 2025 03:31 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 31 Mar 2025 03:31 PM IST
सार

चंडीगढ़ में मेट्रो चलाने का प्रस्ताव काफी समय से पेंडिंग है। वरिष्ठ अधिकारियों ने राइट्स की सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। 

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Metro in Chandigarh Questions on survey of RITES rethinking on six points
Metro - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चंडीगढ़ समेत ट्राइसिटी में मेट्रो परियोजना को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। अब मेट्रो चलेगी या नहीं, इसका फैसला 6 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर फिर से मंथन के बाद होगा। वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी ने राइट्स की सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कैग रिपोर्ट के आधार पर 6 अहम बिंदुओं पर दोबारा काम करने के निर्देश दिए हैं।

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चंडीगढ़ में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना को लेकर हाल में हुई बैठक में परियोजना के सलाहकार राइट्स (रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा) से कई सवाल पूछे गए। बैठक में सबसे अहम सवाल 2056 के लिए अनुमानित राइडरशिप को लेकर था, जिस पर कमेटी के चेयरमैन ने चिंता व्यक्त की। राइट्स ने अपनी ओर से पेश किए गए आंकड़ों की सटीकता पर 90 फीसदी विश्वास जताया। हालांकि चेयरमैन ने 2056 के लिए अनुमानित 11.3 लाख की राइडरशिप पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि वास्तविक राइडरशिप 5 लाख से भी कम रहती है तो राइट्स की क्या जिम्मेदारी होगी।
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बैठक में अधिकारियों ने राइट्स की तरफ से पेश किए गए स्टडी रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। इसके बाद कमेटी ने सिफारिश की है कि मेट्रो परियोजना के लिए अन्य महानगरों में हुई मेट्रो परियोजनाओं के वास्तविक और अनुमानित सवारियों के आंकड़े सीएजी (कैग) रिपोर्ट के अनुसार जांचे जाएं। यूटी प्रशासन के परिवहन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है कि वो अन्य शहरों की मेट्रो की कैग रिपोर्ट राइट्स को मुहैया कराएंगे। साथ ही, परिचालन लागत और राजस्व की भी कैग रिपोर्टों के अनुसार समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।

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राइट्स सॉफ्टवेयर मॉडलिंग की विश्वसनीयता की भी जांच की जाएः कमेटी

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि राइट्स द्वारा तैयार की गई रिपोर्टों की गहन समीक्षा हो। इसमें वास्तविक और अनुमानित सवारियों की तुलना के साथ-साथ राइट्स सॉफ्टवेयर मॉडलिंग की विश्वसनीयता की भी जांच की जाए। सवारियों के अनुमान से जुड़े कन्वर्जन फैक्टर पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए गए। किराया ढांचे में हर साल 5 फीसदी की वृद्धि का अनुमान ज्यादा माना गया। इसे फिर से जांचने और दिल्ली मेट्रो के पिछले वर्षों के किराया वृद्धि के आंकड़ों का विश्लेषण करके एक वास्तविक और तार्किक किराया वृद्धि तय करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 3 फीसदी प्रतिवर्ष यातायात वृद्धि के अनुमान पर भी पुनर्विचार की बात कही गई है। बैठक के अंत में राइट्स को निर्देश दिया गया कि वे कमेटी द्वारा उठाए गए मुद्दों का विश्लेषण करें और रिपोर्ट प्रस्तुत करें। समिति में पंजाब सरकार, हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। इस रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लेकर इसे चंडीगढ़ प्रशासन को सौंपा जाएगा।

राइट्स से पूछा- देश में 34 मेट्रो परियोजनाएं, आप कितने में शामिल रहे

बैठक में हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (नगर एवं ग्राम आयोजना) ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 34 मेट्रो परियोजनाएं या तो चल रही हैं या निर्माणाधीन हैं। उन्होंने राइट्स से पूछा कि इनमें से कितनी परियोजनाओं में उनकी कंपनी शामिल रही है। राइट्स ने बताया कि उन्होंने इनमें से 15-18 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की है। जैसे-जैसे मेट्रो नेटवर्क बढ़ता है, उसकी राइडरशिप में तेजी से वृद्धि होती है। दिल्ली मेट्रो का उदाहरण देते हुए राइट्स ने बताया कि जब फेज 1 (6 किमी कॉरिडोर) शुरू हुआ था, तब शुरुआती राइडरशिप केवल 50,000 थी, लेकिन नेटवर्क के विस्तार के साथ राइडरशिप में काफी वृद्धि हुई।

राइट्स ने कोच्चि में 1.32 लाख यात्रियों की जताई थी उम्मीद, राइडरशिप रही 86,581

कमेटी ने कहा कि राइट्स के अनुसार कोच्चि मेट्रो के लिए 2023 में अनुमानित राइडरशिप 1.32 लाख यात्री प्रतिदिन थी, जबकि वास्तविक राइडरशिप 86,581 रही। कोच्चि मेट्रो को 2022-2023 से 2023-2024 के बीच 32 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ। उन्होंने दिल्ली मेट्रो का उल्लेख किया, जो सालाना 400-500 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित कर रही है। अहमदाबाद मेट्रो के प्रदर्शन पर भी चर्चा हुई, जहां 2020-21 में परिचालन राजस्व 5.62 लाख, 2021-22 में 21.86 लाख और 2022-23 में 11.74 करोड़ रुपये था, जबकि 2021-22 में 46.53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। बता दें कि पिछली बैठकों में प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने मेट्रो की व्यवहार्यता को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने सवारियों की संख्या और आने वाले खर्च को लेकर तुलनात्मक रिपोर्ट बनाने के आदेश दिए थे। इसके लिए ही इस एक्सपर्ट कमेटी का गठन हुआ है, जिसमें चंडीगढ़ के साथ पंजाब और हरियाणा के भी वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

प्रस्तावित एमआरटीएस फेज-1

- न्यू चंडीगढ़ के पड़ौल से पंचकूला के सेक्टर 28 - 32.20 किमी
- सुखना लेक से पंचकूला के सेक्टर-20 वाया एयरपोर्ट और आईएसबीटी जीरकपुर - 39.50 किमी
- सेक्टर-39 के ग्रेन मार्केट चौक से ट्रांसपोर्ट लाइट चौक वाया ट्रिब्यून चौक - 13.95 किमी
- अंडरग्राउंड - 16.5 किमी
- प्रस्तावित कॉरिडोर विस्तार - 6.15 किमी
 

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