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यह रिसर्च पूरी हो गई तो अल्जाइमर से कभी भी याद्दाश्त नहीं जाएगी, चूहों पर प्रयोग हुआ सफल
Tue, 30 Jul 2019 02:10 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 30 Jul 2019 02:10 PM IST
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आरती सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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अगर सब कुछ ठीक रहा तो अल्जाइमर से किसी की याद्दाश्त नहीं जाएगी। पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्रा डॉ. आरती सिंह को रिसर्च के जरिए बड़ी सफलता मिली है। वह वर्तमान में आइसर मोगा में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि अल्जाइमर को लेकर एनिमल स्टडी पूरी हो गई है। अब ह्यूमन स्टडी के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।
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इस रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए जेब्रा और फिश में भी एक शोध कार्य चल रहा है। पीयू के यूआईपीएस विभाग में डॉ. आरती सिंह ने रिसर्च किया है। उनका कहना है कि ब्रेन में एमुलाइड रसायन की अधिकता होती है। जब वह जमा होता जाता है और धीरे धीरे उम्र बढ़ती है तो याद्दाश्त जाने लगती है।
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इससे पहले माइटोकॉन्ड्रियल डिसफंक्शन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस होता है। यह बढ़कर मेमोरी लॉस में बदल जाता है। इसके कारणों का पता लगाने के लिए भी लंबे समय तक रिसर्च किया गया।
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आरती ने बताया कि रिसर्च में चूहों पर स्टडी की गई। सामान्य चूहों को सर्जरी के जरिए एमुलाइड 42 रसायन दिया गया। यह रसायन मेमोरी लॉस करने का काम करता है। देखने में आया कि चूहों की याद्दाश्त कम होने लगी है और आखिर में उनकी याद्दाश्त बिल्कुल चली गई। रसायन के मस्तिष्क में जमा होने के कारणों का पता लगाया तो सामने आया कि माइट्रोकांड्रिया के जरिए ब्रेन को एनर्जी नहीं मिली। साथ ही ऑक्सीजन की भी कमी हो गई।
रिसर्च के जरिए ही चूहों को 21 दिन तक एनर्जी न्यूट्रिशन व सप्लीमेंट ओरल दिए गए, जिसकी वजह से चूहे की मेमोरी लॉस नहीं हुई। धीरे-धीरे परिणाम सामने आने लगे। चार साल से अधिक चले इस रिसर्च में काफी हद तक सफलता मिली है। डॉ. आरती कहती हैं कि अब इस रिसर्च को जेब्रा व फिश पर ट्राई किया जा रहा है। साथ ही मानव स्टडी करने के लिए भी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस रिसर्च के लिए आईबीआरओ की ओर से इंटरनेशनल ट्रैवल अवार्ड के रूप में 1.37 लाख रुपये भी दिए गए। उन्होंने इस रिसर्च को ऑस्ट्रेलियन न्यूरो साइंस कॉन्फ्रेंस में भी पेश किया था।
रिसर्च के जरिए ही चूहों को 21 दिन तक एनर्जी न्यूट्रिशन व सप्लीमेंट ओरल दिए गए, जिसकी वजह से चूहे की मेमोरी लॉस नहीं हुई। धीरे-धीरे परिणाम सामने आने लगे। चार साल से अधिक चले इस रिसर्च में काफी हद तक सफलता मिली है। डॉ. आरती कहती हैं कि अब इस रिसर्च को जेब्रा व फिश पर ट्राई किया जा रहा है। साथ ही मानव स्टडी करने के लिए भी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस रिसर्च के लिए आईबीआरओ की ओर से इंटरनेशनल ट्रैवल अवार्ड के रूप में 1.37 लाख रुपये भी दिए गए। उन्होंने इस रिसर्च को ऑस्ट्रेलियन न्यूरो साइंस कॉन्फ्रेंस में भी पेश किया था।