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अदंरूनी कलह ने किया जीत का मजा किरकिरा
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Jan 2014 09:06 AM IST
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मेयर चुनाव में कांग्रेस से सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का पद छीनने वाली भाजपा की जीत का मजा अंदरूनी कलह से किरकिरा हो गया है।
मेयर पद पर हारने वाली भाजपा प्रत्याशी राजिंदर कौर रत्तू बुधवार को नतीजे के बाद से ही नाराज होकर घर चली गई थीं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेता दूसरे दिन भी उन्हें मनाने में जुटे रहे।
मैं दलित थी इसलिए हरा दिया : रत्तू
राजिंदर कौर रत्तू ने वीरवार को बताया कि हार के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें जिताने के लिए पार्टी ने कोशिश ही नहीं की। पार्टी ने जातीय भेदभाव बरता।
मुझे पार्टी के ही कुछ छोटे नेताओं ने साजिश कर हराया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से एक दिन पहले ही हमारी ही पार्टी के नेताओं ने मुझ पर ये आरोप लगवाए कि मैंने वार्ड डवलपमेंट फंड कम इस्तेमाल किया।
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इसके विपरीत हकीकत यह है कि मेरे वार्ड के प्रोजेक्ट राजनीति कर अधर में रोक दिए गए। उन पर काम ही नहीं हो रहा है तो खर्च कैसे होता।
रत्तू ने कहा कि मौलीजगरां में थड़ा मार्केट का मुद्दा वह फिर से उठाएंगी। पहले तो उनकी मांग वहां तीन सौ बूथों के लिए थी अब वह छह सौ बूथ बनाए जाने की मांग करेंगी।
वीरवार देर शाम तक टंडन उन्हें मनाने की कोशिशें करते रहे। इससे पहले रत्तू ने मेयर चुनाव में विजेता रहे देवेश मोदगिल और हीरा नेगी से निगम कार्यालय जा कर मुलाकात की।
कांग्रेस उठा सकती है फायदा
भाजपा में आपसी फूट का फायदा अब कांग्रेस उठा सकती है। सूत्रों की मानें तो कुछ कांग्रेसी नेता रत्तू को अपने साथ जुड़ने के लिए संपर्क साधने व मिलने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इस पर रत्तू ने कुछ नहीं कहा।
कोट
मुझे अभी तक राजिंदर कौर रत्तू का इस्तीफा नहीं मिला है। ऐसी कोई बात नहीं है, हम उन्हें पार्टी नहीं छोड़ने देंगे।
संजय टंडन, प्रदेशाध्यक्ष,भाजपा
कोट
मेयर चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को अच्छी पटखनी दी है। मगर इस जीत का सारा मजा किरकिरा हो गया है। राजिंदर कौर रत्तू पार्टी की एक प्रभावशाली नेता हैं। अगर वे जाती हैं तो पार्टी को काफी नुकसान होगा।
-हरमोहन धवन, पूर्व केंद्रीय मंत्री
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मेयर पद पर हारने वाली भाजपा प्रत्याशी राजिंदर कौर रत्तू बुधवार को नतीजे के बाद से ही नाराज होकर घर चली गई थीं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेता दूसरे दिन भी उन्हें मनाने में जुटे रहे।
मैं दलित थी इसलिए हरा दिया : रत्तू
राजिंदर कौर रत्तू ने वीरवार को बताया कि हार के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें जिताने के लिए पार्टी ने कोशिश ही नहीं की। पार्टी ने जातीय भेदभाव बरता।
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मुझे पार्टी के ही कुछ छोटे नेताओं ने साजिश कर हराया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से एक दिन पहले ही हमारी ही पार्टी के नेताओं ने मुझ पर ये आरोप लगवाए कि मैंने वार्ड डवलपमेंट फंड कम इस्तेमाल किया।
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इसके विपरीत हकीकत यह है कि मेरे वार्ड के प्रोजेक्ट राजनीति कर अधर में रोक दिए गए। उन पर काम ही नहीं हो रहा है तो खर्च कैसे होता।
रत्तू ने कहा कि मौलीजगरां में थड़ा मार्केट का मुद्दा वह फिर से उठाएंगी। पहले तो उनकी मांग वहां तीन सौ बूथों के लिए थी अब वह छह सौ बूथ बनाए जाने की मांग करेंगी।
वीरवार देर शाम तक टंडन उन्हें मनाने की कोशिशें करते रहे। इससे पहले रत्तू ने मेयर चुनाव में विजेता रहे देवेश मोदगिल और हीरा नेगी से निगम कार्यालय जा कर मुलाकात की।
कांग्रेस उठा सकती है फायदा
भाजपा में आपसी फूट का फायदा अब कांग्रेस उठा सकती है। सूत्रों की मानें तो कुछ कांग्रेसी नेता रत्तू को अपने साथ जुड़ने के लिए संपर्क साधने व मिलने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल इस पर रत्तू ने कुछ नहीं कहा।
कोट
मुझे अभी तक राजिंदर कौर रत्तू का इस्तीफा नहीं मिला है। ऐसी कोई बात नहीं है, हम उन्हें पार्टी नहीं छोड़ने देंगे।
संजय टंडन, प्रदेशाध्यक्ष,भाजपा
कोट
मेयर चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को अच्छी पटखनी दी है। मगर इस जीत का सारा मजा किरकिरा हो गया है। राजिंदर कौर रत्तू पार्टी की एक प्रभावशाली नेता हैं। अगर वे जाती हैं तो पार्टी को काफी नुकसान होगा।
-हरमोहन धवन, पूर्व केंद्रीय मंत्री