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इकलौता बेटा देश के लिए शहीद, पैतृक गांव में अंतिम संस्कार

Sat, 26 Mar 2016 04:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद।
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद। Updated Sat, 26 Mar 2016 04:07 PM IST
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नम आंखों से बीएसएफ जवान को दी अंतिम विदाई - फोटो : amarujala
अरुणाचल में ड्यूटी के दौरान बीएसएफ जवान संजीव कुमार की शहादत के बाद उनके पैतृक गांव गोसांई खेड़ा में सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया। शहीद संजीव परिवार के इकलौता चिराग थे। गोसांई खेड़ा निवासी 21 वर्षीय संजीव कुमार बीएसएफ में अरुणाचल प्रदेश के नामशाही जिले में ड्यूटी पर तैनात थे।
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ड्यूटी के दौरान 21 मार्च को अचानक संजीव की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें अधिकारियों द्वारा अस्पताल में दाखिला कराया गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसकी सूचना संजीव के गांव गोसांई खेड़ा में भी दी गई। संजीव के अचानक निधन से गांव में मातम छा गया। बुधवार को संजीव के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए गांव में लाया गया और राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
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कंपनी सूबेदार कोमल सिंह ने बताया कि 21 जुलाई 2014 को संजीव कुमार सेना में भर्ती हुए थे। ट्रेनिंग के बाद उन्हें जबलपुर से अरुणाचल प्रदेश के नामशाही जिले में भेजा गया था। गत 21 मार्च की शाम को जब संजीव कुमार ड्यूटी पर तैनात थे तो हृदय गति रुकने से संजीव की मौत हो गई। अंतिम संस्कार में विधायक परमेंद्र सिंह ढुल, तहसीलदार दलीप सिंह खर्ब, जुलाना थाना प्रभारी समुंद्र सिंह, सूबेदार कोमल सिंह, भाजपा नेता पवन दूहन, जिला सैनिक बोर्ड से सतबीर सिंह, राजेंद्र सिंह, हवलदार कर्मसिंह, हवलदार पालेराम सहित सैकड़ों ग्रामीणों मौजूद थे।
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12 साल पहले पिता भी हुए थे शहीद

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अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ व सैनिक को सलामी देते बीएसएफ के जवान। - फोटो : amarujala
सैनिक संजीव के पिता जगदीश सिंहमार भी सेना में थे। जो 12 साल पहले दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। उन्हीं से प्रेरणा लेकर संजीव कुमार भी सेना में दो साल पहले ही भर्ती हुए। जगदीश सिंहमार के सम्मान में ग्रामीणों ने शामलो कलां मार्ग पर उनकी प्रतिमा भी बनवाई है। संजीव कुमार अपने पीछे मां और एक बहन को छोड़ गए हैं।

अगर दूसरा बेटा होता तो उसे भी भेजती फौज में: राजबाला
सैनिक संजीव की मां राजबाला का कहना है कि उनका बेटा शेर जैसा था। अगर उनका दूसरा बेटा होता तो उसे भी वो सेना में ही भेजती।
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