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यूक्रेन संकट: फिरोजपुर का एक और जीरा के दो छात्रों की नहीं हो पा रही वतन वापसी, सुनाम का धीरज तीन दिन से पोलैंड सीमा पर खड़ा

Sun, 27 Feb 2022 08:05 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर/सुनाम (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजपुर/सुनाम (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 27 Feb 2022 08:05 PM IST
सार

गांव मलसियां से एक और युवक एमबीबीएस की पढ़ाई यूक्रेन में कर रहा है। वह छह साल से वहीं हैं। उसे 24 फरवरी को भारत लौटना था लेकिन अचानक फ्लाइट बंद हो गई।

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Many students of Punjab still stuck in Ukraine
धीरज वर्मा और फिरोजपुर का आशीष अबरोल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए जीरा के दो और फिरोजपुर का एक छात्र वहां फंसा है। इनके अभिभावकों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। जिस इमारत में ये रहते हैं, वहां बम और गोलियों की आवाज सुनाई दे रही है। यह इलाका रूस सीमा से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां बहुत ठंड है और खाने-पीने का सामान भी नहीं मिल पा रहा हैं। 

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अभिभावकों ने केंद्र सरकार से बच्चों को यूक्रेन से सुरक्षित भारत लाने की अपील की है। फिरोजपुर के साधु सिंह चौक निवासी राकेश अबरोल ने बताया कि उनका बेटा आशीष अबरोल एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन के खारकीव गया था। उसकी 24 फरवरी की फ्लाइट थी लेकिन अचानक उड़ानें बंद हो गईं। 
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मां प्रवीन कहती हैं कि वह फ्लैट में अपने दोस्तों के संग रह रहा है। जिस इमारत में रहते हैं वहां पर गोलियों व बम की आवाज से सहमे हैं। खाने-पीने का कोई सामान नहीं मिल पा रहा है। जीरा के गांव मलसियां से इंदरप्रीत सिंह एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गए हैं, उनकी पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी है। 

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परिवार के लोगों का कहना है कि खारकीव में इंदरप्रीत रह रहा है, वहां ठंड बहुत है। व्हाट्सएप के जरिए उनकी इंदरप्रीत से बातचीत हुई है। उसने बताया कि खाने-पीने का सामान नहीं मिल रहा है। इसी तरह गांव मलसियां से एक और युवक एमबीबीएस की पढ़ाई यूक्रेन में कर रहा है। वह छह साल से वहीं हैं। उसे 24 फरवरी को भारत लौटना था लेकिन अचानक फ्लाइट बंद हो गई।

तीन दिन से पोलैंड बॉर्डर पर खड़ा है सुनाम का धीरज 
पौलेंड बॉर्डर पर खड़ा धीरज वर्मा पिछले तीन दिनों से भारत आने का इंतजार कर रहा है। तीन दिनों से वह सो नहीं पाया है और न खाना खा सका। ट्रैफिक जाम की वजह से वह 30 किलोमीटर पैदल चलकर पोलैंड सीमा तक पहुंचा। मोबाइल की बैटरी तक खत्म हो गई है। उक्त जानकारी धीरज वर्मा की माता लवली वर्मा ने दी। 

उन्होंने बताया कि धीरज, यूक्रेन में टरनोपिल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा है। रूस के हमले के बाद वहां दहशत का माहौल है। करीब 24 घंटे बाद रविवार की शाम को मुश्किल से कुछ पल बेटे से बात हुई है। पोलैंड सीमा पर करीब 1500 छात्र फंसे हैं। लवली वर्मा ने बताया कि उनका बेटा बहादुर है और धीरज ने कभी धीरज नहीं छोड़ा लेकिन आज बात करते वक्त पहली बार रोने का आभास हुआ। 

बेटे ने बताया कि डेंजर जोन से छात्रों को पहले निकाला जा रहा है। उनका बेटा एक दिन बंकर में रहा है। धीरज, चार फरवरी को दिल्ली से यूक्रेन पहुंचा था, वह पांचवें वर्ष में है। धीरज के पिता एडवोकेट सुखविंदर वर्मा और माता ने बताया कि धीरज वर्मा से संबंधित सूचना जिला प्रशासन को दे दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि यूक्रेन में फंसे सभी छात्रों और अन्य नागरिकों को तुरंत सुरक्षित भारत लाने का प्रबंध किया जाए। वहां सभी छात्र कई दिनों से भूखे हैं और सड़कों पर रात गुजार रहे हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से भी मांग की है कि केंद्र से संपर्क कर बच्चों को देश में लाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाए।    

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