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अकाली दल को टूटने से बचाने में फिर कामयाब रहे प्रकाश सिंह बादल, तीन करीबी हुए थे नाराज
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, अमृतसर/जालंधर
Updated Mon, 01 Oct 2018 09:35 AM IST
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प्रकाश सिंह बादल
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव 2019 सिर पर हैं, और इससे पहले ही जिंदगी के 89वें पायदान पर चल रहे पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने एक बार फिर अकाली दल को टूटने से बचा लिया। टकसाली अकाली सुखदेव सिंह ढींढसा के बाद पार्टी छोड़ने में अगला नंबर रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला और सेवा सिंह सेखवां का है।
तीनों ढींढसा के काफी करीबी माने जाते हैं लेकिन पूर्व सीएम तीनों नेताओं को मनाने में कामयाब हो गए। यदि ये तीनों टकसाली पार्टी को अलविदा कह जाते तो पार्टी को जबरदस्त झटका लगना तय था। इसकी नजाकत पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल अच्छी तरह से समझ गए थे। रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा अकाली दल के टकसाली नेता रहे हैं। वह नौशहरा पन्नूआं से 1997 से लेकर 2002 और 2007 में लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं।
ब्रह्मपुरा को माझे के शेर के नाम से भी जाना जाता है। वह 2007 में बादल सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। मौजूदा समय में ब्रह्मपुरा खडूर साहिब से सांसद हैं। वहीं रतन सिंह अजनाला भी अकाली दल के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। अजनाला चार बार विधायक रह चुके हैं। वे 1985 में अकाली दल की तरफ से चुनाव मैदान में उतरे थे और विजेता रहे थे। 1994 में अजनाला ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा था।
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अजनाला ने 1997 और 2002 में फिर अकाली दल की तरफ से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वहीं सेवा सिंह सेखवां पंजाब के शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। अकाली दल माझा में तमाम फैसले तीनों नेताओं की सहमति के साथ लेता आया है। पार्टी में 2007 के बाद से बिक्रम सिंह मजीठिया अचानक काफी ताकतवर हो गए तो पार्टी के ये तीनों दिग्गज हाशिये पर चले गए।
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तीनों ढींढसा के काफी करीबी माने जाते हैं लेकिन पूर्व सीएम तीनों नेताओं को मनाने में कामयाब हो गए। यदि ये तीनों टकसाली पार्टी को अलविदा कह जाते तो पार्टी को जबरदस्त झटका लगना तय था। इसकी नजाकत पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल अच्छी तरह से समझ गए थे। रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा अकाली दल के टकसाली नेता रहे हैं। वह नौशहरा पन्नूआं से 1997 से लेकर 2002 और 2007 में लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं।
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ब्रह्मपुरा को माझे के शेर के नाम से भी जाना जाता है। वह 2007 में बादल सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। मौजूदा समय में ब्रह्मपुरा खडूर साहिब से सांसद हैं। वहीं रतन सिंह अजनाला भी अकाली दल के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। अजनाला चार बार विधायक रह चुके हैं। वे 1985 में अकाली दल की तरफ से चुनाव मैदान में उतरे थे और विजेता रहे थे। 1994 में अजनाला ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा था।
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अजनाला ने 1997 और 2002 में फिर अकाली दल की तरफ से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वहीं सेवा सिंह सेखवां पंजाब के शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। अकाली दल माझा में तमाम फैसले तीनों नेताओं की सहमति के साथ लेता आया है। पार्टी में 2007 के बाद से बिक्रम सिंह मजीठिया अचानक काफी ताकतवर हो गए तो पार्टी के ये तीनों दिग्गज हाशिये पर चले गए।
सियासत में मंझे प्रकाश सिंह बादल ने पार्टी को टूटने नहीं दिया
प्रकाश सिंह बादल
अकाली दल की तरफ से मजीठिया को माझे का जरनैल प्रोजेक्ट किया गया। 2007 से लेकर 2017 तक तीनों अकाली दल के टकसाली नेताओं के अलावा पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के दामाद आदेश प्रताप सिंह कैरों भी मजीठिया को लेकर काफी नाराज रहे। कई बार मामला गड़बड़ाया भी लेकिन सियासत में मंझे प्रकाश सिंह बादल ने कभी टकसाली अकाली दल के नेताओं को अलग नहीं होने दिया।
2012 से लेकर 2017 तक माझा के टकसाली अकाली दल के नेताओं की नाराजगी चरम पर पहुंच गई लेकिन बादल ने पार्टी को टूटने नहीं दिया। ब्रह्मपुरा तक पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल से शिकायत करते रहे कि मजीठिया उनके सिर पर युवा नेताओं को बैठा रहा है, जिससे माझा में अकाली दल का ग्राफ गिरता जा रहा है।
रविवार को एक बार फिर लगने लगा था कि माझा के ये तीनों दिग्गज मीडिया से मुखातिब होकर इस्तीफा देंगे। जबकि इन नेताओं के बारे में अकसर कहा जाता है कि यह मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं। कयास सुबह से ही शुरू हो चुके थे लेकिन शाम को 4.30 से पहले ही पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल तीनों को मनाने में कामयाब हो गए।
तीनों नेताओं ने इशारे में कह भी दिया कि पार्टी में कई प्रधान आए और चले गए। माझा के जरनैल यानी मजीठिया के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह हर सप्ताह पार्टी की समीक्षा किया करेंगे। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पूर्व सीएम बादल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि माझे में उनका रुतबा कम नहीं होने दिया जाएगा।
2012 से लेकर 2017 तक माझा के टकसाली अकाली दल के नेताओं की नाराजगी चरम पर पहुंच गई लेकिन बादल ने पार्टी को टूटने नहीं दिया। ब्रह्मपुरा तक पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल से शिकायत करते रहे कि मजीठिया उनके सिर पर युवा नेताओं को बैठा रहा है, जिससे माझा में अकाली दल का ग्राफ गिरता जा रहा है।
रविवार को एक बार फिर लगने लगा था कि माझा के ये तीनों दिग्गज मीडिया से मुखातिब होकर इस्तीफा देंगे। जबकि इन नेताओं के बारे में अकसर कहा जाता है कि यह मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं। कयास सुबह से ही शुरू हो चुके थे लेकिन शाम को 4.30 से पहले ही पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल तीनों को मनाने में कामयाब हो गए।
तीनों नेताओं ने इशारे में कह भी दिया कि पार्टी में कई प्रधान आए और चले गए। माझा के जरनैल यानी मजीठिया के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह हर सप्ताह पार्टी की समीक्षा किया करेंगे। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पूर्व सीएम बादल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि माझे में उनका रुतबा कम नहीं होने दिया जाएगा।