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सनी देओल, हरसिमरत समेत कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा ईवीएम में कैद, कांटे की है टक्कर

Mon, 20 May 2019 01:10 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 20 May 2019 01:10 AM IST
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Lok sabha elections 2019, Polling for final phase of lok sabha elections end in Punjab
लोकसभा चुनाव 2019

पंजाब में मतदान के साथ ही उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम में बंद हो गया। 23 मई को ही चुनावी तसवीर साफ होगी। पर इस बार लोकसभा चुनाव में कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल फिरोजपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। तो प्रदेश कांग्रेस प्रधान गुरदासपुर से चुनाव मैदान में हैं। सुखबीर के सामने यहां से लगातार जीतते आ रहे किसी समय उन्हीं की पार्टी के शेर सिंह घुबाया हैं। 

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घुबाया इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, जाखड़ का मुकाबला बॉलीवुड अदाकार सनी देओल से है। दोनों ही सीटों पर कड़ा मुकाबला है। पंजाबी एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल खैरा बठिंडा की रोमांचक जंग में फंसे हुए हैं। पंजाब से दो केंद्रीय मंत्री भी मैदान में हैं। हरसिमरत कौर बादल तीसरी बार बठिंडा से चुनाव लड़ रही हैं। तो हरदीप पुरी को भाजपा ने अमृतसर से उतारा है। 
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दोनों ही मंत्रियों की राह आसान नहीं दिख रही है। दोनों सीटों पर बेहद रोमांचक जंग है। बठिंडा की सीट तो बादल परिवार के लिए इज्जत का सवाल है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी आनंदपुर साहिब के रोमांचक मुकाबले में फंसे हैं। उनके सामने शिअद के मौजूदा सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा हैं।
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शाही शहर पटियाला से राजपरिवार की सदस्य परनीत कौर भी कांटे की जंग में फंसे हैं। उनके सामने पीडीए के मौजूदा सांसद डॉ. धरमवीर गांधी हैं। इस सीट पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। इसलिए उन्होंने सबसे ज्यादा प्रचार यहीं किया है।

नई पार्टियों के भविष्य पर नजरें
इस बार चुनाव से पहले पंजाब में कई नई पार्टियां बनीं। यह चुनाव इनका भविष्य भी तय करेगा। सुखपाल खैरा ने आम आदमी पार्टी छोड़ कर पंजाबी एकता पार्टी बनाई है। वहीं, शिअद के पुराने दिग्गजों ने अलग होकर शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) बनाया है।


खैरा ने अन्य दलों के साथ पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस बना कर सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि, टकसाली सिर्फ दो सीटों पर लड़ रहे हैं। इस चुनाव में इन पार्टियों का प्रदर्शन ही इनका भविष्य तय करेगा। 2011 में मनप्रीत बादल ने पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाई तो उसे काफी समर्थन मिला था, लेकिन चुनाव में वह कुछ नहीं कर सके थे। बाद में पार्टी कांग्रेस में मर्ज हो गई थी।

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